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कोरोना संकट के बीच आईटी कंपनियों में बढ़े रोजगार के अवसर, पैकेज में भी सुधार
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कोरोना संकट के बीच आईटी सेक्टर ने संभाला रोजगार को। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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अक्षय कुमार
कोरोना संकट के चलते जहां रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। पर कुछ सेक्टर ऐसे हैं, जिनमें सुधार होना शुरू हो गया है। खासतौर से आईटी और कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में नई भर्तियां तेजी से हो रही हैं।
पिछले सालों के मुकाबले इस वर्ष प्लेसमेंट में 70 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। इसका एक बड़ा कारण है तेजी से आईटी कंपनियों का खुलना और वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन पठन-पाठन व ऑनलाइन बाजार में डिमांड बढ़ने से काम में लगातार वृद्धि होना।
इसके चलते युवाओं को अच्छा पैकेज तो मिल ही रहा है, साथ ही इसमें सुधार भी हो रहा है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के प्लेसमेंट सेल के अनुसार वर्ष 2018-19 में जहां सीएस-आईटी के 1194 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ।
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वहीं, 2019-20 में 1122 और 2020-21 में काफी वृद्धि के साथ बढ़कर 1937 हो गई। जबकि विद्यार्थियों को क्रमश: 3.46 लाख प्रतिवर्ष, 3.65 लाख प्रतिवर्ष व 3.70 लाख प्रतिवर्ष का पैकेज मिला। माना जा रहा है कि स्थितियां सामान्य होने के साथ ही पैकेज में और सुधार होगा।
यही नहीं, एकेटीयू के हर साल होने वाले प्लेसमेंट के आंकड़ों में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2018-19 में यहां के 1946 विद्यार्थियों को जॉब मिली, वहीं 2019-20 में यह बढ़कर 2610 व 2020-21 में 2900 पहुंच गई है।
इसका भी एक बड़ा कारण आईटी व कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में विद्यार्थियों की मांग बढ़ना है। इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग के कारण ही एआईसीटीई के निर्देश पर विवि प्रशासन ने नए सत्र 2021-22 में सिर्फ इमर्जिंग एरिया में ही कॉलेजों को नई ब्रांच दी हैं।
ताकि विद्यार्थियों को आज की जरूरत के हिसाब से तैयार किया जा सके और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
प्लेसमेंट की प्रमुख कंपनियां
एचसीएल टेक्नोलॉजी, टीसीएस, कोर्फोग, इंडिया मार्ट, इंडिया मेस, डीएक्सवाई टेक्नोलॉजी, एवीएल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नैग्रो, टेक महिंद्रा।
लविवि : कोविड में कंपनियां भी कम हुई, अवसर भी
लखनऊ विश्वविद्यालय के कैंपस प्लेसमेंट को कोरोना में झटका लगा है। पिछले दो साल में न सिर्फ प्लेसमेंट कम हुए बल्कि कंपनियों की संख्या भी घट गई है। पिछले साल रोजगार मेले की कवायद भी कोरोना के चलते पूरी नहीं हुई। इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को छोड़कर अन्य स्टूडेंट्स को कहीं कोई खास अवसर नहीं मिले।
प्लेसमेंट सेल के निदेशक डॉ. संजय मेधावी के अनुसार, मैनेजमेंट में जहां हर साल 40-45 कंपनियां आती थीं, घटकर अब 25 हो गई हैं। इस बार कंपनियों ने समर इंटर्नशिप नहीं करवाई, जबकि पूर्व में इससे भी जॉब के लिए चयन होता था। एमबीए में जहां 2019-20 में 62 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ वहीं 2020-21 में 45 का ही। आईएमएस में जहां 2019-20 में 85 प्लेसमेंट हुए वहीं 2020-21 में महज 20 सेलेक्शन हुए। इंजीनियरिंग में 2020-21 में 230 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ। 2021-22 में अभी 05 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। वहीं अन्य विधा के विद्यार्थियों को कोई खास अवसर नहीं मिल सका है। ओवरऑल जहां वर्ष 2018-19 में 720 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ वहीं 2019-20 में यह घटकर 280 हो गया। जबकि 2020-21 में 295 विद्यार्थियों का सेलेक्शन हुआ।
बीबीएयू : सामान्य प्लेसमेंट में आई गिरावट
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के प्लेसमेंट पर भी कोविड ने काफी प्रभाव डाला है। प्लेसमेंट सेल के समन्वयक प्रो. एमएस खान ने बताया कि वर्ष 2019-20 में जहां 72 विद्यार्थियों के प्लेसमेंट हुए वहीं 2020-21 में महज 16 का चयन हुआ। प्लेसमेंट के लिए आने वाली कंपनियां तो बढ़ी, लेकिन उन्होंने काफी कम विद्यार्थियों का चयन किया। हालांकि 2021-22 की शुरुआत अच्छी हुई है। अब तक 27 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ है। उन्होंने कहा कि कंपनियों के पैकेज में बहुत अंतर नहीं आया है।
कोरोना काल में आईटी सर्विसेज, कंप्यूटर सेक्शन आदि क्षेत्रों में काम करने वालों की मांग बढ़ी है। वर्क फ्रॉम होम पहले कुछ कंपनियां देती थी, आज यह जरूरत बन गई है। वे ऑफिस सेटअप के लिए भी पैसा दे रही हैं। कंपनियों के पास वैकल्पिक व्यवस्था बढ़ी है। ऑनलाइन पढ़ाई भी बढ़ी है। जिसकी वजह से इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इसका असर प्लेसमेंट पर भी दिख रहा है।
- प्रो. विनीत कंसल, कुलपति, एकेटीयू
कोविड काल में ऑनलाइन काम करने वाली कंपनियों, डेटा एनालिसिस आदि से जुड़े क्षेत्र में जॉब के अवसर बढ़े हैं। विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में पैकेज भी बेहतर मिल रहे हैं। यही वजह है कि बीटेक में कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस व डेटा साइंस ब्रांच में प्रवेश के लिए सामान्य ब्रांचों की अपेक्षा प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है।
- प्रो. आरएस गुप्ता, निदेशक इंजीनियरिंग संकाय, लविवि
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कोरोना संकट के चलते जहां रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। पर कुछ सेक्टर ऐसे हैं, जिनमें सुधार होना शुरू हो गया है। खासतौर से आईटी और कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में नई भर्तियां तेजी से हो रही हैं।
पिछले सालों के मुकाबले इस वर्ष प्लेसमेंट में 70 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। इसका एक बड़ा कारण है तेजी से आईटी कंपनियों का खुलना और वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन पठन-पाठन व ऑनलाइन बाजार में डिमांड बढ़ने से काम में लगातार वृद्धि होना।
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इसके चलते युवाओं को अच्छा पैकेज तो मिल ही रहा है, साथ ही इसमें सुधार भी हो रहा है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के प्लेसमेंट सेल के अनुसार वर्ष 2018-19 में जहां सीएस-आईटी के 1194 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ।
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वहीं, 2019-20 में 1122 और 2020-21 में काफी वृद्धि के साथ बढ़कर 1937 हो गई। जबकि विद्यार्थियों को क्रमश: 3.46 लाख प्रतिवर्ष, 3.65 लाख प्रतिवर्ष व 3.70 लाख प्रतिवर्ष का पैकेज मिला। माना जा रहा है कि स्थितियां सामान्य होने के साथ ही पैकेज में और सुधार होगा।
यही नहीं, एकेटीयू के हर साल होने वाले प्लेसमेंट के आंकड़ों में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2018-19 में यहां के 1946 विद्यार्थियों को जॉब मिली, वहीं 2019-20 में यह बढ़कर 2610 व 2020-21 में 2900 पहुंच गई है।
इसका भी एक बड़ा कारण आईटी व कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में विद्यार्थियों की मांग बढ़ना है। इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग के कारण ही एआईसीटीई के निर्देश पर विवि प्रशासन ने नए सत्र 2021-22 में सिर्फ इमर्जिंग एरिया में ही कॉलेजों को नई ब्रांच दी हैं।
ताकि विद्यार्थियों को आज की जरूरत के हिसाब से तैयार किया जा सके और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
प्लेसमेंट की प्रमुख कंपनियां
एचसीएल टेक्नोलॉजी, टीसीएस, कोर्फोग, इंडिया मार्ट, इंडिया मेस, डीएक्सवाई टेक्नोलॉजी, एवीएल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नैग्रो, टेक महिंद्रा।
लविवि : कोविड में कंपनियां भी कम हुई, अवसर भी
लखनऊ विश्वविद्यालय के कैंपस प्लेसमेंट को कोरोना में झटका लगा है। पिछले दो साल में न सिर्फ प्लेसमेंट कम हुए बल्कि कंपनियों की संख्या भी घट गई है। पिछले साल रोजगार मेले की कवायद भी कोरोना के चलते पूरी नहीं हुई। इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को छोड़कर अन्य स्टूडेंट्स को कहीं कोई खास अवसर नहीं मिले।
प्लेसमेंट सेल के निदेशक डॉ. संजय मेधावी के अनुसार, मैनेजमेंट में जहां हर साल 40-45 कंपनियां आती थीं, घटकर अब 25 हो गई हैं। इस बार कंपनियों ने समर इंटर्नशिप नहीं करवाई, जबकि पूर्व में इससे भी जॉब के लिए चयन होता था। एमबीए में जहां 2019-20 में 62 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ वहीं 2020-21 में 45 का ही। आईएमएस में जहां 2019-20 में 85 प्लेसमेंट हुए वहीं 2020-21 में महज 20 सेलेक्शन हुए। इंजीनियरिंग में 2020-21 में 230 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ। 2021-22 में अभी 05 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। वहीं अन्य विधा के विद्यार्थियों को कोई खास अवसर नहीं मिल सका है। ओवरऑल जहां वर्ष 2018-19 में 720 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ वहीं 2019-20 में यह घटकर 280 हो गया। जबकि 2020-21 में 295 विद्यार्थियों का सेलेक्शन हुआ।
बीबीएयू : सामान्य प्लेसमेंट में आई गिरावट
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के प्लेसमेंट पर भी कोविड ने काफी प्रभाव डाला है। प्लेसमेंट सेल के समन्वयक प्रो. एमएस खान ने बताया कि वर्ष 2019-20 में जहां 72 विद्यार्थियों के प्लेसमेंट हुए वहीं 2020-21 में महज 16 का चयन हुआ। प्लेसमेंट के लिए आने वाली कंपनियां तो बढ़ी, लेकिन उन्होंने काफी कम विद्यार्थियों का चयन किया। हालांकि 2021-22 की शुरुआत अच्छी हुई है। अब तक 27 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ है। उन्होंने कहा कि कंपनियों के पैकेज में बहुत अंतर नहीं आया है।
कोरोना काल में आईटी सर्विसेज, कंप्यूटर सेक्शन आदि क्षेत्रों में काम करने वालों की मांग बढ़ी है। वर्क फ्रॉम होम पहले कुछ कंपनियां देती थी, आज यह जरूरत बन गई है। वे ऑफिस सेटअप के लिए भी पैसा दे रही हैं। कंपनियों के पास वैकल्पिक व्यवस्था बढ़ी है। ऑनलाइन पढ़ाई भी बढ़ी है। जिसकी वजह से इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इसका असर प्लेसमेंट पर भी दिख रहा है।
- प्रो. विनीत कंसल, कुलपति, एकेटीयू
कोविड काल में ऑनलाइन काम करने वाली कंपनियों, डेटा एनालिसिस आदि से जुड़े क्षेत्र में जॉब के अवसर बढ़े हैं। विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में पैकेज भी बेहतर मिल रहे हैं। यही वजह है कि बीटेक में कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस व डेटा साइंस ब्रांच में प्रवेश के लिए सामान्य ब्रांचों की अपेक्षा प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है।
- प्रो. आरएस गुप्ता, निदेशक इंजीनियरिंग संकाय, लविवि