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Border Disputes: ड्रोन से होगा भारत-नेपाल सीमा का संयुक्त सर्वे, तीन साल में करेंगे नदी वाले हिस्सों की मैपिंग
Mon, 17 Aug 2026 03:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा
घनश्याम सिंह, लखनऊ
घनश्याम सिंह, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 17 Aug 2026 03:40 AM IST
सार
लखनऊ में 14 अगस्त को हुई सर्वे अधिकारियों की समिति (एसओसी) की 13वीं बैठक में सीमा के नदी वाले हिस्सों का ड्रोन के जरिये संयुक्त सर्वेक्षण करने पर सहमति बनी।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े तकनीकी विवादों के समाधान के लिए दोनों देशों ने आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। लखनऊ में 14 अगस्त को हुई सर्वे अधिकारियों की समिति (एसओसी) की 13वीं बैठक में सीमा के नदी वाले हिस्सों का ड्रोन के जरिये संयुक्त सर्वेक्षण करने पर सहमति बनी।
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इसके तहत ऐसे क्षेत्रों की मैपिंग तीन वर्ष में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जहां नदियों के मार्ग में बदलाव के कारण सीमा निर्धारण को लेकर स्थिति जटिल हुई है। सर्वे ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैठक में भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय सीमा निदेशालय की निदेशक बिन्दु मघट शामिल हुईं।
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बैठक में दोनों देशों के सर्वे अधिकारियों ने यूएवी आधारित सीमा सर्वेक्षण की कार्ययोजना पर चर्चा की और इसे आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। सर्वेक्षण के जरिये सीमा क्षेत्र की मौजूदा भौगोलिक स्थिति का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे पुराने नक्शों और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को समझने में भी मदद मिलेगी।
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नदी की धारा बदलने वाले क्षेत्रों पर जोर
भारत-नेपाल सीमा के कई हिस्सों में नदियां प्राकृतिक रूप से अपना रास्ता बदलती रही हैं। इससे कुछ स्थानों पर सीमा की स्थिति को लेकर व्यावहारिक और तकनीकी जटिलताएं पैदा होती हैं। प्रस्तावित ड्रोन सर्वेक्षण में ऐसे नदी खंडों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सर्वे से मौजूदा नदी मार्ग, सीमा चिह्नों और आसपास के भू-भाग की उच्च सटीकता वाली जानकारी जुटाई जाएगी। दोनों देशों के बीच तैयार होने वाला साझा तकनीकी आधार सीमा से संबंधित सूचनाओं के मिलान में उपयोगी होगा। इससे सीमा स्तंभों की स्थिति, पुराने मानचित्रों में तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकेगा।