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रिश्तों में अलगाव मानसिक स्वास्थ्य कर रहा खराब : डॉ. प्रभात

Sun, 29 Mar 2026 01:52 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2026 01:52 AM IST
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Isolation in relationships is harming mental health: Dr. Prabhat
पु​स्तिका का विमोचन करते ​विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, डॉ. प्रभात सिठोले व अन्य चिकित्सक।
लखनऊ।
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आज के दौर में लोगों में आपसी समन्वय नहीं बचा है। रिश्तों में टकराव और अलगाव के कारण लोगों का मानसिक स्वास्थ्य खराब हो रहा है। हालात ये है कि इसी वजह से लोग आत्महत्या करने के लिए भी मजबूर हो रहे हैं। रिश्तों की मिठास ऐसी होनी चाहिए कि एक मुस्कुराहट में सारे गिले-सिकवे खत्म हो जाएं। इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति और भयानक होगी।

ये बातें केजीएमयू मानसिक स्वास्थ्य विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रभात सिठोले ने कही। डॉ. सिठोले शनिवार को रीवर बैंक कॉलोनी स्थित आईएमए भवन में मानसिक स्वास्थ्य, रिश्तों में टकराव और युवा विषय पर कार्यशाला में बोल रहे थे। डॉ. सिठोले ने कहा कि चार प्रतिशत युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है। यही नहीं 10 से 19 वर्ष की उम्र के युवाओं में मानसिक समस्याओं का ग्राफ भी बढ़ा है। इस उम्र में सात में एक युवा किसी न किसी मानसिक विकार से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि अनसुलझे मनमुटाव, पारिवारिक अस्थिरता, सहपाठी दबाव और प्रेम संबंधों में विफलता युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर बना रही है। कार्यक्रम में केजीएमयू मानसिक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. विवेक अग्रवाल, दिनेश दुआ, डॉ. नेहाश्री श्रीवास्तव व डॉ. मधुरिमा प्रधान मौजूद रहे।
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युवाओं के व्यवहार पर पड़ रहा असर : डॉ. शशि



इस मौके पर डॉ. शशि राय ने कहा कि रिश्तों में तनाव का सीधा असर युवाओं के व्यवहार पर पड़ता है। कई मामलों में यही तनाव हिंसक प्रवृत्तियों और आत्मघाती विचारों में बदल जाता है। इसके साथ ही भूख में कमी, नींद की समस्या और पढ़ाई में गिरावट जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।
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रिश्तों का होना जरूरी- डॉ. राजेश्वर



सरोजनीनगर के विधायक राजेश्वर सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ रिश्ते बेहद जरूरी हैं। यदि टकराव को शुरुआती स्तर पर ही संवाद और परामर्श के जरिये सुलझा लिया जाए तो कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। स्कूल स्तर पर ही बच्चों और युवाओं को भावनात्मक संतुलन, तनाव प्रबंधन और रिश्तों को संभालने की शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में खुलकर बातचीत करने की जरूरत है। ताकि युवा बिना झिझक मदद ले सकें और स्वस्थ, संतुलित जीवन की ओर बढ़ सकें। इस मौके पर उन्होंने पत्रिका का विमोचन किया।
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