यूपी: नड्डा ने रिपोर्ट कार्ड मांगा तो मंत्री-पदाधिकारियों को होगी मुश्किल, नहीं पूरी की दी गई जिम्मेदारियां
नड्डा 21-22 जनवरी को लखनऊ आए थे। इस दौरान योगी सरकार के मंत्रियों को व्यवहार सुधारने और मैं नहीं.. हम की बात करने को कहा था। उन्होंने मंत्रियों को चार साल का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने और इस साल की कार्ययोजना बनाने के साथ संगठन से समन्वय स्थापित करने की भी हिदायत दी थी।
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भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा शनिवार को लखनऊ आ रहे हैं। इस दौरान वह संगठन और सरकार के कार्यों की समीक्षा करेंगे। माना जा रहा है कि दो दिन के दौरे में वह मंत्रियों से फीडबैक न लेकर उनकी परफॉर्मेंस परखेंगे। ऐसे में नड्डा ने योगी सरकार के मंत्रियों व पार्टी पदाधिकारियों से उन्हें सौंपे गए एजेंडे पर जवाब-तलब कर लिया तो ज्यादातर की मुश्किलें बढ़ेंगी। पार्टी संगठन को फीडबैक मिला है कि अधिकांश मंत्री, प्रदेश पदाधिकारी और क्षेत्रीय पदाधिकारी राष्ट्रीय नेतृत्व की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं।
नड्डा 21-22 जनवरी को लखनऊ आए थे। इस दौरान योगी सरकार के मंत्रियों को व्यवहार सुधारने और मैं नहीं.. हम की बात करने को कहा था। उन्होंने मंत्रियों को चार साल का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने और इस साल की कार्ययोजना बनाने के साथ संगठन से समन्वय स्थापित करने की भी हिदायत दी थी।
मंत्रियों को सप्ताह में दो दिन कार्यालय में बैठकर जनता और कार्यकर्ताओं से संवाद करने तथा संगठनात्मक कार्यों में भागीदारी निभाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। मंत्रियों को महीने में कम से कम एक बार प्रभार वाले जिले में जाकर संगठन के पदाधिकारियों से संवाद करने को कहा गया था। संगठन को जिलों से फीडबैक मिला है कि अधिकांश मंत्रियों ने प्रभार वाले जिलों में प्रवास और संगठन से संवाद की जिम्मेदारी का पालन नहीं किया।
इतना ही मंत्री न तो सप्ताह में दो दिन कार्यालय में बैठे न ही कार्यकर्ताओं से संवाद किया। मंत्रियों ने चार साल का रिपोर्ट कार्ड तो तैयार किया है, लेकिन इस साल की कार्ययोजना कुछ मंत्रियों ने तैयार ही नहीं की। हालांकि मंत्री इसके मार्च के अंत से मई तक चली कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर और पंचायत चुनाव की व्यस्तता को वजह बता रहे हैं।
25 जुलाई को पार्टी की बैठक में क्षेत्रीय अध्यक्षों से मंत्रियों के प्रवास की जानकारी भी मंगाई गई थी। उसमें भी औपचारिकता ही सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक नड्डा इस बार मंत्रियों से बातचीत में फीडबैक की जगह उनके रिपोर्ट कार्ड और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर ही बात करेंगे।
गांव में रात्रि प्रवास की भी महज औपचारिकता
राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष ने भाजपा के प्रदेश व क्षेत्रीय पदाधिकारियों को महीने में एक दिन और एक रात गांवों में गुजारने की जिम्मेदारी सौंपी थी। संगठन को फीडबैक मिला है कि कुछ प्रदेश पदाधिकारियों को छोड़कर ज्यादातर प्रदेश व क्षेत्रों के पदाधिकारियों ने गांव में प्रवास नहीं किया है और न ही रात गुजारी।
पांच ‘ज’ पर कितने आगे बढ़े
बीएल संतोष ने 21 जनवरी को संगठनात्मक बैठक में प्रदेश महामंत्रियों को जन समर्थन, जन संगठन, जन प्रशिक्षण, जन संस्कार और जन कल्याण के मंत्र के तहत संगठन की कार्य योजना बनाने को कहा था। सूत्रों के मुताबिक जन समर्थन और जन संगठन की दिशा में तो काम हुआ है, लेकिन शेष तीन ‘ज’ ने अभी रफ्तार नहीं पकड़ी है।