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पिस्टल तक नहीं खोल पाए इंस्पेक्टर और एसएसआई
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लखनऊ। डीसीपी दक्षिणी रवि कुमार ने बुधवार को नगराम थाने का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शस्त्रागार में रखे असलहे भी चेक किए। इसके बाद उन्होंने इंस्पेक्टर से लेकर अन्य दरोगाओं से पिस्टल, एसएलआर, एके 47 समेत कार्बाइन को खोलकर अलग करने और फिर जोड़कर चलाने को कहा। इंस्पेक्टर मो. अशरफ से लेकर एसएसआई गजे सिंह, एसआई राजेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, राजेश यादव को असलहा खोलने में पसीना छूट गया। वहीं पुलिस की बेहद भरोसेमंद समझी जाने वाली ग्लॉक पिस्टल को भी इनमें से कोई नहीं खोल सका। इस पर डीसीपी ने सभी को फटकारा और फिर खुद ही ग्लॉक पिस्टल खोलकर पुर्जे अलग करके उन्हें जोड़कर दिखाया।
एसीपी मोहनलालगंज दिलीप कुमार सिंह के साथ नगराम थाने पहुंचे डीसीपी ने अर्दली रूम आवास, मेस, मालखाना, शस्त्रागार, बंदीगृह, कंप्यूटर रूम व महिला हेल्प डेस्क समेत अन्य अभिलेखों का निरीक्षण किया। उन्होंने हेड मोहर्रिर मालखाना को असलहों की ऑयलिंग करते हुए तेल की मात्रा ज्यादा न डालने के लिए कहा, क्योंकि इससे फायरिंग के समय धुआं निकलता है। अपराधों पर नियंत्रण में प्रभावी भूमिका निभाने वाले एसएसआई गजे सिंह को 1000 रुपये व सिपाही राजीव पांडेय, जंग बहादुर, अंबिकेष तिवारी व मो. याकूब को 500-500 रुपये देकर पुरस्कृत किया। कुछ रजिस्टरों मे प्रविष्टियां अपूर्ण पाए जाने पर हेड मोहर्रिर को चेतावनी देते हुए फटकार लगाई और 15 दिन का अवसर दिया।
कई पुलिसकर्मियों को नहीं थी जानकारी
पुराने समय में ग्लॉक पिस्टल नहीं थी। ऐसे में कई पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी नहीं है। जो लोग ट्रेनिंग करके आए थे, उनमें से भी कुछ पिस्टल को पूरी तरह से नहीं खोल सके। सभी को जानकारी दी गई, ताकि जरूरत पड़ने पर ग्लॉक पिस्टल का प्रयोग कर सकें।
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- रवि कुमार, डीसीपी दक्षिणी
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एसीपी मोहनलालगंज दिलीप कुमार सिंह के साथ नगराम थाने पहुंचे डीसीपी ने अर्दली रूम आवास, मेस, मालखाना, शस्त्रागार, बंदीगृह, कंप्यूटर रूम व महिला हेल्प डेस्क समेत अन्य अभिलेखों का निरीक्षण किया। उन्होंने हेड मोहर्रिर मालखाना को असलहों की ऑयलिंग करते हुए तेल की मात्रा ज्यादा न डालने के लिए कहा, क्योंकि इससे फायरिंग के समय धुआं निकलता है। अपराधों पर नियंत्रण में प्रभावी भूमिका निभाने वाले एसएसआई गजे सिंह को 1000 रुपये व सिपाही राजीव पांडेय, जंग बहादुर, अंबिकेष तिवारी व मो. याकूब को 500-500 रुपये देकर पुरस्कृत किया। कुछ रजिस्टरों मे प्रविष्टियां अपूर्ण पाए जाने पर हेड मोहर्रिर को चेतावनी देते हुए फटकार लगाई और 15 दिन का अवसर दिया।
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कई पुलिसकर्मियों को नहीं थी जानकारी
पुराने समय में ग्लॉक पिस्टल नहीं थी। ऐसे में कई पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी नहीं है। जो लोग ट्रेनिंग करके आए थे, उनमें से भी कुछ पिस्टल को पूरी तरह से नहीं खोल सके। सभी को जानकारी दी गई, ताकि जरूरत पड़ने पर ग्लॉक पिस्टल का प्रयोग कर सकें।
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- रवि कुमार, डीसीपी दक्षिणी