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Lucknow News: आरएलसी भवन में खुलेगा आईआरएफ केंद्र, आसान होगी सस्ती जांच की राह
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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के आरएलसी भवन में इंवेस्टिगेशन रिवॉल्विंग फंड (आईआरएफ) केंद्र की स्थापना की जाएगी। इसके बाद संस्थान में पैथोलाॅजी की सस्ती जांचों का रास्ता खुल जाएगा। केजीएमयू ने हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) की तर्ज पर आईआरएफ की शुरुआत करने का फैसला किया है।
केजीएमयू के आरएलसी भवन में अभी हड्डी रोग विभाग का संचालन होता था। अब इसे सुपरस्पेशियलिटी सेंटर के नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके बाद विभाग में तीसरी और चाैथी मंजिल खाली हो गई है। केजीएमयू प्रशासन ने इसका इस्तेमाल आईआरएफ सेंटर के लिए करने की बात कही है। कार्य परिषद ने नवंबर 2024 में आईआरएफ के प्रस्ताव पर मुहर भी लगाई थी। स्थान न होने से इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी। अब इसके लिए स्थान चिह्नित करके प्रक्रिया शुरू हो गई है।
रीजेंट प्रभावित करता है जांच की कीमत
पैथोलॉजी की जांच में रीजेंट का रोल सबसे अहम होता है। इसकी कीमत ही जांच की दर प्रभावित करती है। ज्यादातर कंपनियां रीजेंट की खरीद करने पर बिना कोई कीमत चुकाए संस्थान में मशीन लगाने का प्रस्ताव देती हैं। हाल ही में एक संस्थान में इसी तर्ज पर मशीन लगाई गई है। इसको देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने भी दवाओं की तरह फंड बनाकर रीजेंट भी सीधे खरीदने की योजना बनाई है। इसके लिए बड़े स्थान की जरूरत होगी। आरएलसी भवन खाली होने पर उसमें ही यह केंद्र बनाया जाएगा। केंद्रीकृत स्तर पर खरीद होने से रीजेंट काफी सस्ता मिलने लगेगा। इससे जांच का खर्च कम आएगा और मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क में भी कमी आएगी।
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रोज होती हैं आठ से दस हजार जांच
केजीएमयू की ओपीडी में रोजाना सात से आठ हजार मरीज आते हैं। इनके अलावा करीब साढ़े चार हजार मरीज यहां भर्ती रहते हैं। ट्राॅमा सेंटर में भी करीब पांच साै मरीज रहते हैं। सभी को मिलाकर करीब आठ से दस हजार प्रकार की पैथोलाॅजी जांच रोज होती हैं। नई व्यवस्था से सभी को सस्ती जांचों का लाभ मिलेगा।
Iकुलपति ने आरएलसी भवन को आईआरएफ केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने को मंजूरी दी है। आईआरएफ की शुरुआत होने पर सस्ता रीजेंट मिल सकेगा। इससे जांच सस्ती करने में मदद मिलेगी। I
I- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयूI
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केजीएमयू के आरएलसी भवन में अभी हड्डी रोग विभाग का संचालन होता था। अब इसे सुपरस्पेशियलिटी सेंटर के नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके बाद विभाग में तीसरी और चाैथी मंजिल खाली हो गई है। केजीएमयू प्रशासन ने इसका इस्तेमाल आईआरएफ सेंटर के लिए करने की बात कही है। कार्य परिषद ने नवंबर 2024 में आईआरएफ के प्रस्ताव पर मुहर भी लगाई थी। स्थान न होने से इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी। अब इसके लिए स्थान चिह्नित करके प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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रीजेंट प्रभावित करता है जांच की कीमत
पैथोलॉजी की जांच में रीजेंट का रोल सबसे अहम होता है। इसकी कीमत ही जांच की दर प्रभावित करती है। ज्यादातर कंपनियां रीजेंट की खरीद करने पर बिना कोई कीमत चुकाए संस्थान में मशीन लगाने का प्रस्ताव देती हैं। हाल ही में एक संस्थान में इसी तर्ज पर मशीन लगाई गई है। इसको देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने भी दवाओं की तरह फंड बनाकर रीजेंट भी सीधे खरीदने की योजना बनाई है। इसके लिए बड़े स्थान की जरूरत होगी। आरएलसी भवन खाली होने पर उसमें ही यह केंद्र बनाया जाएगा। केंद्रीकृत स्तर पर खरीद होने से रीजेंट काफी सस्ता मिलने लगेगा। इससे जांच का खर्च कम आएगा और मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क में भी कमी आएगी।
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रोज होती हैं आठ से दस हजार जांच
केजीएमयू की ओपीडी में रोजाना सात से आठ हजार मरीज आते हैं। इनके अलावा करीब साढ़े चार हजार मरीज यहां भर्ती रहते हैं। ट्राॅमा सेंटर में भी करीब पांच साै मरीज रहते हैं। सभी को मिलाकर करीब आठ से दस हजार प्रकार की पैथोलाॅजी जांच रोज होती हैं। नई व्यवस्था से सभी को सस्ती जांचों का लाभ मिलेगा।
Iकुलपति ने आरएलसी भवन को आईआरएफ केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने को मंजूरी दी है। आईआरएफ की शुरुआत होने पर सस्ता रीजेंट मिल सकेगा। इससे जांच सस्ती करने में मदद मिलेगी। I
I- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयूI