दस लाख से ज्यादा कमाई छुपाई तो होगी जांच
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आयकर विभाग के कंप्यूटरीकृत सिस्टम के जरिये मिलने वाली सूचनाओं में अब हर मामले में गहराई से पड़ताल नहीं की जा सकेगी। अब मेट्रो शहर के रहने वाले किसी व्यक्ति द्वारा दस लाख रुपये की कमाई छुपाने की सूचना मिलने पर ही गहराई से पड़ताल की जाएगी। मौजूदा नियमों से लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने यह फैसला किया है।
बैंक, रजिस्ट्री ऑफिस, म्यूचुअल फंड कंपनीज, सेबी समेत अन्य विभागों के जरिये आयकर विभाग को कालेधन के इस्तेमाल या फिर टैक्स चोरी से संबंधित सूचनाएं मिलती हैं। इसके अलावा रुटीन में भी ये विभाग लेनदेन से संबंधित जानकारियां आयकर विभाग से साझा करते हैं।
आयकर विभाग में इन सूचनाओं के आधार पर एनुअल इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (एआईआर) तैयार की जाती है। साथ ही सूचनाओं को छांटकर उन्हें उनके पैन के पते से संबंधित इलाकों के आयकर अफसरों को भेज दिया जाता है। वहां से आगे की छानबीन और जांच-पड़ताल होती है। इस व्यवस्था को कंप्यूटर एडेड स्क्रूटनी कहा जाता है।
सितंबर 2014 में सीबीडीटी ने साफ तौर पर ऐसे मामलों में स्क्रूटनी का नोटिस देने के साथ ही संबंधित व्यक्ति को लिखित रूप से कारण भी बताने के लिए कहा था, मगर इस आदेश के पालन में भारी लापरवाही बरती जा रही थी।
...पर लेनी होगी अनुमति
इसे देखते हुए गत 31 दिसंबर से बोर्ड ने यह व्यवस्था कर दी है कि अब एनुअल इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट में किसी व्यक्ति के खिलाफ यदि कोई विशिष्ट सूचना मिलती है, तो उससे सिर्फ उसी सूचना को लेकर सवाल-जवाब और कार्रवाई की जाएगी।
यदि मेट्रो शहर में रहने वाले किसी व्यक्ति के खिलाफ दस लाख रुपये और नॉन मेट्रो शहर में रहने वाले व्यक्ति के खिलाफ पांच लाख की आय छुपाने की जानकारी मिलती है तभी संपूर्ण स्क्रूटनी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह कार्रवाई भी तब होगी, जब संबंधित प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर इसके लिए अनुमति देंगे।
मौजूदा व्यवस्था में होता था उत्पीड़न
मौजूदा व्यवस्था में एआईआर के जरिये यदि किसी व्यक्ति द्वारा कार खरीदे जाने की जानकारी आयकर विभाग को मिलती थी तो उसे नोटिस देकर न केवल कार, बल्कि पूरे वर्ष में सभी प्रकार के लेनदेन, बैंक खाते, एकाउंट बुक्स, रजिस्टर व अन्य लेखा-बहियां तलब करके पड़ताल की जाती थी। इसमें अक्सर संबंधित व्यक्ति का उत्पीड़न होता था।
अब नई व्यवस्था के बाद यदि मेट्रो शहर में रहने वाले किसी व्यक्ति द्वारा दस लाख रुपये की संपत्ति खरीदने की सूचना मिलती है और उसने आयकर रिटर्न में संपत्ति छह लाख रुपये बताई है तो उसके खिलाफ इतनी गहराई से पड़ताल नहीं होगी। उससे सिर्फ चार लाख रुपये का हिसाब-किताब ही मांगा जाएगा।
...तो लग जाता सूचनाओं का अंबार, मुश्किल होती पड़ताल
आयकर विभाग ने एक जनवरी से 50 हजार रुपये से ज्यादा के होटल बिल या विदेश यात्रा के टिकट का भुगतान करने, दो लाख से ज्यादा की ज्वैलरी खरीदने, दस लाख से ज्यादा की संपत्ति खरीदने, जन-धन को छोड़कर अन्य कोई बैंक खाता खोलने, नॉन लिस्टेड कंपनियों के एक लाख से ज्यादा मूल्य के शेयर खरीदने, साल में पचास हजार से ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम अदा करने पर पैन नंबर का उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया है।
ऐसे में आयकर विभाग के पास सूचनाओं का भंडार जमा हो जाएगा। इस स्थिति में यदि सभी मामलों में गहराई से पड़ताल की गई तो पेंडेंसी काफी बढ़ जाएगी। इसे देखते हुए स्क्रूटनी के नियमों में संशोधन किया गया है।
मामले पर आयकर सलाहकार सीए संजय अग्रवाल का कहना है कि अभी किसी व्यक्ति को स्क्रूटनी का नोटिस मिलता है तो वह दहशत में आ जाता है, क्योंकि विभाग विशिष्ट सूचना के साथ ही पूरा खाता और साल भर के हिसाब-किताब का ब्यौरा तलब कर देता है। अब नए नियमों के तहत इस प्रकार का उत्पीड़न नहीं होगा। विभाग का यह फैसला स्वागत योग्य है।