फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   India supports freedom of baluchistan.

'भारत, पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी का हिमायती'

Sun, 26 Mar 2017 01:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 26 Mar 2017 01:23 PM IST
विज्ञापन
India supports freedom of baluchistan.
बलूच नेता मीर मजदक दिलशाद खान - फोटो : amar ujala

बलूच एक स्वतंत्र राष्ट्र रहा है। देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान ने बलूच पर जबरन कब्जा कर रखा है। अब समय आ गया है कि बलूच के लोगों पर होने वाले अत्याचार पर पूरी दुनिया आवाज उठाए। यह कहना है नई सरकार के डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा का।

विज्ञापन


वे शनिवार को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि में आयोजित ‘बलूच: इतिहास, संस्कृति एवं उनकी अपेक्षाएं’ विषयक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। संगोष्ठी में कनाडा से आए बलूच नेता एवं स्वतंत्रता सेनानी मीर मजदक दिलशाद खान ने बलूच की आजादी की मांग की।
विज्ञापन


उपमुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने बलूच और भारतीय संस्कृति में समानताएं बताते हुए कहा कि भारत की तरह बलूच की संस्कृति भी समावेशी रही है, लेकिन उन पर हो रहा अन्याय व अत्याचार मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। भारत उनकी आजादी की लड़ाई का हिमायती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि इसमें मीडिया को भी अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि चीन संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के समर्थन में हाफिज सईद जैसे आतंकवादी के बचाव में वीटो का इस्तेमाल तो करता है, लेकिन बलूच नेताओं की हत्या पर चुप्पी साधे हुए हैं।

सिर्फ पांच फीसदी ही है बलूच की आबादी

India supports freedom of baluchistan.

डॉ. शर्मा ने कहा, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाईचारे की भावना से बलूच लोगों की रक्षा की जानी चाहिए। पुनर्वास विवि के कुलपति प्रो. निशीथ राय ने कहा कि यह पहली अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी है, जिसमें इतने बड़े पैमाने पर बलूच समस्या के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हो रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बलूचिस्तान की समस्या को उठाकर इसे विश्व पटल पर सामने ला दिया है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का 44 फीसदी क्षेत्रफल बलूचिस्तान में है जबकि पाकिस्तान की सिर्फ पांच फीसदी आबादी ही बलूच लोगों की है। बलूचिस्तान की जनता को सम्मानजनक तरीके से अपने बारे में फैसला लेने की आजादी होनी चाहिए।

हिंदू और बलूच लोगों के धर्म भिन्न फिर भी उनमें एकता

India supports freedom of baluchistan.

कनाडा से आए बलूच नेता एंव स्वतंत्रता सेनानी मीर मजदक दिलशाद खान ने कहा कि हिंदू और बलूच लोगों के धर्म भिन्न होने के बाद भी उनमें एकता है।

उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर की कि पाकिस्तान की कूटनीति के चलते यह विश्व समुदाय की कमजोरी है कि बलूच आजादी के मामले को संयुक्त राष्ट्र संघ के स्तर पर नहीं उठाया जाता। उन्होंने कहा कि बलूच आजाद नहीं हैं, फिर भी वह एक राष्ट्र है।

उन्होंने कहा कि हम अधिक संगठित और मजबूत हैं। यदि पाकिस्तान पाकिस्तानियों का नहीं है तो फिर बलूच लोगों का कैसे हो सकता है।

उन्होंने कहा कि हम आजाद रहे हैं, लेकिन हमें जबरदस्ती गुलाम बना दिया गया है। इसमें भारत को हमारी मदद करनी चाहिए। ऐसे में जब चीन पाकिस्तान को मजबूत कर रहा है तब भारत को चाहिए कि वह हमारी मदद करे।

बलूच लोगों के गायब होने की समस्या चिंताजनक

India supports freedom of baluchistan.

पूर्व आईएएस अधिकारी राना बनर्जी ने कहा कि बलूच लोगों को इस बात का भय है कि नई जनगणना में उनकी संख्या को कम आंक कर उन्हें कई तरह की सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बलूच लोगों के गायब होने की समस्या बेहद चिंताजनक है। बलूच समस्या का राजनीतिक समाधान जरूरी है। प्रवक्ता व कुलपति के शैक्षणिक सलाहकार प्रो. एपी तिवारी ने बताया कि संगोष्ठी के पहले दिन प्रो. लारी आजाद, अब्दुल रहमान, प्रो. के के मिश्रा समेत अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।

उन्होंने बताया कि एकेडमिक ब्लॉक-दो में बलूच इतिहास की झलकियों पर केंद्रित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका उद्घाटन कुलपति प्रो. निशीथ राय एवं मीर मजदक दिलशाद ने किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed