राष्ट्रगान अपमान करने वाले करन जौहर को मिली बड़ी राहत
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‘कभी खुशी कभी गम’ में राष्ट्रगान का अपमान करने के मामले में निचली अदालत द्वारा फिल्म निर्देशक करन जौहर को बतौर आरोपी तलब करने के आदेश को चुनौती देने वाली निगरानी याचिका स्वीकार करते हुए एडीजे ध्रुवराज ने लोअर कोर्ट का आदेश खारिज कर दिया। जौहर पर प्रथमदृष्टया आरोप सही नहीं पाए गए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत का निष्कर्ष, पत्रावली पर जो साक्ष्य उपलब्ध है उसके खिलाफ है। निचली अदालत ने अपने मस्तिष्क का प्रयोग करके जौहर को बतौर आरोपी कोर्ट में तलब करने का आदेश दिया है।
निचली अदालत ने न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया। कोर्ट ने कहा, सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को प्रमाणपत्र जारी किया है। इसके बाद ही इसका देश-विदेश में प्रसारण हुआ। ऐसे में जौहर के खिलाफ प्रथमदृष्टया कोई ऐसा साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिसके आधार पर उन पर मुकदमा चलाया जाए।
कभी खुशी, कभी गम में हुआ था राष्ट्रगान का अपमान
गौरतलब है, वादी प्रताप सिंह ने निचली कोर्ट में सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष व करन जौहर के खिलाफ अर्जी देकर बताया था कि वह 22 जनवरी 2002 को फिल्म देखने गया था।
फिल्म में जब राष्ट्रगान दिखा गया तो उस दौरान न तो कोई सावधानी बरती गई, न ही फिल्म में कोई सावधान की मुद्रा में खड़ा था। वादी ने राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि फिल्म में राष्ट्रगान गाते समय कृष नामक बालक अन्तिम लाइन पर रुक गया तथा सॉरी बोलता है। इसके बाद उसकी मां आकर राष्ट्रगान को पूरा करती है।
वादी की इस अर्जी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्ञान प्रकाश तिवारी ने 22 अक्तूबर 2014 को करन जौहर को मामले से राहत की मांग वाली अर्जी खारिज करते उन पर आरोप तय कर दिया।