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यूपी कैबिनेट : बजाज हिंदुस्तान की चीनी मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 1000 करोड़ देगा ऊर्जा विभाग

Sat, 08 Jan 2022 12:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 08 Jan 2022 12:18 AM IST
सार

यह धनराशि 500-500 करोड़ रुपये की दो किस्तों में दी जाएगी। पावर कार्पोरेशन द्वारा बजाज हिंदुस्तान की ललितपुर तापीय परियोजना से खरीदी गई बिजली के बकाये के एवज में यह धनराशि जारी करने का फैसला किया गया है। शुक्रवार को कैबिनेट में बाई सर्कुलेशन इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

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It was decided in the UP cabinet that the Energy Department will give 1000 crores for the payment of cane price due to sugar mill.
UP Cabinet

विस्तार

बजाज हिंदुस्तान की चीनी मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए ऊर्जा विभाग 1000 करोड़ रुपये देगा। यह धनराशि 500-500 करोड़ रुपये की दो किस्तों में दी जाएगी। पावर कार्पोरेशन द्वारा बजाज हिंदुस्तान की ललितपुर तापीय परियोजना से खरीदी गई बिजली के बकाये के एवज में यह धनराशि जारी करने का फैसला किया गया है। शुक्रवार को कैबिनेट में बाई सर्कुलेशन इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

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पावर कार्पोरेशन पर बजाज हिंदुस्तान समूह का 2361.20 करोड़ रुपये बकाया है। पावर कार्पोरेशन से बिजली खरीद का बकाया भुगतान न होने की दुहाई देते हुए बजाज हिंदुस्तान ने अपनी चीनी मिलों में किसानों से खरीदे गए गन्ने का भुगतान रोक रखा है। हाल ही में सरकार ने उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति तथा खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 में संशोधन करकेयह प्रावधान कर दिया है कि अगर कोई कंपनी गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं करती है इसकी वसूली उसकी सहायक कंपनियों से की जा सकती है। 
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बजाज की चीनी मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए सरकार ने उसकी ललितपुर परियोजना से वसूली का रास्ता निकाला है। कै बिनेट सर्कुलेशन किए गए निर्णय के अनुसार बजाज हिंदुस्तान के 2361.20 करोड़ रुपये बकाये के एवज में ऊर्जा विभाग गन्ना मूल्य भुगतान के लिए दो किस्तों में 500-500 करोड़ रुपये जारी करेगा। इसके बाद ऊर्जा विभाग पर बजाज का 1361.20 करोड़ रुपये बकाया शेष रह जाएगा।

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सिंचाई विभाग में भी कोषागार से होगा भुगतान

प्रदेश सरकार ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में 40 वर्ष पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर कोषागार से ऑनलाइन भुगतान करने का फैसला किया है। कैबिनेट बाई सर्कुलेशन से इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह व्यवस्था एक अप्रैल, 2022 से लागू होगी। 

शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिंचाई, लोक निर्माण, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग में एक अप्रैल, 1974 से  साख प्रणाली (कैश क्रेडिट लिमिट-सीसीएल) लागू है। शासन ने तीन मार्च, 1997 को सिंचाई विभाग के अधिष्ठान मदों के खर्च को सीसीएल प्रणाली से बाहर कर दिया, लेकिन कार्य मदों को इसी में बनाए रखा। 

इसको लेकर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने सीसीएल में खामियों का हवाला देकर अन्य विभागों की तरह ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव किया था। बताया गया कि कोषागार प्रणाली के दायरे में न होने से वित्तीय अनियमितताओं की संभावना रहती है।  कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। अब आहरण वितरण अधिकारी द्वारा ऑनलाइन बिल जनरेट कर कोषागारों को पारित करने के लिए भेजे जाएंगे।

एटीएफ पर वैट घटा, अब मात्र1 प्रतिशत लगेगा वैट

प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एयरलाइन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन ‘एयरलाइन टरबाइन फ्यूल’ (एटीएफ) पर लगने वाले 21 प्रतिशत वैट को घटाकर मात्र 1 प्रतिशत करने का फैसला किया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लोगों को जहां सस्ती एयर सेवा का लाभ मिलेगा, वहीं पर्यटन को भी बढावा मिलेगा।

विभाग के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि मौजूदा समय में वाराणसी और आगरा को विशेष श्रेणी में रखते हुए यहां के एयरपोर्ट पर एटीएफ पर 4 प्रतिशत वैट वसूलने की व्यवस्था लागू की गई थी। जबकि प्रदेश की राजधानी के एयरपोर्ट पर एटीएफ पर 21 प्रतिशत वैट वसूला जा रहा था। इसमें एकरूपता लाने के लिए सरकार ने अब सभी एयरपोर्ट पर एटीएफ पर वैट दर को घटाकर एक प्रतिशत कर दिया है। 

जबकि रिजनल कनेक्टिविटी वाले एयरपोर्ट पर एटीएफ पहले की तरह ही एटीएफ वैट मुक्त रहेगा। दरअसल प्रदेश में कई नए एयरपोर्ट खुल चुके हैं और कई शहरों में जल्द ही एयरपोर्ट का संचालन शुरू होने वाला है। लिहाजा प्रदेश में एयरलाइंस की संख्या में भी वृद्धि होगी। इसके मद्देनजर सरकार ने एयर सेवा को प्रोत्साहित करने के लिए यह फैसला किया है। माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से प्रदेश में पहले अधिक एयर लाइंस सेवा का संचालन बढ़ेगा। जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार तो बढ़ेगा ही, साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

निजी विवि के दर्जे से मुक्त होगा शिवनाडर विश्वविद्यालय
शिवनाडर विश्वविद्यालय नोएडा को निजी विविद्यालय के दर्जे से मुक्त किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने उप्र. निजी विवि अधिनियम-2019 में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी है। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि शिवनाडर विवि को यूजीसी ने श्रेष्ठ संस्थान का दर्जा दिया है। विवि ने निजी विश्वविद्यालय का दर्जा वापस लेने का आवेदन किया था। इससे उच्च शिक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और गुणात्मक शिक्षा में वृद्धि होगी।

लखनऊ की तीन माइनर निष्प्रयोज्य घोषित, पाटकर बनेगी सड़क
प्रदेश सरकार ने लखनऊ तीन माइनरों को निष्प्रयोज्य घोषित करते हुए उसे पाटकर सड़क बनाने का फैसला किया है। लोक निर्माण विभाग के इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। प्रस्ताव के मुताबिक चिनहट रजवाहा के 10. 760 किमी. से 12.900 किमी. तक. नौबस्ता माइनर के 0.000 किमी. से 3.060 किमी. तक और बस्तौली माइनर के 0.000 किमी. से 0.550 किमी. तक के भाग को लोनिवि द्वारा सड़क बनाने के लिए मांग की गई थी। जिसे मंजूरी दे दी गई है।

 

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