लखनऊ में कभी पैसे खर्च करके सुनते थे गालियां, पढ़ें ये मजेदार किस्सा
लखनऊ भी अजीब मस्ती वाला शहर रहा। यहां के रहन-सहन के तमाम किस्से हैं। लखनऊ की तहजीब मशहूर है। पर, कोई अगर कहे कि इसी लखनऊ में कभी लोग गाली सुनने के लिए पैसे दिया करते थे तो शायद ही किसी को भरोसा हो। पर, यह बात पूरी तरह सच है।
आज भले ही ‘शोहदा’ शब्द अपमान का प्रतीक माना जाता हो लेकिन कभी यह लखनऊ की संस्कृति का अहम हिस्सा थे। इन्हें लोग काफी प्रेम करते थे और इनकी गालियों को शुभ मानते थे। इन्हीं के बीच की कुछ महिलाएं सब्जी भी बेचा करती थीं। उनसे भी लोग गाली सुनते।
गालियों के बीच ही दुकानदार पैसे निकालता
मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने अपने संस्मरण में लिखा है, ‘शोहदों की एक पूरी जमात रहती थी। किसी की दुकान के सामने पहुंच जाते और आवाज लगाते, ला....दे।’दुकानदार जानबूझकर इन्कार करता। शोहदे कुछ उल्टा-सीधा बोलते। दुकानदार भी कुछ कहता।
शोहदा कहता, ‘अबे लाला! अपनी कमाई लेकर ऊपर जाएगा क्या। बात बढ़ती और गालियों तक आ पहुंचती। शोहदा भी गालियां देने लगता। बाहर से आए लोगों को लगता कि अब मार हुई कि तब मार हुई, लेकिन गालियों के बीच ही दुकानदार पैसे निकालता और हंसते हुए शोहदे को दे देता। शोहदा भी उसे अदब से सलाम करता और आगे बढ़ जाता।
सब्जी बेचने वाली महिलाओं के पास गाली सुनने जाते
सब्जी लेने वाले ने हंसते हुए सब्जी ली और उसे सब्जी से ज्यादा पैसा देकर हंसते-हंसते लौट आए। घर आए तो बोले, ‘आज गालियां सुनने को मिल गई। काफी शुभ रहेगा।’