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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Investigative team submitted its report to Chief Minister Yogi Adityanath on Agra Bus accident.

ड्राइवर की झपकी ने ही ली थी 29 लोगों की जान, जांच समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट

Wed, 10 Jul 2019 11:59 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 10 Jul 2019 11:59 AM IST
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Investigative team submitted its report to Chief Minister Yogi Adityanath on Agra Bus accident.
- फोटो : amar ujala

आगरा में सोमवार तड़के हुए बस हादसे में 29 लोगों की जान जाने की वजह ड्राइवर की झपकी ही थी। इसकी पुष्टि सीएम की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में हुई है। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि समिति ने मंगलवार को सीएम योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंप दी।

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सूत्रों के अनुसार परिवहन आयुक्त धीरज साहू की अध्यक्षता वाली समिति ने प्रथम दृष्टया हादसे की वजह ड्राइवर को नींद आना ही माना है। समिति ने जिंदा बच गए लोगों से बात कर यह रिपोर्ट तैयार की है।
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रात की शिफ्ट का टाइम कम रखने की सिफारिश
समिति ने रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि रात में चलने वाली बसों में कम से कम दो ड्राइवर तैनात किए जाएं। दिन की अपेक्षा रात की शिफ्ट का टाइम कम रखा जाए। देर रात सीएम ने संबंधित अफसरों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा निर्देश दिए।

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लखनऊ तलब किए गए रोडवेज के अधिकारी

Investigative team submitted its report to Chief Minister Yogi Adityanath on Agra Bus accident.

बस हादसे में यात्रियों की मौत मामले में सभी क्षेत्रीय प्रबंधक और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक और एआरटीओ लखनऊ तलब किए गए हैं। परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह इस हादसे के बाद रोडवेज अधिकारियों के साथ सुरक्षा और संरक्षा को लेकर बात करेंगे। माना जा रहा है कि कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

हादसे की जांच में यह बात सामने आ रही है कि हादसे की शिकार बस के ड्राइवर कृपा शंकर से रोजाना 900 किमी. तक बस चलवाई जा रही थी। रोडवेज के सूत्रों ने बताया कि बस से स्पीड गर्वनर भी हटा दिया गया था। हालांकि, अधिकारी जांच रिपोर्ट पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

माना जा रहा है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए व्यावहारिक मसलों पर रोडवेज अधिकारियों के साथ बैठक होगी। इसमें परिवहन निगम के बस चालकों को निर्धारित समय से ज्यादा ड्यूटी करने, चालकों को लंबी दूरी की यात्रा में आराम देने के लिए सुविधाएं देने और बसों की दुर्दशा के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

बस ने तीन मिनट में पूरी की थी छह किमी. की दूरी

Investigative team submitted its report to Chief Minister Yogi Adityanath on Agra Bus accident.

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि हादसे की शिकार बस ने तीन मिनट में छह किमी. की दूरी तय की थी। इसका पता इनररिंग रोड के टोल प्लाजा और यमुना एक्सप्रेस वे के विजुअल मेजर सिस्टम ( वीएमएस ) की रिपोर्ट से लगा है।

टोल पर पर्ची चार बजकर एक मिनट पर कटी। चार बजकर दो मिनट पर बस रवाना हो गई। वीएमएस पर तैनात गार्ड का कहना है कि बस चार बजकर पांच मिनट पर नाले में गिरी। इस तरह तीन मिनट में छह किमी. चली। इस हिसाब से रफ्तार 120 किमी. प्रति घंटा मानी जा रही है। पुलिस ने यूपी -100 से हादसे की सूचना का समय भी निकलवाया है। यह चार बजकर 24 मिनट का निकला है।

17 की जान सिर में चोट से गई, 12 की डूबने से: एक्सप्रेसवे पर सोमवार तड़के हुए बस हादसे में मौत की बड़ी वजह सिर में चोट रही। 28 शवों का पोस्टमार्टम सोमवार और एक का मंगलवार की सुबह हुआ। 17 की मौत सिर में चोट लगने से होना पाया गया तो 12 की डूबने की वजह से जान गई।

‘फरिश्तों’ को सम्मानित करेगी पुलिस

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यमुना एक्सप्रेस-वे पर बस हादसे में 27 घायलों की जान बचाने वाले लोगों को पुलिस सम्मानित करेगी। इनमें मौके पर सबसे पहले पहुंचे निहाल सिंह, छलेसर चौकी इंचार्ज अनिरुद्ध और ग्राम प्रधान राकेश सिकरवार का नाम शामिल है।

एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि सभी को प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। बघेलों की ठार के रहने वाले निहाल सिंह ने सबसे पहले बचाव कार्य शुरू किया था। उनके पास मोबाइल फोन नहीं था। बस में फंसे घायलों में से एक को बाहर निकाला। उससे मोबाइल फोन लिया। इससे पुलिस को सूचना दी।

इसके बाद छलेसर से चौकी इंचार्ज अनिरुद्ध और उनकी टीम पहुंची। निहाल सिंह ने इनके साथ घायलों को बाहर निकलवाया। आसपास के गांव के लोग भी मदद के लिए पहुंच गए थे। ग्राम प्रधान राकेश सिकरवार जेसीबी ले आए थे।

हादसे रोकने की सिफारिशों पर नहीं हुआ अमल

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यमुना एक्सप्रेस वे पर हादसे रोकने के लिए दो साल पहले सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट ( सीआरआरआई) ने कुछ सुझाव दिए थे। इन पर अमल नहीं किया गया। अगर इन्हें लागू कर दिया गया होता तो शायद हादसों की रफ्तार कुछ कम हो गई होती। ये सुझाव इस तरह से थे। स्पीड कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए। अंधाधुंध रफ्तार से वाहन चलाने वालों के सिर्फ फोटो चालान न हों। उन्हें अगले टोल प्लाजा पर रोककर जुर्माना वसूला जाए।

डिवाइडर हटाकर थ्राई पिलर लगाए जाएं : हादसों की एक वजह वाहनों का टक्कर के बाद डिवाइडर पर चढ़ जाना और फिर उसके पास पहुंच जाना भी है। इससे हादसा और गंभीर हो जाता है। इस कारण से डिवाइडर के बदले थ्राई पिलर (तिकोने खंभे) लगाने का सुझाव दिया गया था। ये काफी मजबूत होते हैं। इनसे टकराकर वाहन दूसरी ओर नहीं जा पाते हैं।

रंबल स्ट्रिप लगाई जाएं : जगह जगह रंबल स्ट्रिप लगाने का भी सुझाव था। इससे वाहन चला रहे ड्राइवरों को नींद नहीं आएगी। इससे हादसे कम हो सकते हैं।

बैरियरों की ऊंचाई बढ़ाई जाए : यमुना एक्सप्रेस वे पर दोनों ओर बैरियर तो लगे हैं लेकिन इनकी ऊंचाई कम है। कई बार जानवर इन्हें पार करके आ जाते हैं। अगर बैरियर ऊंचे हो जाएं तो एक्सप्रेस वे पर जानवरों को आने से रोका जा सकता है।

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