जानिए, यूपी के सफेदपोश नेताओं की काली करतूतों के कच्चे चिट्ठे
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बसपा के पूर्व विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी से पहले भी कई नेताओं के दामन दागदार हो चुके हैं। हर बार खादी और खाकी का गठजोड़ सामने आया।
सफेदपोशों ने सत्ता की आड़ में मनमानी की कोशिश की। नियम कायदे दरकिनार कर सत्ता के करीबियों को बचाने की कोशिशें हुईं, लेकिन सलाखों के पीछे जाने से बच नहीं सके।
इस फेहरिस्त पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित, आनंद सेन यादव, विधायक अनूप संडा सरीखे लोगों का नाम शामिल है।
अमर मणि त्रिपाठी पूर्व सपा विधायक, महाराजगंज
गर्भवती होने पर मधुमिता ने अमरमणि पर शादी का दबाव डाला। तब अमरमणि ने उसे धमकाया। वह नहीं मानी तो उसका कत्ल करा दिया। पुलिस के रोजनामचे में अमरमणि की हिस्ट्रीशीट है।
योगेंद्र सागर, पूर्व बसपा विधायक बिल्सी
पिछले साल ज्योति शर्मा नाम की युवती से दुराचार के आरोपी तत्कालीन विधायक योगेंद्र सागर के प्रभाव की वजह से ही पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया।
विधायक ने उल्टे पीड़ित युवती के भाई को जेल भिजवा दिया। काफी जोर-दबाव के बाद ही मुकदमा दर्ज हुआ। वह भी अदालत के आदेश पर।
लेकिन पुलिस ने इस मामले में विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत ने इस पर नाराजगी भी जताई थी।
भगवान शर्मा सपा विधायक, डिबाई बुलंदशहर
एक रिसर्च स्कॉलर शीतल की शिकायत पर फ्रॉड, अपहरण और बलात्कार के मामले में पहले भी जेल जा चुके बसपा विधायक गुड्डू पंडित उर्फ भगवान शर्मा पर पंचायत चुनाव के दौरान बीडीसी सदस्यों के अपहरण करने का भी मुकदमा है।
उनके खिलाफ गुंडा एक्ट में भी कार्रवाई हुई। इस आरोप में उन्हें जेल जाना पड़ा था। उन पर इसके अलावा भी लोगों को धमकाने व दबाव बनाने के आरोप हैं। हालांकि, अदालत ने बाद में उन्हें आरोपों से बरी कर दिया।
अनूप संडा सपा विधायक, सुल्तानपुर
पिछले दिनों अनूप संडा पर एक ब्यूटी पार्लर संचालिका समरीन ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसे लेकर काफी हो-हल्ला मचा था। ब्यूटी पार्लर संचालिका व विधायक के परिवार के सदस्यों में इसे लेकर मारपीट भी हुई थी।
आनंद सेन यादव, पूर्व सपा विधायक, मिल्कीपुर फैजाबाद
काफी हीलाहवाली के बाद मामला दर्ज किया गया। फैजाबाद की मिल्कीपुर सीट से चुनाव लड़ने के दौरान आनंद सेन ही एक मामले में जेल में थे।
शशि अपहरण व हत्या के मामले में जहां निचली अदालत ने उन्हें सजा सुना दी थी। वहीं, उच्च अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें व महिला आरोपी सीमा आजाद को बरी कर दिया था।
राम मोहन गर्ग, तत्कालीन अध्यक्ष मत्स्य विकास निगम
एक महिला से शारीरिक संबंध बनाकर उसकी वीडियो फिल्म तैयार की और फिर इस वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर लगातार शोषण करते रहे।
पांच साल तक शोषण सहने के दौरान महिला ने कई बार आवाज उठाने की कोशिश की, पर राजनीतिक रसूख के दम पर कोई कार्रवाई नहीं होने दी। बाद में मामले के तूल पकड़ने पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की गई।