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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग: तबादले में उड़ीं मानकों की धज्जियां, कई दागी डीपीओ अब भी जमे

Wed, 21 Jul 2021 06:43 PM IST
ishwar ashish सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 21 Jul 2021 06:43 PM IST
सार

सरकारी नीति के मुताबिक कोई भी डीपीओ एक जिले में अधिकतम तीन साल से अधिक नहीं रह सकता है। इस साल के लिए जारी तबादला नीति में भी यही मानक रखा गया था। साथ ही यह भी प्रावधान है कि अधिकतम 20 प्रतिशत कर्मी का ही तबादला किया जा सकेगा।

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irregularities in transfer in bal vikas seva evm pushtahar.
transfer - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में पारदर्शी तरीके से तबादले के लिए तय मानकों की खुलकर धज्जियां उड़ी हैं। हाल में हुए कई जिला कार्यक्रम अधिकारियों (डीपीओ) के तबादले मानकों के विपरीत किए जाने का मामला सामने आया है।

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सरकारी नीति के मुताबिक कोई भी डीपीओ एक जिले में अधिकतम तीन साल से अधिक नहीं रह सकता है। इस साल के लिए जारी तबादला नीति में भी यही मानक रखा गया था। साथ ही यह भी प्रावधान है कि अधिकतम 20 प्रतिशत कर्मी का ही तबादला किया जा सकेगा। मगर, ऐसे आधा दर्जन डीपीओ का तबादला नहीं किया गया है, जो पिछले 4 से 10 साल से एक ही जिले या मंडल में जमे हैं।
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) निदेशालय द्वारा 20 प्रतिशत संख्या के मानक के मुताबिक जिन डीपीओ के तबादले किए गए हैं, उनमें से करीब 6 ऐसे हैं जिनको मात्र डेढ़ से दो साल में ही हटा दिया गया है। इनमें एक ऐसी महिला डीपीओ वाणी वर्मा भी शामिल हैं, जिन्हें मुजफ्फरनगर से मिर्जापुर तबादला कर दिया है। वाणी को करीब दो साल पहले ही मुजफ्फरनगर में तैनात किया था। इस तरह से किए गए तबादले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 

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4 से 10 साल से एक ही जिले में जमे हैं ये डीपीओ

अनुपमा शांडिल्य, मुरादाबाद मंडल (करीब 10 साल), हेमंत सिंह, गोरखपुर (करीब 7 साल), भरत प्रसाद, फर्रुखाबाद (करीब 6 साल), अजित कुमार, सोनभद्र (करीब 5 साल), मनोज राज, प्रयागराज (करीब 5 साल), अखिलेंद्र दूबे, लखनऊ (करीब 4 साल) और मोहम्मद जफर, कानपुर-संबद्ध मुख्यालय (करीब 5 साल)।

डेढ़ से दो वर्ष में हुआ इन डीपीओ का तबादला
नाम -- कहां से कहां         
वाणी वर्मा -- मुजफ्फरनगर से मिर्जापुर
इफ्तखार -- अहमद वाराणसी से जालौन
शैलेंद्र कुमार राय -- महाराजगंज से कुशीनगर
दुर्गेश प्रताप सिंह -- उन्नाव से वाराणसी
कृष्ण मुरारी -- बलरामपुर से बलिया
दुर्गेश कुमार -- मऊ से महराजगंज

गंभीर आरोपी जांच से घिरे होने पर भी बची कुर्सी

तबादले से बचने वालों में दो ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं, जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक हैं मनोज राव, इनके खिलाफ प्रयागराज में कुंभ घोटाले के खिलाफ सतर्कता जांच चल रही है। आरोप है कि इन्होंने एक टेंट कंपनी का फर्जी बिल वाउचर लगाकर 35 लाख रुपये का भुगतान करा दिया था। मुख्यालय और सीडीओ की जांच पूरी हो गई है। गोंडा में तैनाती के दौरान इन पर भी आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण में वित्तीय अनियमितता बरतने के मामले की जांच हो रही है। दूसरे डीपीओ हैं मोहम्मद जफर। ये जुलाई 2016 से कानपुर में तैनात हैं। इन्हें महिला सहकर्मी के साथ अश्लीलता का आरोप लगने के बाद लगभग एक साल से मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। इन पर भी गोंडा में तैनाती के दौरान पोषाहार को हुए नुकसान के मामले में वसूली हो रही है।

आईसीडीएस की निदेशक डॉ. सारिका मोहन का कहना है कि तबादले में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। चूंकि अधिकतम 20 प्रतिशत कार्मिकों के ही तबादले किए जाने थे। इसलिए समय पूरा होने के बाद भी सभी लोगों का तबादला नहीं किया जा सकता।

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