एनएचएम में ऑफिस ऑडिटर की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा, अनुभव प्रमाण पत्र में गड़बड़ी करने का आरोप
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में 2012 में ऑफिस ऑडिटर की भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया है। अभ्यर्थी ने दो साल के अनुभव का पांच साल का प्रमाण पत्र बनवाया और नौकरी पाने में सफल रहा। जबकि जिस वर्ष की ऑफिस ऑडिटर की सीए की डिग्री है, उससे पांच साल बाद का प्रमाण पत्र लगाया है। जबकि इसमें तीन साल का प्रशिक्षण का समय भी जुड़ा है।
राष्ट्रीय हेल्थ मिशन (एनएचएम) में ऑफिसर ऑडिट की भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। वर्ष 2012 में एक विज्ञापन जारी करके एसपीएमयू के लिए ऑफिसर ऑडिट पद के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसमें पांच साल का अनुभव होना जरूरी था। लेकिन इस पद पर जिस अभ्यर्थी का चयन हुआ, उसने सीए की परीक्षा पास करने के बाद तीन साल तक ट्रेनिंग की।
आरोप है कि 2012 से नौकरी कर रहे ऑफिस ऑडिटर ने 2007 में चार्टर्ड अकाउंटेंट की डिग्री ली। उसके बाद तीन साल की ट्रेनिंग होती है। इस तरह 2010 तक प्रशिक्षण का समय रहा। 2010 के बाद पांच साल का अनुभव वर्ष 2015 में पूरा होता। लेकिन प्रशिक्षु के कार्यकाल के दो साल बाद ही 2012 में आरोपी की एनआरएचएम में नौकरी लग गई।
नौकरी पाने के लिए की गई धोखाधड़ी
शिकायतकर्ता के अनुसार तीन साल के प्रशिक्षण के समय को अनुभव के रूप में दिखाकर नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी की गई है। एनएचएम के अधिकारियों की मदद से उनका चयन भी ऑफिस ऑडिटर के पद पर हो गया। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी शिकायत की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट ने एक मुकदमे में फैसला दिया है कि प्रशिक्षु को कर्मचारी नहीं माना जा सकता है। जबकि अभ्यर्थी ने प्रशिक्षण के समय को अनुभव प्रमाण पत्र के रूप में इस्तेमाल किया है।
शिकायतकर्ता ने इस नियुक्ति में अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई है। एनएचएम के वित्त नियंत्रक जीएस कलसी ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।