एलडीएः बिना ओटीपी कैसे बदल गए कंप्यूटर के रिकॉर्ड, बाबुओं व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
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इसकी वजह ओटीपी की व्यवस्था है। यह ओटीपी उस व्यक्ति के मोबाइल पर जाता है। जिसकी यूजर आइडी व पासवर्ड से लॉगइन कर डाटा बदला जाता है। अब सवाल यह है कि आखिर बिना अधिकारी या बाबू से ओटीपी लेकर एंट्री किए डाटा कैसे बदल गया?
यह सवाल तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब खुद कंप्यूटर सेक्शन के प्रभारी व सिस्टम एग्जीक्यूटिव एसबी भटनागर की आईडी का उपयोग कर भूखंडों का डाटा जैसे आवंटी का नाम आदि बदल दिया गया हो।
पु्लिस में करा दी गई एफआईआर
डाटा में बदलाव के बाद इसे सुरक्षित करने से पहले एक ओटीपी उस आईडी धारक के मोबाइल पर जाता है। उसकी एंट्री के बाद ही रिकॉर्ड बदला जा सकता है। इसके बाद भी अगर रिकॉर्ड बदला जा रहा है तो यही हो सकता है कि आईडी धारक ने ओटीपी खुद दिया हो।
जो 50 प्रकरण अभी कंप्यूटर सेक्शन से दिए गए हैं। वह गोमतीनगर, गोमतीनगर विस्तार, कानपुर रोड योजना, प्रियदर्शिनी और जानकीपुरम योजना के हैं। जांच में इनकी संख्या बढ़ सकती है। ये प्रकरण भी तभी सामने आए जब वास्तुखंड के छह भवनों के कंप्यूटर रिकॉर्ड में हेराफेरी के मामले में एफआईआर पुलिस में करा दी गई।
रिकॉर्ड बदले जाते, पर कार्रवाई कभी नहीं होती
एलडीए में रिकॉर्ड बदलने का काम पहली बार नहीं हुआ है। यह लंबे समय तक फर्जीवाडे़ के बाद एक मॉडस ऑपरेंडी बन गई। सेवानिवृत्त या मृत हो चुके व्यक्ति की यूजर आईडी लंबे समय तक बंद नहीं की जाती है।
किसी तरह ओटीपी भी हासिल कर लिया जाता है। इससे पहले कई प्रकरण हुए। इनमें सही से जांच तक नहीं हुई। शारदानगर योजना के रश्मिखंड में मस्त्य विभाग की जमीन से चार आवंटियों के भूखंड समायोजन में कंप्यूटर रिकॉर्ड बदल कर चार अन्य लोगों के नाम शामिल कर दिए गए।
जबकि, बोर्ड से जिन नामों की अनुमति मिली। वे अलग थे। जानकीपुरम व प्रियदर्शिनी योजना में भी दर्जनों भूखंडों में ऐसा हुआ। अब पहली बार ऐसा हुआ है कि वीसी द्वारा किसी साइबर टीम को इस जांच में लगाया गया है।
ओटीपी को बायपास कर लिया गया
यह कैसे हुआ? क्या यह एलडीए के बाहर से हो रहा था? कैसे सिस्टम को ब्रेक किया गया? इसी सब की जांच कराई जा रही है। मैंने खुद 50 प्रकरण वीसी के सामने रखे हैं। पुलिस की साइबर टीम काम कर रही है। जल्दी ही सच्चाई सामने आ जाएगी।
बिना ओटीपी नहीं बदल सकता डाटा
जांच कर रही समिति की अध्यक्ष और संयुक्त सचिव ऋतु सुहास का कहना है कि डाटा कंप्यूटर में बदलने के लिए ओटीपी की जरूरत होती है। बिना इसके डाटा नहीं बदला जा सकता। साइबर जांच में ही हकीकत सामने आ पाएगी। पुलिस की साइबर टीम को पूरा डाटा दिया जा रहा है। इससे मॉडस ऑपरेंडी को पता कर खत्म किया जा सके।