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गैंगरेप के आरोपी गायत्री को जमानत देने वाले जज भी सस्पेंड

Sat, 29 Apr 2017 12:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 29 Apr 2017 12:23 PM IST
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judge suspended for permitting bail to gayatri prajapati
गायत्री प्रसाद प्रजापति - फोटो : amar ujala

पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को जमानत देने का निर्णय रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने जमानत देने वाले पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश ओमप्रकाश मिश्रा को सस्पेंड कर दिया हैै। 

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल डीके सिंह ने ओमप्रकाश मिश्रा के निलंबन की पुष्टि की। मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। यह जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुधीर अग्रवाल करेंगे। जांच 30 अप्रैल तक पूरी होगी। मालूम हो की ओम प्रकाश मिश्र 30 अप्रैल को रिटायर होने वाले हैं। 
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इससे पहले गायत्री को मिली जमानत के खिलाफ सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोसले ने ओमप्रकाश मिश्रा के खिलाफ सख्त टिप्पणियां की थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गायत्री के मामले में खुद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। 
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जांच के दौरान एक बेहद गंभीर मामले में आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश जल्दबाजी में दिया गया निर्णय है। पुलिस और सरकारी वकील को अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं मिल सका। हाईकोर्ट के निर्णय और जमानत देने में की गई जल्दबाजी को देखते हुए मिश्रा को निलंबित किया गया।

सरकारी वकील ने केस डायरी और रिकार्ड्स के बहुत ज्यादा होने की वजह से तीन दिन का समय मांगा था, लेकिन इसे दरकिनार करते हुए जमानत दे दी गयी। चीफ जस्टिस ने कहा, सरकारी वकील के प्रार्थना पत्र पर जज ने कुछ नहीं किया और गायत्री की अर्जी पर सुनवाई करते हुए बेल दे दी। 

जस्टिस भोसले ने कहा जज ने आरोपों की प्रकृति को दरकिनार करते हुए जल्दबाजी में आरोपी को जमानत दे दी। वे यह भी भूल गए की आरोपी पर एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी। एक ऐसे जज जो 30 अप्रैल को रिटायर होने जा रहे हैं, उनका जमानत देने के पीछे उद्देश्य क्या था, ये मेरे लिए चिंता की बात है।

गैंगरेप में गायत्री की जमानत खारिज

judge suspended for permitting bail to gayatri prajapati
डेमो प‌िक - फोटो : Pintrest

सामूहिक दुराचार और नाबालिग के यौन शोषण के आरोपों में जेल की हवा खा रहे पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को मिली जमानत हाईकोर्ट ने शुक्रवार को रद्द कर दी। 

पोक्सो एक्ट के न्यायाधीश ओपी मिश्रा ने जमानत दी थी। इसके बाद भी दो अन्य मामलों की वजह से गायत्री को जेल में ही रखा गया था, लेकिन दो अन्य आरोपियों विकास और पिंटू को छोड़ दिया गया था। चीफ जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोसले ने इन दोनों को गिरफ्तार करने के भी आदेश दिए हैं।

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार को दाखिल अर्जी में अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार साही ने दो आधार पर सत्र न्यायालय के जमानत के आदेश का विरोध किया। उन्होंने कहा कि गायत्री ने 24 अप्रैल को जमानत अर्जी दाखिल की थी। 

इस पर 25 अप्रैल को सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय ने जमानत के आदेश जारी कर दिए, जबकि सरकारी वकील और पुलिस के जांच अधिकारी ने न्यायालय से अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की थी। उनका कहना था कि वे केस डायरी व मामले से जुडे़ रिकॉर्ड्स का अध्ययन करके जवाब दे सकेंगे, लेकिन इसे नकार दिया गया।

विरोध का दूसरा आधार गायत्री प्रजापति की जमानत अर्जी थी, जिसमें उसने अपने खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने की बात कही थी। अपर महाधिवक्ता ने कहा कि गायत्री ने झूठ बोला है क्योंकि उसके खिलाफ छह मामले चल रहे हैं। 

सरकार ने हाईकोर्ट से कहा कि एक महिला ने गायत्री व उसके साथियों पर तीन वर्ष तक सामूहिक दुराचार करने का आरोप लगाया है। उसकी बेटी का भी यौनशोषण किया गया। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

मामले के फैक्ट्स

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गायत्री प्रजापति (फाइल फोटो)
50 वर्षीय महिला ने कैबिनेट मंत्री रहे गायत्री प्रजापति व छह अन्य पर सामूहिक दुराचार के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 17 फरवरी को इन सभी पर एफआईआर दर्ज हुई थी।

महिला का कहना था कि 2014 से 2016 के बीच उससे दुराचार किया गया।

आरोपियों ने उसकी बेटी के साथ भी दुराचार की कोशिश की। 17 दिन अंडरग्राउंड रहने के बाद गायत्री को 15 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।
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