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केजीएमयू के इंटर्न छात्रों ने शुरू की भूख हड़ताल

Wed, 25 Nov 2020 01:26 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Nov 2020 01:26 AM IST
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interns on hunger strike for stipend hike
250 रुपये रोज के भत्ते को महंगाई के अनुसार बढ़ाने की मांग
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एमबीबीएस करने के बाद इंटर्नशिप कर रहे केजीएमयू के छात्रों ने मंगलवार से भूख हड़ताल शुरू कर दी है। ये अब तक मिल रहे 250 रुपये प्रतिदिन के भत्ते को महंगाई के अनुसार बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर ये पहले भी प्रदर्शन कर चुके हैं। उनका आरोप है कि केजीएमयू के अलावा शासन स्तर पर भी वे कई बार ज्ञापन दे चुके हैं। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की कि इंटर्न को कम से कम 30,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाए।
केजीएमयू में 250 एमबीबीस व बीडीएस इंटर्न छात्र हैं। इन्हें 7500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है। करीब 10 साल से यही स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इसे बढ़ाने की मांग की जा रही है। सुनवाई नहीं होने पर मंगलवार को इंटर्न छात्र वार्ड से काम छोड़ कर मुख्य परिसर में एकत्र हो गए। वे कुलपति कार्यालय से नारेबाजी करते हुए पूरे परिसर में घूमे। उसके बाद गेट नंबर एक के पास छत्रपति शाहू जी महाराज की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद छात्रों ने भूख हड़ताल की घोषणा कर दी। इंटर्न छात्र अमर पाल यादव का कहना है कि उन्हें रेजिडेंट डॉक्टरों की तरह जिम्मेदार भी बनाया गया है। मगर स्टाइपेंड के नाम पर दैनिक मजदूरी से भी कम पैसा दिया जा रहा है। डॉ. अमरपाल यादव के मुताबिक चरणबद्ध तरीके से भूख हड़ताल की जा रही है। अभी डॉ. अविनाश यादव और डॉ. योगेश पांडेय भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
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कोरोना वायरस नियंत्रण में भी लगाए गए
छात्रों का कहना है कि उनकी ड्यूटी कोरोना वायरस नियंत्रण में भी लगाई गई थी। शासन से आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही उनका स्टाइपेंड बढ़ाया जाएगा, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। इंटर्न छात्र डॉ. शिवम, डॉ. अविनाश, डॉ. मनोज, डॉ. पप्पू चौरसिया आदि ने कहा कि वह रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ सभी संक्रमण वाले विभागों में ड्यूटी कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी परेशानियों की अनदेखी की जा रही है।
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