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डिपार्टमेंट क्या बटा लटक गई नौकरियां
विवेक त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Fri, 20 Dec 2013 11:27 PM IST
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इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट के बंटवारे से मिनिस्टीरियल स्टाफ में मृतक आश्रित कोटे की नियुक्तियां फंस गई हैं।
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सूबे के 40 मृतक आश्रित नौकरी के लिए डीजीपी से गृह सचिव तक का चक्कर लगा रहे हैं।
लखनऊ, बुलंदशहर, गोरखपुर और आगरा के चार मृतक आश्रितों ने छह साल पहले हुआ टेस्ट भी पास कर लिया है। इसके बावजूद उन्हें अभी तक अपॉइंटमेंट लेटर नहीं मिल सका।
लखनऊ के हिमांशु श्रीवास्तव बताते हैं कि उनका लिखित टेस्ट पांच जनवरी 2006 में हो गया था। लिखित टेस्ट पास करने के बाद मेडिकल और पुलिस वेरीफिकेशन भी कराया गया।
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यही स्थिति बुलंदशहर के पवन कुमार शर्मा, गोरखपुर के गजेंद्र शाही और आगरा के पवन की है। चारों ने टेस्ट पास किया और इनकी औपचारिकताएं भी पूरी हो चुकी हैं पर अपॉइंटमेंट लेटर नहीं मिल रहा।
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उधर, विभाग का कहना है कि मृतक आश्रितों की भर्ती एएसआई (एम) पद पर होनी है। जब इस पद पर तैनात कर्मचारियों का प्रमोशन एसआई (एम) पद पर होगा तभी वैकेंसी बनेगी। इसके बाद ही भर्ती की जा सकेगी।
आखिर पेंच कहां फंस रहा
दरअसर करीब सात महीने पहले इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट का बंटवारा कर इंटेलीजेंस और सिक्योरिटी दो विभाग बना दिए गए।
सूत्रों के मुताबिक डिपार्टमेंट का बंटवारा तो हो गया लेकिन दोनों के मिनिस्टीरियल संवर्ग (एएसआई) का बंटवारा अब तक नहीं हो सका है।
इससे इंटेलीजेंस और सिक्योरिटी में रिक्तियों व पदों की उपलब्धता को लेकर संशय बना हुआ है। यही वजह है कि भर्ती नहीं की जा रही है।
सीएम से गुहार के बाद भी अब तक कुछ नहीं
मृतक आश्रितों ने पिछले साल मई में सीएम से गुहार लगाई थी। इस पर सीएम के अनुसचिव डॉ. नंदलाल ने एडीजी इंटेलीजेंस से एक माह में रिपोर्ट तलब की थी लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
आरटीआई का भी जवाब नहीं दिया
परीक्षा में सफल होने के बाद भी अपॉइंटमेंट लेटर न मिलने पर सिकंदराबाद के पालीवाल नगर निवासी पवन कुमार शर्मा ने आरटीआई के माध्यम से इंटेलीजेंस हेडक्वार्टर से तीन सवालों पर जानकारी मांगी।
उन्होंने पूछा, पांच जनवरी 2006 को हुई परीक्षा में पास होने के बाद भी अपॉइंटमेंट लेटर क्यों नहीं दिया गया? परीक्षा पास करने के बाद चरित्र सत्यापन हेडक्वार्टर को किस तारीख को प्राप्त हुई? विभाग में कितने समय से एएसआई (एम) के कितने पद खाली हैं?
इंटेलीजेंस हेडक्वार्टर के सहायक जन सूचना अधिकारी ने सितंबर 2011 को भेजे जवाब में कहा कि इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 24 की उपधारा 4 के तहत इस परिधि से बाहर है। चूंकि मांगी गई सूचना भ्रष्टाचार व मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित नहीं हैं इसलिए सूचना देना संभव नहीं है।
नियम बदलकर एक को दे दी भर्ती
नौकरी के लिए भटक रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि देवरिया के शशिधर प्रताप सिंह की नियुक्ति के लिए नियम बदल दिए गए। उसे सिक्योरिटी हेडक्वार्टर में मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति दी गई है।
चूंकि, एएसआई (एम) का कोई पद रिक्त नहीं था इसलिए एसआई (एम) का एक पद डिजॉल्व करते हुए उसकी जगह शशिधर को एएसआई (एम) का पद दे दिया गया। अभ्यर्थियों ने इस नियुक्ति को नियमों के खिलाफ बताया है।