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यूपी सरकार की कमेटी की सिफारिश- जुलाई में स्कूल खोलना ठीक नहीं पर शिक्षकों को आना होगा

Tue, 23 Jun 2020 12:49 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 23 Jun 2020 12:49 PM IST
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It is not appropriate to open schools in July, committee recommended to continue digital teaching
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
कोरोना संकट के दौर में प्रदेश में स्कूलों को खोलकर वहां पठन-पाठन कराने की जगह डिजिटल टीचिंग ही कराना ही उचित रहेगा। देश व प्रदेश में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मद्देनजर जुलाई में स्कूल खोलना उचित नहीं होगा। स्कूलों को खोलने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की है।
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कमेटी की रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चर्चा के बाद लिया जाएगा। प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालयों की ओर से स्कूलों को खोलने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इन विद्यालयों के प्रबंधन का मानना है कि स्कूल खुलने पर ही अभिभावक फीस जमा कराना शुरू करेंगे।
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उससे ही स्कूल के खर्च के साथ शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन भी मिल सकेगा। वित्तविहीन विद्यालयों की मांग के मद्देनजर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विशेष सचिव आर्यका अखौरी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। कमेटी को स्कूलों को खोलने के लिए मिले विभिन्न प्रस्तावों पर अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी।  
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...पर शिक्षकों के लिए एक जुलाई से खुल जाएंगे स्कूल

सूत्रों के मुताबिक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शासन में प्रस्तुत कर दी है। इसमें जुलाई में स्कूल खोलने की जगह डिजिटल टीचिंग को ही अधिक प्रभावी तरीके के जारी रखने की सिफारिश की गई है। डिजिटल टीचिंग के जरिए बच्चे घर बैठे अपना पाठ्यक्रम पूरा कर सकेंगे और संक्रमण फैलने का खतरा भी नहीं होगा। कमेटी ने स्कूलों को खोलने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की नई गाइडलाइन का इंतजार करने की सिफारिश भी की है। कमेटी ने विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला के समक्ष प्रजेंटेशन दिया। 

प्रदेश के सभी परिषदीय स्कूलों में 1 जुलाई से सभी शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को उपस्थित होना होगा। बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम सिंह ने सोमवार को इसका आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को स्कूलों में उपस्थित होकर मिड डे मील का राशन और कुकिंग लागत अभिभावकों के खाते में जमा करानी होगी।

बच्चों को निशुल्क स्कूल यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तक वितरित करनी होगी। शारदा कार्यक्रम के तहत आउट ऑफ स्कूलों बच्चों को चिह्नित कर स्कूल से जोड़ने और समर्थ कार्यक्रम के तहत दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल करना होगा। मानव संपदा पोर्टल ओर दीक्षा एप से जुड़े कार्य भी करने होंगे।।   

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