काली कमाई 10 लाख से ज्यादा तो आयकर जांच
पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान आयकर निर्धारण में अगर विभाग ने किसी करदाता की दस लाख की काली कमाई पकड़ी है तो चालू वित्तीय वर्ष में भी इसकी आयकर की जांच होगी।
दरअसल, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में मैनुअली आयकर स्क्रूटनी के लिए गाइडलाइंस जारी कर दिए हैं। इसमें ऐसे मामलों को भी शामिल किया गया है। नए गाइडलाइंस में ट्रांसफर प्राइसिंग के जरिये दस करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी करने वाले प्रकरणों को भी शामिल किया गया है।
बता दें स्क्रूटिनी की प्रक्रिया में लाए जाने वाले मामलों में आयकर अधिकारी गहराई से छानबीन करते हैं। पूरे एक साल में करदाता की सभी प्रकार के खाता-बही, व्यवसाय से संबंधित तमाम दस्तावेज, खर्चे समेत अन्य अकाउंट को बारीकी से जांचते हैं। इसमें अनियमितताएं मिलने पर जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाती है।
नए गाइडलाइंस के मुताबिक बोर्ड ने इस बार ऐसे मामलों की स्क्रूटनी के लिए कहा है, जिनमें बीते वर्ष हुए कर निर्धारण में आय से दस लाख ज्यादा की पाई गई है। इसी प्रकार बीते साल हुए सर्वेक्षण और छापे की कार्रवाइयों के साथ ही ऐसे शैक्षिक संस्थानों को भी स्क्रूटनी में लाया गया है, जिनकी ग्रांट आयकर आयुक्त की ओर से खारिज की गई है।
ऐसे होती है ट्रांसफर प्राइसिंग
मान लीजिए किसी कंपनी ने यहां 100 रुपये का कोई उत्पाद बनाया और उसे अमेरिका में किसी अन्य कंपनी को 120 रुपये में बेच दिया। इस तरह उसने 20 रुपये कमाई, जिस पर वह भारत में आयकर अधिनियम के तहत निर्धारित कर देगा।
मगर कुछ लोग ज्यादा कमाई के लालच में खेल करते हैं। वे संबंधित देश में अपनी ही एक कंपनी खोल लेते हैं। इसके बाद 100 रुपये के उत्पाद को खुद की दूसरी कंपनी में 100 रुपये या उससे कम कीमत में बेचना दिखाते हैं।
इस प्रकार उस उत्पाद पर लाभ शून्य या फिर घाटा दिखाकर आयकर देने से बचते हैं। इसके बाद अपनी जिस कंपनी को माल बेचा जाता है, उससे उसी देश में माल की बिक्री करके मोटा मुनाफा कमाते हैं। इस तरह विदेशी कंपनी को मोटी कमाई होती है, जो उस देश के आयकर कानूनों के तहत टैक्स देती है। यह खेल मारीशस, खाड़ी देशों यूएई आदि में खूब होता है।
मामले पर आयकर सलाहकार सीए विवेक खन्ना का कहना है कि नए गाइडलाइंस में कमाई छुपाने या टैक्स चोरी करने वालों पर शिकंजा कसा गया है। इससे कर चोरों की मुसीबत और बढ़ेगी।