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प्रमुख सचिव गृह ने दिलाया भरोसा, कम नहीं होंगे आईपीएस अफसरों के अधिकार

Mon, 11 Dec 2017 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 11 Dec 2017 11:41 PM IST
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IPS officers rights will nit be restricted.

प्रमुख सचिव गृह ने कहा कि आईपीएस अफसरों के अधिकारों में हस्तक्षेप की शासन की कोई मंशा नहीं है। हम डीजीपी की ओर से पूर्व में आए सुझावों को शासनादेश में शामिल करने पर विचार कर रहे हैं। प्रमुख सचिव के इस आश्वासन के बाद आईपीएस एसोसिएशन ने मंगलवार को बुलाई गई बैठक रद्द कर दी है।

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यह बैठक मुख्य सचिव के तीन माह पुराने आदेश पर आईपीएस अफसरों की राय जानने के लिए एसोसिएशन के अध्यक्ष व डीजी फायर सर्विसेज प्रवीण सिंह ने बुलाई थी।

प्रवीण सिंह ने बताया कि मुख्य सचिव के तीन माह पुराने आदेश को लेकर आईपीएस अफसरों में आवाज उठ रही थी। पिछले 2-3 दिनों से सोशल मीडिया पर इसे लेकर मैसेज वायरल हो रहे थे जिससे अधिकारियों में भ्रम था। इसे दूर करने के लिए और आईपीएस अधिकारियों की राय जानने के लिए ही बैठक बुलाई गई थी।
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लेकिन शाम होते-होते प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार का बयान आया कि डीजीपी का सुझाव उनको मिल गया है, गृह विभाग इन्हें पूर्व में जारी आदेश में शामिल करेगा। जिसके बाद बैठक स्थगित कर दी गई।

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पहले से ही तय है डीएम और पुलिस अधीक्षक की भूमिका

IPS officers rights will nit be restricted.

प्रमुख सचिव गृह ने बताया कि सात सितंबर को जारी आदेश में कानून व्यवस्था की समीक्षा समेत कई अन्य विभागों के विकास एजेंडे की समीक्षा के लिए शासनादेश कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन विभाग ने जारी किया था। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की भूमिका पुलिस नियमावली और एक्ट में पहले से तय है।

इसमें किसी तरह के संशोधन का कोई इरादा नहीं है। डीजीपी की ओर से जो सुझाव गृह विभाग को मिले हैं उन्हें शासनादेश में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

डीजीपी ने दिया था कानून-व्यवस्था की बैठकों में थानाध्यक्षों को न बुलाने का सुझाव
आईजी कानून व्यवस्था हरिराम शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन विभाग ने बीती सात सितंबर को पत्र लिखा था।

मुख्य सचिव की ओर से भी इसी आशय का एक पत्र सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, कमिश्नर, जिलाधिकारी, सभी आईजी, डीआईजी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षक को भेजा गया था। इसमें कानून व्यवस्था से जुड़ी बैठक डीएम के स्तर से करने की बात है। अपराध के संबंध में बैठक का जिक्र नहीं है। इस बैठक में थानाध्यक्षों को भी शामिल करने का शासनादेश जारी हुआ था।

डीजपी सुलखान सिह की तरफ से दिया गया था सुझाव

IPS officers rights will nit be restricted.
डीजीपी सुलखान सिंह - फोटो : amar ujala

डीजीपी सुलखान सिंह की ओर से गृह विभाग को सात नवंबर को सुझाव दिया गया था कि कानून व्यवस्था की बैठक में थानाध्यक्षों को न शामिल किया जाए।

विभिन्न त्यौहारों, वीआईपी ड्यूटी या अन्य किसी खास कार्यक्रमों के लिए होने वाली बैठक में थानाध्यक्षों को न बुलाया जाए। इसमें सीओ, उपजिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक और अपर जिलाधिकारी ही शामिल हों।

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