कानपुर की महिला शहर काजी ने सोशल मीडिया तलाक पर दिया ये बयान
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सोशल मीडिया के माध्यम से तीन तलाक देने पर शुरू हुई बहस को कानपुर की शिया महिला शहरकाजी डॉ. हिना जहीर नकवी ने अमान्य करार दिया है। उनका कहना है कि सबसे पहले तलाक गैरपसंदीदा अमल है।
इसके अलावा असामान्य मानसिक स्थिति और सोशल मीडिया में दिया गया तलाक नहीं माना जा सकता है। कुरआन-ए-पाक में तलाक पर हर बात साफ है।
डॉ. हिना जहीर ने बताया कि सोशल मीडिया को हथियार बनाकर तलाक देने के मसले को मान्यता मिली तो महिलाओं में असुरक्षा की भावना पैदा होगी। इसलिए वह ऐसे किसी भी अमल के खिलाफ हैं।
अगर किसी महिला संगठन ने इस मसले पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार से कोई मांग की है तो वह समर्थन करती हैं। उन्होंने बताया कि कुरान पाक में तलाक पर सूरह भी है। उसमें सभी मसलों का जिक्र है।
इन दशाओं में दिया गया तलाक मान्य नहीं
महिला शहरकाजी के मुताबिक शराब के नशे, गुस्से में या असामान्य स्थिति में दिया गया तलाक मान्य नहीं है। तलाक के बाद इद्दत (पति से अलग होने के बाद महिला का एक तय समय तक बिताया गया वक्त) का वक्त गुजारने के बाद अगर पति को अपनी गलती का एहसास होता हो तो वह बिना किसी शर्त के पत्नी को अपना सकता है।
उन्होंने कहा कि यह सच है कि इस्लाम में तलाक का अधिकार दिया गया है लेकिन यह भी सच है कि पैगंबर-ए-इस्लाम की जिंदगी (जो मुसलमानों के लिए सुन्नत है) जब पैगंबर-ए-इस्लाम ने अपनी जिंदगी में कोई ऐसा अमल नहीं किया तो इस अमल से जहां तक हो सके बचना चाहिए।
महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी पर है। सोशल मीडिया या गैर इस्लामिक तरीके से किए गए तलाक जैसे अमल को कतई नहीं माना जा सकता है।