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Lucknow News: टीबी, कैंसर, डायबिटीज और बीपी पर मंथन करेंगे वैज्ञानिक
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में तीन से सात जनवरी 2024 के बीच होेने वाले भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 109वें वार्षिक अधिवेशन में टीबी, कैंसर, डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियों पर दुनिया भर के शीर्ष वैज्ञानिक मंथन करेंगे। इन बीमारियों पर होने वाले विशेष सत्र में न सिर्फ विशेषज्ञों के सत्र होंगे बल्कि सामान्यजन भी उनसे सवाल-जवाब कर सकेंगे।
भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ के पूर्व महाध्यक्ष प्रो. अशोक सक्सेना ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ही विज्ञान को सीधे समाज से जोड़ना है। इसीलिए यह अधिवेशन जन सामान्य के बीच किया जाता है। विज्ञान बड़े-बड़े आविष्कारों की बात करता है, लेकिन अगर सबसे ज्यादा परेशान करने वाली समस्याओं के समाधान पर ही चर्चा और समाधान न हो सके तो उसकी क्या उपयोगिता रहेगी। इसीलिए विज्ञान कांग्रेस में शीर्ष वैज्ञानिक भारत में तेजी से फैलने वाली प्रमुख बीमारियों जैसे- कैंसर, डायबिटीज और बीपी के कारणों की पड़ताल करेंगे। इस बार यह छठवां आयोजन होगा। वास्तव में भारतीय विज्ञान कांग्रेस की स्थापना का विचार लविवि के प्रो. पीएस मैक मोहन और प्रो. जेएल सिमोंसेन ने ही दिया था।
2025 तक टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य
भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। टीबी के इलाज की अवधि को अब छह महीने से कम करके दो महीने तक लाने पर भी बात हो रही है। नई दवाओं का ट्रायल चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इसे गाइडलाइन में शामिल किया जाएगा।
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नोबल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिकों के शामिल होने की उम्मीद
लविवि अब तक 1916, 1923, 1953, 1985 और 2002 में विज्ञा कांग्रेस की मेजबानी कर चुका है। इस बार के आयोजन में दुनिया भर के 20 हजार से ज्यादा वैज्ञानिक जुटने की उम्मीद हैं। इसमें नोबल पुरस्कार पाने वाले वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। यहां के शिक्षक, वैज्ञानिक और विद्यार्थियों को उनसे बातचीत करने और सुनने का अनुभव मिलेगा।
अगले माह फिर होगी बैठक
लविवि में भारतीय विज्ञान कांग्रेस की तैयारियां परखने आई टीम का तीन दिवसीय दौरा रविवार को संपन्न हो गया। इस टीम में विज्ञान कांग्रेस संघ के महाध्यक्ष प्रो. अरविंद कुमार सक्सेना, निवर्तमान महाध्यक्ष प्रो. विजयलक्ष्मी सक्सेना, पूर्व महाध्यक्ष डॉ. अशोक सक्सेना, पूर्व महाध्यक्ष डॉ. मनोज चक्रवर्ती, पूर्व महासचिव डॉ. गंगाधर व डॉ. एस रामकृष्ण, पूर्व कोषाध्यक्ष डॉ. शिवसत्य प्रकाश, डॉ. चंदेल और कोषाध्यक्ष डॉ. निवेदिता चक्रवर्ती शामिल थे। अब मई में फिर से विशेषज्ञों की टीम कांफ्रेंस की रूपरेखा तय करने के लिए बैठक करेगी।
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भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ के पूर्व महाध्यक्ष प्रो. अशोक सक्सेना ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ही विज्ञान को सीधे समाज से जोड़ना है। इसीलिए यह अधिवेशन जन सामान्य के बीच किया जाता है। विज्ञान बड़े-बड़े आविष्कारों की बात करता है, लेकिन अगर सबसे ज्यादा परेशान करने वाली समस्याओं के समाधान पर ही चर्चा और समाधान न हो सके तो उसकी क्या उपयोगिता रहेगी। इसीलिए विज्ञान कांग्रेस में शीर्ष वैज्ञानिक भारत में तेजी से फैलने वाली प्रमुख बीमारियों जैसे- कैंसर, डायबिटीज और बीपी के कारणों की पड़ताल करेंगे। इस बार यह छठवां आयोजन होगा। वास्तव में भारतीय विज्ञान कांग्रेस की स्थापना का विचार लविवि के प्रो. पीएस मैक मोहन और प्रो. जेएल सिमोंसेन ने ही दिया था।
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2025 तक टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य
भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। टीबी के इलाज की अवधि को अब छह महीने से कम करके दो महीने तक लाने पर भी बात हो रही है। नई दवाओं का ट्रायल चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इसे गाइडलाइन में शामिल किया जाएगा।
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नोबल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिकों के शामिल होने की उम्मीद
लविवि अब तक 1916, 1923, 1953, 1985 और 2002 में विज्ञा कांग्रेस की मेजबानी कर चुका है। इस बार के आयोजन में दुनिया भर के 20 हजार से ज्यादा वैज्ञानिक जुटने की उम्मीद हैं। इसमें नोबल पुरस्कार पाने वाले वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। यहां के शिक्षक, वैज्ञानिक और विद्यार्थियों को उनसे बातचीत करने और सुनने का अनुभव मिलेगा।
अगले माह फिर होगी बैठक
लविवि में भारतीय विज्ञान कांग्रेस की तैयारियां परखने आई टीम का तीन दिवसीय दौरा रविवार को संपन्न हो गया। इस टीम में विज्ञान कांग्रेस संघ के महाध्यक्ष प्रो. अरविंद कुमार सक्सेना, निवर्तमान महाध्यक्ष प्रो. विजयलक्ष्मी सक्सेना, पूर्व महाध्यक्ष डॉ. अशोक सक्सेना, पूर्व महाध्यक्ष डॉ. मनोज चक्रवर्ती, पूर्व महासचिव डॉ. गंगाधर व डॉ. एस रामकृष्ण, पूर्व कोषाध्यक्ष डॉ. शिवसत्य प्रकाश, डॉ. चंदेल और कोषाध्यक्ष डॉ. निवेदिता चक्रवर्ती शामिल थे। अब मई में फिर से विशेषज्ञों की टीम कांफ्रेंस की रूपरेखा तय करने के लिए बैठक करेगी।