यूपीः अब 2500 कंपनियां आयकर के निशाने पर
काले धन को रोकन के लिए आयकर विभाग ने कमर कस ली है। इसी के तहत मनी लांड्रिंग के शक में प्रदेश की 2500 से ज्यादा कंपनियां आयकर विभाग के राडार पर आ गई हैं। आयकर विभाग ने प्रदेश की ढाई हजार से ज्यादा कंपनियों की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
इन सभी ने अपने शेयर को बाजार मूल्य से अधिक बेचकर पैसा जमा किया है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के एक अधिकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2008-09 से लेकर 2012-13 में 2628 प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों ने अपने शेयर प्रीमियम मूल्य पर बेचे हैं।
कानपुर स्थित रजिस्ट्रार ऑफ कानपुर दफ्तर से मुहैया कराई गई इस सूची में पूरे प्रदेश की कंपनियों के नाम शामिल हैं, जिनमें कानपुर शहर की लगभग तीन सौ कंपनियां जांच के दायरे में आई हैं।
इन सभी ने अपने शेयर को बाजार मूल्य से अधिक बेचकर पैसा जमा किया है। आयकर अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही इस सिलसिले में कार्रवाई का क्रम आरंभ होगा।
कालेधन को सफेद करने वालों पर गिरेगी गाज
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के एक अधिकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2008-09 से लेकर 2012-13 में 2628 प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों ने अपने शेयर प्रीमियम मूल्य पर बेचे हैं। यानी यदि उनके शेयर का वास्तविक मूल्य दस रुपये है, तो उन्होंने इससे कई गुणा ज्यादा मूल्य पर किसी अन्य कंपनी या व्यक्ति को बेचकर धन जुटाया है।
यह काम कालेधन को सफेद करने के मकसद से किया जाता है। इसकी पूरी सधी हुई प्रक्रिया होती है, जिसे लेयरिंग कहा जाता है। आयकर विभाग ने कंपनी मामलों के मंत्रालय से इस पर प्रतिरोध जताया है। उनका तर्क था कि ऐसी कंपनियां जो लिस्टेड नहीं है और उनकी कोई आर्थिक हैसियत नहीं हैं, उनके शेयर प्रीमियम (अधिक मूल्य) पर खरीदने और कम मूल्य पर बेचने को रोकना चाहिए।
नवंबर 2012 में कंपनी मामलों के मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करके नॉन लिस्टेड कंपनियों के शेयर प्रीमियम या कम मूल्य पर खरीद-बिक्री रोक लगादी थी। इसके बाद से यह कहानी बंद हो गई। इधर हाल ही में आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा-56 में संशोधन करके इस गतिविधि के जरिए होने वाली आय को कर योग्य करार दे दिया।
कुल मिलाकर यह खेल अब लगभग बंद हो चुका है। मगर इसके बंद होने के पहले जिन कंपनियों ने इस तरह से कालेधन को सफेद किया है, उन पर अब गाज गिराई जाएगी।
ऐसे होती है लेयरिंग
एक व्यक्ति नकद दस लाख रुपये (जो आयकर के हिसाब से अघोषित है यानी इस राशि पर टैक्स नहीं दिया गया है) एक बैंक खाते में जमा करता है। इस पैसे से किसी गुमनाम कंपनी के शेयर खरीदे जाते हैं। जिस कंपनी में यह पैसा पहुंचता है वह अपने जैसी ही किसी कंपनी को लोन देना दिखाकर पैसा उसके खाते में ट्रांसफर कर देती है।
इस तरह एक-दो चरण आगे बढ़ने के बाद अंत में इस रकम से उसी व्यक्ति की कंपनी के दस रुपये के शेयर सौ रुपये या इससे भी ज्यादा मूल्य देकर यानी प्रीमियम पर खरीद लिए जाते हैं।
घूम-फिरकर यह पैसा उसी व्यक्ति के पास एक नंबर में पहुंच जाता है, जिसने नकद धन लगाया था।
प्रीमियम मूल्य पर शेयर खरीदकर मनी लांड्रिंग के मामलों में आयकर विभाग उल्टी तरफ से जांच करता है। जिस कंपनी के शेयर प्रीमियम पर बिकते हैं, सबसे पहले उसे समन करके जानकारी मांगी जाती है। वह खरीदार का ब्यौरा देता है, तो उससे पैसे के बारे में पूछताछ की जाती है।
एक अधिकारी के मुताबिक चार से पांच चरण की जांच में ही स्पष्ट हो जाता है कि नकद रकम को घुमाकर यह खेल किया गया है। इस खेल में बैंक के अधिकारियों की भी पूरी तरह मिलीभगत होती है।