सवाल-जवाब: शिवपाल सिंह बोले- अखिलेश यादव अब पारंगत हो गए हैं, साये की तरह उनके साथ रहेंगे
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि दिल से खुश हूं। पूरा परिवार और सभी रिश्तेदार खुश हैं। सियासी बात को अलग कर दें तो मैं कभी नहीं चाहता था कि अखिलेश हमसे दूर रहें। नेताजी की सियासी व्यस्तता में अखिलेश की हर स्तर पर मैंने देखरेख की थी। मेरी पत्नी ने कभी आदित्य और अखिलेश में अंतर नहीं किया। हमारा उद्देश्य अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है।
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सपा में कभी नंबर दो की हैसियत थी। पिछले चुनाव में अलग हुए तो प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना ली। पांच साल तक अपनी पार्टी चलाई और अब फिर सपा के साथ आ गए हैं। चाचा शिवपाल सिंह यादव और भतीजे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की एकजुटता से कार्यकर्ताओं में जोश है। इसका चुनाव में क्या लाभ होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। बहरहाल, शिवपाल का कहना है कि उनका एक ही मकसद है- भाजपा को सत्ता से बेदखल कर अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाना। वे कहते हैं कि लंबे संघर्ष के बाद प्रदेश में समाजवाद स्थापित हुआ था, मगर भाजपा ने प्रदेश को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां वह 50 साल पहले था। चुनावी समर में संभावनाओं को लेकर चंद्रभान यादव ने शिवपाल से खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश...
सवाल: चर्चा थी कि आप भाजपा के साथ जा सकते हैं, मगर सपा से गठबंधन हो गया?
जवाब: हमारा पूरा जीवन भाजपा के विरोध में बीता है। वह सत्ता में रही तो वर्षों का संघर्ष निरर्थक हो जाएगा। उसकी फासीवादी और सांप्रदायिक नीति से समाज का नुकसान हुआ है। वह समाज को जोड़ने के बजाय जाति-धर्म में उलझाकर तोड़ने का षड्यंत्र रचती है। हम लोहिया के सिपाही हैं। उसकी हर चाल को नाकाम करेंगे। सपा ही भाजपा को रोकने की स्थिति में है। हमारे साथ होने से उनकी स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है। चुनाव में भाजपा का कनात-तंबू उखड़ना तय है। उसका पूरी तरह से सफाया होगा।
सवाल: करीब पांच साल बाद फिर से सपा के साथ हैं। कैसा लग रहा है? एकजुटता की बात कैसे बनी?
जवाब: दिल से खुश हूं। पूरा परिवार और सभी रिश्तेदार खुश हैं। सियासी बात को अलग कर दें तो मैं कभी नहीं चाहता था कि अखिलेश हमसे दूर रहें। नेताजी की सियासी व्यस्तता में अखिलेश की हर स्तर पर मैंने देखरेख की थी। मेरी पत्नी ने कभी आदित्य और अखिलेश में अंतर नहीं किया। अलग हुए तो यह बात हर वक्त कचोटती रहती थी। अब हम सब एक हैं। नेताजी के चेहरे पर खुशी साफ दिखती है। जहां तक एक साथ आने की बात है, तो इस पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी। पारिवारिक कार्यक्रम में मुलाकात के दौरान अखिलेश ने घर आने की बात कही थी। वे आए और बातचीत भी की। उनकी इस पहल ने सारे मलाल खत्म कर दिए।
सवाल:...तो क्या प्रसपा का सपा में विलय हो जाएगा?
जवाब: नहीं, पार्टी रहेगी। परिवार एक है। दिल एक है। सपा के साथ गठबंधन है। पार्टी बनाने के बाद तमाम लोग हमारे साथ जुड़े हैं। बूथ लेवल पर हमारी तैयारी है। 240 लोगों ने पार्टी से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। इसमें 170 मजबूत स्थिति में थे। वे चुनावी मैदान में बेहतर प्रदर्शन करने को तैयार हैं, लेकिन भाजपा को हराने के लिए सपा के साथ गठबंधन किया है।
सवाल: कितनी सीटों पर आप चुनाव लड़ेंगे?
जवाब: अखिलेश को हमने अपनी सूची दे दी है। यह भी कहा है कि अपने स्तर पर सर्वे करा लें। जितने जिताऊ उम्मीदवार हैं, उन्हें चुनाव में उतारा जाए। वे हमारी सूची पर काम कर रहे हैं। पूरी तरह से इत्मीनान हो जाएगा तो हम दोनों बैठक कर तय कर लेंगे। अब कहीं कोई संशय नहीं है।
सवाल: आप कहां से लड़ेंगे और आदित्य यादव कहां से?
जवाब: सपा अध्यक्ष जहां से कहेंगे, लड़ने को तैयार हैं। जहां तक आदित्य की बात है तो यह अखिलेश पर निर्भर करेगा। वह चुनाव लड़ाना चाहेंगे तो आदित्य लड़ेंगे, अन्यथा आगे देखा जाएगा। आगे 2024 का भी चुनाव है। यह जरूरी नहीं है कि सभी लोग विधानसभा में ही चुनाव लड़ें। सपा की सरकार बनेगी तो तमाम अवसर हैं। कभी भी एडजस्ट किया जा सकता है।
सवाल: क्या आपने अखिलेश को अपना नेता मान लिया है?
जवाब: बिल्कुल...। वे पूरी तरह से सियासत में पारंगत हो गए हैं। भाजपा से मुकाबला करने में सक्षम हैं। जहां भी उन्हें हमारी जरूरत होगी, हम साये की तरह उनके साथ रहेंगे। मैंने करीब 45 साल पार्टी में काम किया है। सभी अपने हैं। राजनीतिक बात अलग है।
सवाल: सपा के मंच पर कबसे दिखेंगे?
जवाब: अभी तो चुनाव आयोग ने रैली पर रोक लगा रखी है। अनुमति मिली तो हर उम्मीदवार के लिए रैली करेंगे। अखिलेश के साथ भी जाएंगे और अकेले भी। जहां भी पार्टी को जरूरत होगी, वहां चुनाव प्रचार करने के लिए हम जरूर जाएंगे।
सवाल: चुनाव चिह्न किसका रहेगा? सपा का या प्रसपा का?
जवाब: अभी हमारा चुनाव चिह्न स्थायी नहीं है। पार्टी हमारी रहेगी। चुनाव चिह्न को लेकर बातचीत चल रही है। यह भी संभव है कि कुछ उम्मीदवार हमारी पार्टी के सिंबल पर लड़ें और कुछ सपा के सिंबल पर।