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बिना पद ही तैनाती देकर दे रहे थे मोटी सैलरी, आईसीडीएस विभाग में चल रहे खेल का हुआ खुलासा

Mon, 03 Jun 2019 04:13 PM IST
ishwar ashish सुधीर कुमार मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 03 Jun 2019 04:13 PM IST
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Irregularities of officers exposed in ICDS department
सांकेतिक तस्वीर

आंतरिक लेखा परीक्षा की विशेष जांच में दर्जनों लिपिकों को अनियमित तरीके से प्रमोशन देने के मामले में अभी कोई कार्रवाई भी नहीं हुई कि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) निदेशालय में बिना पद के ही अपर परियोजना प्रबंधक (एपीएम) के पद पर तैनाती दिए जाने का मामला सामने आया है।

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मुख्यालय में न पद है न सेवा नियमावली में ही एपीएम पद का कोई प्रावधान है। फिर भी जिला कार्यक्रम अधिकारियों (डीपीओ) को एपीएम का पदनाम देने के साथ ही उन्हें मोटी तनख्वाह व सुविधा देकर सरकारी खजाने का पैसा लुटाया जा रहा है।
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आईसीडीएस निदेशालय में निदेशक समेत कुल 39 पद ही स्वीकृत हैं। इनमें अपर परियोजना प्रबंधक नाम का कोई पद है ही नहीं। फिर भी पिछले 10 साल से अधिक समय से कई अधिकारियों को मुख्यालय पर अपर परियोजना प्रबंधक का पदनाम देकर तैनात किया गया है, जबकि उनका मूल पद जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) है।
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अलबत्ता मुख्यालय में उप निदेशक के 7 पद जरूर सृजित हैं, जिनमें सिर्फ एक पद ही भरा है। 6 पद खाली हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यालय स्तर पर परियोजनाओं का संचालन होता ही नहीं है तो मुख्यालय में अपर परियोजना प्रबंधक पद का औचित्य क्या है? 

निदेशक से जवाब तलब

हैरानी की बात यह है कि लंबे समय से आईसीडीएस मुख्यालय में प्रमोशन, नियुक्ति व पोषाहार वितरण से संबंधित मामलों में अनियमितता व घालमेल का खेल चल रहा है, लेकिन न तो किसी सरकार ने इसे रोकने की जहमत उठाई और न ही शासन में बैठे नौकरशाहों ने ही इस पर ध्यान दिया। कभी कोई मामला सामने आया तो उसे दबाने का ही प्रयास किया गया।

निदेशक से जवाब तलब
अब शासन स्तर से आईसीडीएस के निदेशक से इस मामले में जवाब तलब किया गया है। विभाग के विशेष सचिव गया प्रसाद ने पत्र भेजकर निदेशक से पूछा है कि मुख्यालय पर अपर परियोजना अधिकारी को किस नियम के तहत तैनात किया गया है और इनको जो कार्य सौंपे गए हैं, उसका प्रावधान सेवा नियमावली में है या नहीं? इनके वेतन आदि के भुगतान किस नियम के तहत किए जा रहे हैं?
 
इन अधिकारियों की एपीएम पद पर तैनाती

फिलहाल चार डीपीओ कल्पना पांडेय, सत्यवती सरोज, आरूति यादव व लिलि सिंह मुख्यालय में एपीएम के पद पर काम कर रही हैं। अल्का रानी भी एपीएम पद पर तैनात थीं लेकिन पिछले सप्ताह ही उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। उनको वीआरएस भी डीपीओ के पद से ही दी गई है।

दो बार हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है याचिका

अनियमित तरीके से एपीएम का पदनाम लेकर नौकरी करने वाली अधिकारी सरकार की मंजूरी नहीं मिलने पर एपीएम का पदनाम देने के लिए दो बार हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर चुकी हैं। दोनों बार हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी कि यह मामला सरकार का है, इसलिए वह अपनी मांग सरकार से ही करें। एपीएम पदनामधारी कल्पना पांडेय की ओर से दायर पहली याचिका 2007 में खारिज हो चुकी थी, जबकि दूसरी याचिका एक सप्ताह पहले ही खारिज हुई है।
 
मुख्यालय में ये 39 पद हैं स्वीकृत
निदेशक-1, अपर निदेशक (प्रशासन) या संयुक्त निदेशक (प्रशासन)-1,  अपर निदेशक (वित्त)-1, संयुक्त निदेशक (विधि)-1, उपनिदेशक-7, सहायक निदेशक-1, संपरीक्षा अधिकारी-1, वैयक्तिक सहायक-1, अधीक्षक ग्रेड-दो-1, वित्त एवं लेखाधिकारी-1, लेखाकार-2, सहायक लेखाकार-1, वरिष्ठ सहायक-4, वरिष्ठ सम्परीक्षक-1, संपरीक्षक-3, विधि सहायक-1, शोध अधिकारी-1 आशुलिपिक-2, आशुलिपिक कनिष्ठ-1 कंप्यूटर ऑपरेटर-3, चालक-4  
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