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कारगिल विजय दिवस: गोली लगने के बाद बेहोशी की हालत में क्या सोच रहा था ये जवान, पढ़ें

Wed, 26 Jul 2017 03:59 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, गोंडा
ब्यूरो/अमरउजाला, गोंडा Updated Wed, 26 Jul 2017 03:59 PM IST
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  kargil diwas special story of gonda soldier vijay singh
‌व‌िजय स‌िंह अपने साथ‌ियों के साथ - फोटो : amar ujala
26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध को फतह कर पाकिस्तान को उसकी हैसियत दिखा दी थी। इस युद्ध के नायकों में गोंडा का भी एक जवान शामिल था जिसने गोली लगने के बावजूद अपनी टूटती सांस की परवाह नहीं की और फतह को चूम लिया।
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जिले के बेलसर ब्लाक के ऐली परसौली गांव में जन्मे विजय सिंह उस वक्त बारामूला में 16 ग्रेनेडियर रेजीमेंट में बतौर नायक तैनात रहे। एमएमजी, एजीएल व एके 47 का प्रशिक्षण प्राप्त विजय सिंह को यूनिट के साथ द्रास सेक्टर भेजा गया।
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विजय सिंह कहते हैं कि नौ जून 1999 में कश्मीर में कारगिल युद्ध शुरू हुआ। युद्ध के दौरान पता चला कि पाकिस्तानी फौज ने कारगिल सहित कश्मीर की 15 पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है। पाक के इस नापाक इरादों की जानकारी होते ही फौज की सभी यूनिटों को एलर्ट कर दिया गया और जगह-जगह पहाड़ियों पर जवानों को भेज दिया गया।
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सात बार ‌‌क‌िया दुश्मनों पर फायर

  kargil diwas special story of gonda soldier vijay singh
व‌िजय ‌स‌िंह - फोटो : amar ujala
विजय सिंह ने बताया कि कश्मीर में कारगिल सबसे ऊंची पहाड़ियों में है। जब लड़ाई शुरू हुई तो कमांडिंग आफीसर व दल नायक मेजर अजीत सिंह के नेतृत्व में उनकी यूनिट ने चढ़ाई शुरू कर दी। विजय सिंह कहते हैं कि एक माह की लड़ाई में उनके यूनिट के 12 जवान शहीद हो गए और 22 जवान जख्मी हुए।

बकौल विजय सिंह 5100 नंबर की पहाड़ी पर निर्णायक युद्ध चल रहा था। पहाड़ी के नीचे उनके यूनिट के जवान फायरिंग कर रहे थे और पहाड़ी पर चढ़ रहे थे। उनके बगल कवर फायरिंग के लिए इलाहाबाद का जवान अमर बहादुर भी था। विजय ने बताया कि इसी बीच उनके दाहिने पैर में गोली लग गई, लेकिन उन्हें महसूस नहीं हुआ।

थोड़ी देर बाद पैर मेें चिपचिपाहट महसूस हुई। इसके बावजूद लड़ाई जारी रही और सात बार दुश्मनों पर फायर किया, लेकिन पैर में गोली लगने से हुए रक्तस्राव से उनकी आंख के सामने अंधेरा छाने लगा। इसके बावजूद विजय अन्य जवानों के साथ युद्ध में जुट रहे। विजय कहते हैं कि युद्ध के दौरान दुश्मनों की ओर से  निकली गोली विजय के कमर में जा लगी।

गोली लगते ही विजय बेहोश हो गए और उनके साथी जवान धैर्य बंधाते रहे। बेहोशी अवस्था में वह 12 से 14 घंटे उसी पहाड़ी पर पड़े रहे। विजय सिंह ने बताया कि बेहोशी हालत में भी उनका इरादा था यदि दुश्मन सामने आ गए तो वे ग्रेनेड दगा देंगे और दुश्मनों के साथ वे भी शहीद हो जाएंगे।
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