फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Irregularities in school vans and buses in Lucknow, children are being taken arbitrarily

यूपी: आपका बच्चा स्कूल जा रहा है तो सचेत हो जाइए, क्योंकि स्कूल प्रशासन, आरटीओ और पुलिस ने मूंद रखी हैं आंखें

Sun, 11 Aug 2024 11:12 AM IST
रोहित मिश्र नीरज अंबुज, अमर उजाला, लखनऊ
नीरज अंबुज, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 11 Aug 2024 11:12 AM IST
सार

School van in Lucknow: यदि आपका बच्चा वैन या बस से स्कूल जा रहा है तो आप सचेत हो जाइए। स्कूल बसों और वैन के दुर्घटनाग्रस्त होने के लिए हर कोई एक दूसरे पर जिम्मेदार डालने के लिए तैयार है। 

विज्ञापन
Irregularities in school vans and buses in Lucknow, children are being taken arbitrarily
स्कूल वैन से जाते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 शहीद पथ पर शुक्रवार को स्कूली वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने व बच्चों के अस्पताल पहुंचने के लिए पुलिस, आरटीओ, स्कूल प्रशासन, अभिभावक... सब जिम्मेदार हैं। इनकी लापरवाही का ही नतीजा है कि राजधानी में प्राइवेट वाहनों से लेकर ई रिक्शा तक में स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। उधर, जिम्मेदार आंखें मूंदे हैं।

विज्ञापन


परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के निर्देश पर बीते महीने स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया गया। इसके खत्म होते ही प्राइवेट कार, ऑटो, ई रिक्शा फिर से सड़कों पर आ आए। शहीद पथ पर बच्चों को स्कूल लेकर जाते वक्त पलटी वैन प्राइवेट कार की श्रेणी में पंजीकृत थी, जिसका व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा था। आरटीओ प्रवर्तन को ऐसे वाहनों पर नकेल कसनी चाहिए थी। वहीं, अभिभावक भी बगैर जांच-पड़ताल के प्राइवेट वाहनों, ई रिक्शा जैसे असुरक्षित वाहनों से बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। परिवहन विभाग के अफसरों का आरोप है कि ऐसे वाहनों की चेकिंग के दौरान पुलिस सहयोग नहीं करती।
विज्ञापन


उधर, स्कूलवाले हादसा होते ही पल्ला झाड़ लेता है, जबकि उन्हें भी देखना चाहिए कि बच्चे स्कूल कैसे आ-जा रहे हैं। परिवहन विभाग की ओर से स्कूली वाहनों पर कार्रवाई के बाद जो संस्तुति की जाती है, उसे लेकर डीआईओएस स्तर पर भी लापरवाही बरती जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पांच हजार प्राइवेट वाहन बच्चों को ढो रहे
स्कूली वाहन के रूप में राजधानी के शहरी इलाके में तीन हजार व ग्रामीण क्षेत्रों में दो हजार से ज्यादा प्राइवेट वाहन चल रहे हैं। इनमें वैन व ईको की संख्या सबसे ज्यादा है। इन स्कूली वाहनों में सुरक्षा के इंतजाम मुकम्मल नहीं हैं। न ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इन वाहनों पर ड्राइवर, स्कूल आदि के नाम व नंबर तक नहीं लिखे हैं। फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं हैं।

रद्द होगा प्राइवेट वाहन का पंजीकरण
आरटीओ (प्रवर्तन) संदीप कुमार पंकज ने बताया कि बच्चों को ला रहे प्राइवेट वाहन का पंजीकरण रद्द किया जाएगा। बताया कि मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब की पहल पर स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए 'मिशन भरोसा'  एप से चालकों, वाहन स्वामी व अभिभावकों को जोड़ने का काम किया जा रहा है।

स्कूली वाहनों के ये हैं मानक

Irregularities in school vans and buses in Lucknow, children are being taken arbitrarily
स्कूल बस
- स्कूली वाहन का रंग पीला होना चाहिए।
- वाहन में आगे-पीछे की ओर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- वाहन की खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल होनी चाहिए।
- आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र हों।
- इमरजेंसी नंबर लिखे हों
- वाहन में एक सहायक होना अनिवार्य है
- दरवाजे पर लॉक सिस्टम होना चाहिए।
- फर्स्ट एड बाक्स हो।
- स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए।
- ड्राइवर के पास डीएल हो।
- जीपीएस या सीसीटीवी कैमरा लगा हो।
- ड्राइवर का पुलिस वेरीफिकेशन जरूरी है।

स्टाफ की कमी से अभियान में बाधा

Irregularities in school vans and buses in Lucknow, children are being taken arbitrarily

आरटीओ प्रवर्तन की टीम में अफसरों व स्टाफ की कमी अनफिट व डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान में बाधा बनती है। लखनऊ में चार यात्री कर अधिकारी पीटीओ हैं, जिनमें से दो मुख्यालय में हैं। सड़क सुरक्षा सामूहिक दायित्व है। परिवहन, पुलिस, स्कूल प्रशासन को भी मिलकर काम करना होगा।- संदीप कुमार पंकज, आरटीओ प्रवर्तन

परिवहन विभाग चलाए स्कूली बसें
अभिभावक मजबूर हैं। उन्हें अपना बजट देखना पड़ता है। सड़क पर अनफिट वाहन चलने के जिम्मेदार आरटीओ और स्कूल संचालक हैं। सरकार से मांग है कि परिवहन विभाग की ओर से स्कूली बसें चलाई जाएं, ताकि अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने में सुरक्षित महसूस करें।- प्रदीप कुमार, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश अभिभावक संघ

सीधे तौर पर परिवहन विभाग जिम्मेदार
अनफिट वाहनों को फर्जी तरीके से फिट दिखाकर एनओसी दे दी जाती है। इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसके लिए सीधे तौर परिवहन विभाग जिम्मेदार है।- अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed