4 दिन, 26 मौतों के बाद काम पर लौटे डॉक्टर
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4 दिन, 26 मौतों और अदालत की फटकार के बाद आखिकार केजीएमयू के जूनियर डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार को हड़ताल वापस ले ली। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान मरीजों के इलाज और मौतों पर जवाब मांगा तो केजीएमयू प्रशासन के पसीने छूट गए।
तब कुलपति प्रो. रविकांत, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. वीएन त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि रेजीडेंट डॉक्टर्स की एसोसिएशन ने हड़ताल वापस ले ली है। इसी के बाद बृहस्पतिवार दोपहर अचानक सोशल मीडिया पर हड़ताल खत्म होने का मैसेज वायरल होने लगा।
इस बीच, हड़ताल के कारण बृहस्पतिवार को नौ और मरीजों ने दम तोड़ दिया। इससे इलाज के अभाव में दम तोड़ देने वाले मरीजों की संख्या 26 तक पहुंच गई।
मौतों के आंकड़ों में उलझाता रहा केजीएमयू प्रशासन
बृहस्पतिवार को हड़ताल वापस लेने के बाद शाम को केजीएमयू प्रशासन ने अपना पक्ष रखने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। सीएमएस प्रो. एससी तिवारी ने जो आंकड़ा पेश किया उसके मुताबिक एक जून तक ट्रॉमा में 47 मरीजों की मौत हुई।
वहीं, कुलपति प्रो. रविकांत को दी गई रिपोर्ट में मृतकों की संख्या 19 दिखाई गई। देर रात, डिप्टी सीएमएस डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि 47 मरीजों की मौत ट्रॉमा में नहीं बल्कि पूरे अस्पताल में हुई।
ट्रॉमा सेंटर ने ये आंकड़े दिखाए
तिथि--पंजीकरण--भर्ती--मौत
30 मई--157--70--18
31 मई--67--57--16
01 जून--58--67--13
कुलपति को दिए ट्रॉमा सेंटर के आंकड़े
तिथि--कुल भर्ती मरीज--पंजीकरण--भर्ती--मौत
30 मई--252--68--41--10
31 मई--216--58--35--03
01 जून--129--56--30--06