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Lucknow News: मुनव्वर को भुला पाना बहुत मुश्किल है...
Tue, 16 Jan 2024 02:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 16 Jan 2024 02:12 AM IST
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रायबरेली। भुला पाना बहुत मुश्किल है, सब कुछ याद रहता है, मोहब्बत करने वाला इसलिए बरबाद रहता है... यह पंक्तियां बताती हैं कि मुनव्वर राना को भुला पाना मुश्किल है। वह अपनी शायरी और व्यवहार के चलते हमेशा याद किए जाएंगे। उनसे मोहब्बत करने वालों की कमी नहीं है।
इसी जिले में जन्मे मुनव्वर राना की जिंदगी भले ही ज्यादातर बाहर गुजरी, लेकिन यहां से लगाव कम नहीं हुआ। वह जब भी यहां आते, महफिल सजती। उनके किला बाजार स्थित पुश्तैनी मकान के आसपास सोमवार को सन्नाटा छाया रहा। जो लोग आए, वे सूनापन देखकर लौट गए।
मशहूर शायर मुनव्वर राना किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। रविवार देर रात उनका लखनऊ में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर रात में ही पूरे जिले में फैल गई। हर कोई दुखी हो गया। परिवार के लोग भी रात में ही लखनऊ चले गए।
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सुबह लोग पुश्तैनी घर पहुंचे, लेकिन सन्नाटा देख लौट गए। किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई, मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई... मां पर इस तरह की कई रचनाएं लिखने वाले मुनव्वर राना को उनकी शायरियों के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा।
शहर के किला बाजार में 1952 में जन्मे मुनव्वर राना की जिंदगी ज्यादातर कोलकाता और लखनऊ में गुजरी। पढ़ाई-लिखाई भी कोलकाता में हुई। साहित्य अकादमी पुरस्कार समेत ढेरों सम्मान मिले।
किला बाजार निवासी मो. इलियास ने बताया कि रात में मुनव्वर राना के निधन की खबर मिलते ही हर कोई दुखी हो गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद मोहल्ले के काफी लोग अपने घरों से बाहर आए। जो भी परिवारीजन यहां पर थे, वे रात में या फिर सुबह लखनऊ चले गए।
मुनव्वर राना छह भाई थे। दो भाइयों यहया राना और शकील राना का पहले ही निधन हो चुका था। अब मुनव्वर राना हमारे बीच नहीं रहे। वर्तमान में तीन भाई इस्माइल राना, राफे राना और जमील राना हैं। राना परिवार के करीबी और किला बाजार निवासी अली हैदर बताते हैं कि मुनव्वर राना ने जिंदगी का ज्यादातर वक्त कोलकाता में गुजारा।
लगभग दो दशक से लखनऊ में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। रायबरेली अक्सर आते रहते थे, लेकिन बीमारी के कारण एक साल से नहीं आए। मुनव्वर के बच्चे जरूर पुश्तैनी घर किला बाजार आते रहे हैं।
साहित्य जगत में जिले का रोशन कर गए नाम
रायबरेली। समाजवादी पार्टी ने सोमवार को शोकसभा आयोजित कर मशहूर शायर मुनव्वर राना के निधन पर दुख प्रकट करते हुए उनके व्यक्तित्व पर चर्चा की। मौन धारण कर शोक प्रस्ताव किया गया। जिलाध्यक्ष इं. वीरेंद्र यादव ने कहा कि मुनव्वर राना साहित्य जगत में जिले का नाम रोशन कर गए। वह बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे। उन्होंने उर्दू साहित्य के साथ अवधी एवं हिंदी शब्दों का प्रयोग प्रमुखता से किया।
जिला उपाध्यक्ष हसीन अहमद ने कहा कि मुनव्वर राना ने सदैव इंसानियत का पैगाम दिया। ऊंच-नीच के भेदभाव से दूर रहने की नसीहत दी। अल्पसंख्यक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आफताब अहमद ने काव्य पंक्तियों के जरिए श्रद्धांजलि दी। ओपी यादव ने कहा कि मुनव्वर राना देश-दुनिया में युगों-युगों तक याद रहेंगे।
मोहसिन, डीपी पाल, अरुण यादव, राजेश मौर्य, मुनेश्वर पासी, पूनम मौर्या, कल्लू चौधरी, अरशद खान, विनायक कृष्ण सोनकर, ललित यादव, आलोक यादव, संदीप शुक्ला, मिश्रीलाल चौधरी, दिनेश यादव, सुरेश पटेल, मो. फहीम, आशुतोष यादव, सुरेश निर्मल, केके मौर्या ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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इसी जिले में जन्मे मुनव्वर राना की जिंदगी भले ही ज्यादातर बाहर गुजरी, लेकिन यहां से लगाव कम नहीं हुआ। वह जब भी यहां आते, महफिल सजती। उनके किला बाजार स्थित पुश्तैनी मकान के आसपास सोमवार को सन्नाटा छाया रहा। जो लोग आए, वे सूनापन देखकर लौट गए।
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मशहूर शायर मुनव्वर राना किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। रविवार देर रात उनका लखनऊ में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर रात में ही पूरे जिले में फैल गई। हर कोई दुखी हो गया। परिवार के लोग भी रात में ही लखनऊ चले गए।
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सुबह लोग पुश्तैनी घर पहुंचे, लेकिन सन्नाटा देख लौट गए। किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई, मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई... मां पर इस तरह की कई रचनाएं लिखने वाले मुनव्वर राना को उनकी शायरियों के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा।
शहर के किला बाजार में 1952 में जन्मे मुनव्वर राना की जिंदगी ज्यादातर कोलकाता और लखनऊ में गुजरी। पढ़ाई-लिखाई भी कोलकाता में हुई। साहित्य अकादमी पुरस्कार समेत ढेरों सम्मान मिले।
किला बाजार निवासी मो. इलियास ने बताया कि रात में मुनव्वर राना के निधन की खबर मिलते ही हर कोई दुखी हो गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद मोहल्ले के काफी लोग अपने घरों से बाहर आए। जो भी परिवारीजन यहां पर थे, वे रात में या फिर सुबह लखनऊ चले गए।
मुनव्वर राना छह भाई थे। दो भाइयों यहया राना और शकील राना का पहले ही निधन हो चुका था। अब मुनव्वर राना हमारे बीच नहीं रहे। वर्तमान में तीन भाई इस्माइल राना, राफे राना और जमील राना हैं। राना परिवार के करीबी और किला बाजार निवासी अली हैदर बताते हैं कि मुनव्वर राना ने जिंदगी का ज्यादातर वक्त कोलकाता में गुजारा।
लगभग दो दशक से लखनऊ में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। रायबरेली अक्सर आते रहते थे, लेकिन बीमारी के कारण एक साल से नहीं आए। मुनव्वर के बच्चे जरूर पुश्तैनी घर किला बाजार आते रहे हैं।
साहित्य जगत में जिले का रोशन कर गए नाम
रायबरेली। समाजवादी पार्टी ने सोमवार को शोकसभा आयोजित कर मशहूर शायर मुनव्वर राना के निधन पर दुख प्रकट करते हुए उनके व्यक्तित्व पर चर्चा की। मौन धारण कर शोक प्रस्ताव किया गया। जिलाध्यक्ष इं. वीरेंद्र यादव ने कहा कि मुनव्वर राना साहित्य जगत में जिले का नाम रोशन कर गए। वह बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे। उन्होंने उर्दू साहित्य के साथ अवधी एवं हिंदी शब्दों का प्रयोग प्रमुखता से किया।
जिला उपाध्यक्ष हसीन अहमद ने कहा कि मुनव्वर राना ने सदैव इंसानियत का पैगाम दिया। ऊंच-नीच के भेदभाव से दूर रहने की नसीहत दी। अल्पसंख्यक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आफताब अहमद ने काव्य पंक्तियों के जरिए श्रद्धांजलि दी। ओपी यादव ने कहा कि मुनव्वर राना देश-दुनिया में युगों-युगों तक याद रहेंगे।
मोहसिन, डीपी पाल, अरुण यादव, राजेश मौर्य, मुनेश्वर पासी, पूनम मौर्या, कल्लू चौधरी, अरशद खान, विनायक कृष्ण सोनकर, ललित यादव, आलोक यादव, संदीप शुक्ला, मिश्रीलाल चौधरी, दिनेश यादव, सुरेश पटेल, मो. फहीम, आशुतोष यादव, सुरेश निर्मल, केके मौर्या ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।