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LS Elections : अंतिम चरण में गैर यादव ओबीसी को लेकर तेज हुई यूपी में जंग, एनडीए-इंडिया के बीच बढ़त की होड़

Wed, 29 May 2024 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 29 May 2024 05:37 AM IST
सार

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में जिन 13 सीटों पर मतदान होने जा रहा है उनमें यादवों से अधिक कुर्मी, कुशवाहा, राजभर, बिंद, चौहान, पाल, प्रजापति और निषाद समेत गैर यादव पिछड़ी जातियों की आबादी ज्यादा है।

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In the last phase, the war intensifies in UP regarding non-Yadav OBCs
सत्ता के लिए कशमकश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में जिन 13 सीटों पर मतदान होने जा रहा है उनमें यादवों से अधिक कुर्मी, कुशवाहा, राजभर, बिंद, चौहान, पाल, प्रजापति और निषाद समेत गैर यादव पिछड़ी जातियों की आबादी ज्यादा है। लिहाजा इन सीटों पर चुनावी समीकरण बनाने-बिगाड़ने में इन जातियों की बड़ी भूमिका रहती है। ऐसे में सातवें चरण के मतदान में एनडीए और इंडिया के बीच अपनी-अपनी बढ़त के लिए गैर यादव ओबीसी मत हासिल करने के लिए भी जंग होगी। इसी समीकरण को ध्यान में रखकर पक्ष और विपक्ष ने कई सीटों पर इन जातियों के उम्मीदवार उतारे हैं।  

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दोनों तरफ के प्रत्याशियों की सूची पर गौर करें तो साफ हो जाता है कि एनडीए और इंडिया ने गैर यादव ओबीसी जातियों पर खुलकर दांव लगाया है। वहीं, पिछले चुनाव में सातवें चरण की दो सीटों पर जीत दर्ज करने वाली बसपा ने भी दो सुरक्षित सीटों- बांसगांव और राॅबर्ट्सगंज को छोड़कर कई पर पिछड़ों को मैदान में उतारा है। 
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आंकड़ों के मुताबिक सातवें चरण की 13 में से सात सीटें ऐसी हैं, जहां पर एनडीए और इंडिया ने गैर यादव ओबीसी चेहरों को उतारकर इस चरण की सभी सीटों को साधने की कोशिश की है। इनमें तीन तो ऐसी हैं, जिनपर गैर यादव ओबीसी चेहरे आमने-सामने हैं। इन सीटों पर कुर्मी, बिंद, कुशवाहा और राजभर जाति के उम्मीदवार उतारे गए हैं। जबकि चार सीटों में से एनडीए ने दो पर कुर्मी और निषाद पर दांव लगाया है, तो इंडिया ने भी दो सीटों पर यही किया है। भाजपा जहां गैर यादव ओबीसी के सहारे अपने समीकरण साधने में जुटी है, तो इंडी गठबंधन भी अपने काडर वोटबैंक यादव और मुसलमान के साथ ही गैर यादव ओबीसी के सहारे बड़ी लकीर खींचने की कोशिशों में जुटा है। 
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इन तीन सीटों पर आमने-सामने हैं गैर यादव ओबीसी

  • मिर्जापुर : अनुप्रिया पटेल (अपना दल-एस) व रमेश बिंद (सपा)  
  • महराजगंज : पंकज चौधरी (भाजपा) व वीरेंद्र चौधरी (सपा)  
  • सलेमपुर  : रवींद्र कुशवाहा (भाजपा) व रमाशंकर राजभर (सपा)

मोदी के सहारे भी समीकरण साधने की कोशिश
अगर एनडीए की बात करें तो इस चरण की 13 में से दो सीट सहयोगी दल अपना दल (एस) और एक सुभासपा के खाते में है। इसके बावजूद भाजपा वाराणसी से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे बड़े पिछड़े चेहरे के तौर पर पेश कर रही है। भाजपा मोदी के सहारे ही अंतिम चरण की सभी सीटों के समीकरण को साधने की कोशिश में जुटी है। 



प्रत्याशियों के चयन में रखा समीकरणों का ख्याल
प्रत्याशियों के चयन में भी दोनों तरफ से अंतिम चरण की सीटों पर गैर यादव पिछड़ी जातियों के समीकरण का ख्याल रखा गया है। इसीलिए इन बिरादरियों के चेहरों को ही मौका दिया गया है। दोनों गठबंधनों का मानना है कि पूरब में राजनीतिक रूप से सक्रिय इन जातियों को मौका देने से इनकी उप जातियों पर भी प्रभाव पड़ेगा, जिसका फायदा चुनाव में मिल सकता है।

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