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मोदक मामले में सरकार ने बोला सफेद झूठ
विष्णु मोहन/लखनऊ
Updated Thu, 24 Oct 2013 02:06 AM IST
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मुरादाबाद के तत्कालीन एसएसपी राजेश मोदक के खिलाफ जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती हो रही है।
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राजेश मोदक को बचाने के लिए सियासी पैंतरेबाजी का ही नतीजा है जो आला अफसर बगैर आरोपी अधिकारी को आरोप पत्र दिए ही जांच शुरू कराने की बात कह रहे हैं।
नियमानुसार किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले उसे आरोप पत्र दिया जाना चाहिए।
लेकिन राजेश मोदक के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। पिछले दिनों मुरादाबाद का एसएसपी तैनात रहने के दौरान राजेश मोदक ने मातहतों के साथ मारपीट की थी।
पढ़ें-बिना जांच बहाल हुए आईपीएस राजेश मोदक
इसके विरोध में जिले में तैनात पुलिस विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया था।
बात ऊपर तक पहुंची थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने प्रकरण की आलोचना करते हुए राजेश मोदक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया था।
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सरकार ने तब यह दावा भी किया था कि दोषी अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जांच बरेली जोन के आईजी को सौंपी गई है।
लेकिन सरकार का यह दावा सिरे से कोरा था। न किसी तरह की जांच हुई न ही इसके कोई आदेश हुए।
जब इस बाबत सवाल पूछे गए तो पिछले दिनों सरकार का पक्ष रखते हुए आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता ने कहा था कि प्रारंभिक जांच हो चुकी है और अब विभागीय जांच के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।
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यह भी बताया गया था कि प्रस्ताव पर विचार करने के बाद सरकार जांच अधिकारी नामित करेगी।
उल्लेखनीय है कि एक तरफ सरकार की ओर से राजेश मोदक के खिलाफ विभागीय जांच का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा था तो इसी बीच उनकी चुपचाप बहाली के आदेश हो रहे थे। राजेश मोदक को 20 अक्टूबर को बहाल कर दिया गया था।
जानकार बताते हैं कि अभी तक राजेश मोदक को न तो उनके निलंबित होने के विषय पर कोई आरोप पत्र दिया गया न ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के सिलसिले में।
ऐसे में जब आरोप ही नहीं लगाया गया है तब किस बात की जांच होगी। माना जा रहा है कि राजेश मोदक के मामले को ठंडा करने के लिए अधिकारियों की ओर से जांच के सिलसिले में आधारहीन बयान जारी किए जा रहे हैं।
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