मुख्तार अंसारी के बेटों ने जमीन कब्जाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में ही कर दिया था खेल, योगी राज में पर्दाफाश
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इसके बाद दस्तावेजों में हेराफेरी कर उक्त जमीन को फसली वर्ष 1369 से लेकर 1370 तक एल नारायण और फसली वर्ष 1380 में कृष्ण कुमार के नाम अंकित कर दिखाया गया। इसके बाद फसली वर्ष 1371 से 1374 तक की खतौनी गायब कर उक्त जमीन का वाद एसडीएम कोर्ट में दाखिल कर मामले को उलझाए रखा गया।
इस वाद के अंतिम निस्तारण के बाद ही गुरुवार को एलडीए ने बुलडोजर चलाकर निष्क्रांत भूमि पर बनी अवैध बिल्डिंगों को ध्वस्त किया। एसडीएम एसके त्रिपाठी ने बताया कि मुख्तार अंसारी के बेटों ने डालीबाग स्थित गाटा संख्या 93 सरकारी भूमि पर कब्जा कर रखा था। इसी बीच गलत तरीके से एलडीए से नक्शा पास करवाकर जमीन पर बिल्डिंग का निर्माण किया गया।
अवैध इमारतों को ध्वस्त करने में हुए खर्च की होगी वसूली
निष्क्रांत संपत्ति पर बनी अवैध इमारतों को ध्वस्त करने में आए खर्च का मूल्यांकन कर आरोपियों से इसकी वसूली की जाएगी। इसमें मौके पर तैनात किए गए 250 सिपाहियों, 4 दरोगा, प्रशासन, पुलिस और एलडीए के अफसरों का एक दिन का वेतन जोड़ा जाएगा। एलडीए को खर्च का मूल्यांकन करने के बाद वसूली आदेश के लिए प्रशासन को विवरण देना होगा।
इसके बाद राजस्व टीम आरोपी से इसकी वसूली करेगी। मुख्तार अंसारी और उसके दोनों बेटों के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन कब्जा करने का मुकदमा दर्ज कराया गया है। उनसे अवैध कब्जा ध्वस्त करने में आए खर्च की वसूली की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
गृहकर निर्धारण में भी हुई गड़बड़ी, कराई जाएगी जांच
एलडीए ने डालीबाग में जिन दो इमारतों को अवैध करार देते हुए गुरुवार को ध्वस्त किया, उनके गृहकर निर्धारण में भी गड़बड़ी की गई है। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार ध्वस्त हुए दोनों मकान राबिया बेगम पत्नी शुभानअल्लाह अंसारी के नाम हैं। उनमें एक मकान का सालाना टैक्स 8634 रुपये है जबकि दूसरे मकान का टैक्स महज 567 रुपये है।
नगर निगम के रिकॉर्ड के तहत मकानों का गृहकर निर्धारण पहले से है और 2010 की नई दरों के आधार पर उनका नए सिरे से निर्धारण भी किया जा चुका है। नगर निगम ने चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के जो बिल जारी किए हैं, उसके तहत एक मकान पर 9980 रुपये और दूसरे पर 67352 रुपये टैक्स बकाया है। इस बारे में जोनल अधिकारी सुभाष कुमार से बात की गई तो उन्होंने जानकारी होने से इनकार किया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जिस मकान का टैक्स 67352 रुपये था, वह जमा है।
नगर निगम की सीमा में आने वाले मकानों पर नगर निगम टैक्स लगाता है। टैक्स लगाने में यदि गड़बड़ी की गई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। बकाया टैक्स की वसूली के लिए नोटिस भी जारी किया जाएगा। -अमित कुमार, अपर नगर आयुक्त
ध्वस्तीकरण आदेश के लिए वकीलों का एलडीए में हंगामा
विहित प्राधिकारी उस समय गोमतीनगर कार्यालय में थीं। इस पर वकील गोमतीनगर कार्यालय पहुंच गए। वहां ऋतु सुहास ने वकीलों को आदेश की प्रतिलिपि उपलब्ध करवाई। विहित प्राधिकारी के न्यायालय की ओर से गत 11 अगस्त को पारित आदेश के तहत ही गुरुवार को दोनों इमारतें ध्वस्त की गई थीं।