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कर वसूली की अनदेखी, नगर निकायों को आमदनी बढ़ाने की फिक्र नहीं, बोर्ड ने की है ये आठ कर लगाने की संस्तुति

Sat, 28 Nov 2020 12:53 PM IST
शाहरुख खान सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 28 Nov 2020 12:53 PM IST
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income situation distressing of municipal bodies in state
फाइल फोटो
प्रदेश में नगर निकायों की आय स्थिति खस्ताहाल है। मगर इसकी आय बढ़ाने की किसी को कोई फिक्र नहीं है। इसकी पुष्टि राज्य सरकार को वर्ष 2018 के जनवरी में सौंपी गई उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड (यूपीबीडीएमएफआर) की रिपोर्ट से हो रही है। 
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इसमें बोर्ड ने नगर निकायों की आय बढ़ाने और मौजूदा कर व्यवस्था में सुधार के लिए 8 तरह के कर लगाने की संस्तुति की थी। इसका अधिनियम में भी प्रावधान है। जबकि ये कर देश के 15 बड़े राज्यों में लागू हैं। इनमें से कुछ कर नगर निगमों से संबंधित हैं तो कुछ कर नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में लिए जाने का प्रावधान है। 
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नगर निकाय के अधिकारी तीन साल में बोर्ड की संस्तुतियों पर अमल नहीं कर सके, वहीं सरकार और शासन स्तर पर भी इसकी अनदेखी होती रही है। जबकि प्रदेश में सत्ता संभालने के बाद से ही योगी सरकार का राजस्व वसूली पर काफी जोर रहा है। 
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इसके मद्देनजर यूपीबीडीएमएफआर के अधिकारियों ने आय बढ़ाने के लिए कई राज्यों का भ्रमण करने के बाद 2018 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इसमें 8 कर लगाने की सिफारिश की गई थी। 
 

नगर निगमः उप्र नगर निगम अधिनियम में तीन तरह के ऐसे कर लिए जाने का भी प्रावधान है, जो अब तक किसी नगर निगम में नहीं लिया जाता है। इनमें नगर निगम सीमा क्षेत्र में उतरने वाले हेलीकॉप्टर व अन्य प्रकार के यानों पर, व्यापार व व्यवसाय पर और योजना के लिए ली जाने वाली भूमि के मूल्य वृद्धि पर परिवृद्धि कर शामिल है। बोर्ड का अनुमान है कि इन करों को लगाए जाने से नगर निगमों की आय में सालाना 3,500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। 

नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतः इस श्रेणी के निकायों में भी ऐसे 5 तरह के कर वसूलने का प्रावधान है, जिसकी वसूली नहीं हो रही है। इनमें शौचालयों व मलजनित गंदगी के निस्तारण पर सफाई कर और निकाय सीमा में चलने वाले सभी तरह के इंजन चालित वाहनों पर कर व सुधार कर शामिल हैं।

इनके अलावा निकायों की सीमा में ऐसे व्यापार पर भी कर लगाने का प्रावधान है, जिन्हें निकायों की सेवाओं का विशेष लाभ मिल रहा हो। इसी तरह ऐसी आजीविका या व्यावसायिक संस्थाओं से भी कर नहीं लिया जा रहा है, जहां काम करने वाले लोगों को फीस या वेतन का भुगतान किया जाता है।

इन राज्यों में लिए जाते हैं ये 8 कर: मध्य प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, असम, केरल, मेघालय, त्रिपुरा व सिक्किम।
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