अंगदान से जुड़ी वो सारी बातें जो आप जानना चाहते हैं...
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- अंगदान देना ऐसे व्यक्ति को दिया गया तोहफा है जिसका अंग किसी बीमारी की वजह से बेकार हो चुका है और प्रत्यारोपण से उसे बदला जा सकता है।
अंगदान कितने प्रकार के होते हैं?
- दो प्रकार का
1. जीवित अंगदान : इसमें व्यक्ति अपने रक्त संबंधी को एक किडनी, पैंक्रियाज का कुछ हिस्सा, लिवर का कुछ हिस्सा दान कर सकता है।
2. मृतक का अंगदान : मृत व्यक्ति अपने कई अंग दान कर सकता है। ब्रेन डेड के मामले में यह संख्या और बढ़ जाती है।
किस उम्र तक दान कर सकते हैं?
- यह अक्सर प्रत्यारोपित किए जा रहे व्यक्ति की उम्र और अंग विशेष पर निर्भर होता है। जीवित व्यक्ति के अंगदान में उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
वहीं बोन मैरो, किडनी व लिवर के लिए अधिकतम उम्र 70 वर्ष, हृदय व फेफड़े के लिए 50 वर्ष, पैंक्रियाज के लिए 65 वर्ष, कॉर्निया के लिए 100 वर्ष हो सकती है।
आप कैसे अंगदानकर्ता बन सकते हैं
- इसके लिए केजीएमयू के मानव अंग प्रत्यारोपण विभाग में बनाई गई अंगदान यूनिट में फोन नंबर 9455120019 पर संपर्क किया जा सकता है।
दूसरा विकल्प स्पर्श वेलफेयर सोसाइटी की हेल्पलाइन नंबर 9454036899 पर संपर्क करके भी यह किया जा सकता है। इसके बदले आपको एक डोनर कार्ड मिलता है, जो अंगदान के समय आपके परिवार और परिचितों के लिए उपयोगी साबित होता।
परिवार के एक सदस्य का केजीएमयू में निशुल्क इलाज
क्या संकल्प करके ही अंगदान कर सकते हैं?
- जरूरी नहीं है। आवश्यकता होने पर आप इसके बिना भी ऐसा कर सकते हैं, लेकिन संकल्प होने से प्रक्रिया को समझना आसान होता है। वहीं मृतक द्वारा अंगदान के मामले में यह संकल्प व डोनर कार्ड उपयोगी साबित होता है।
इसके बदले क्या मिलेगा?
- मृतक का अंगदान किए जाने पर परिवार के एक सदस्य को केजीएमयू में किसी तरह की बीमारी के लिए उम्र भर निशुल्क इलाज की सुविधा दी जाती है।
कई अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं। इससे भी महत्वपूर्ण है कि किसी का जीवन बचाकर आप उसके और उसके परिवार व समाज के लिए एक मिसाल बनते हैं जिसके लिए आपको हमेशा याद रखा जाता है।
अंगदान और देह दान में कोई फर्क है?
- अंगदान में निश्चित अंग और कोशिकाएं ऐसे व्यक्ति को प्रत्यारोपित की जाती हैं जिसके जीवन पर खतरा है या उसके वे अंग बेकार हो चुके हैं।
वहीं देहदान में पूरा शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए दान दिया जाता है, जिस पर एमबीबीएस पढ़ रहे विद्यार्थियों को शरीर विज्ञान की पढ़ाई करवाई जाती है।
प्रत्यारोपण से किन बीमारियों में मदद मिलती है?
- लिवर, किडनी व हार्ट फेल, क्षतिग्रस्त फेफड़े, डायबिटीज, कॉर्निया खराब होने से आई अंधता, हार्ट वॉल्व की बीमारी, आग में झुलसे व्यक्ति (त्वचा के प्रत्यारोपण से) को मदद की जा सकती है।
केजीएमयू ही करता है श्मसान पहुंचाने की व्यवस्था
- हमारे दिमाग को ऐसा नुकसान हो जिसे ठीक नहीं किया जा सके तो उस मामले को ब्रेन डेड केस कहा जाता है। इन मामलों में व्यक्ति मर चुका होता है, लेकिन उसका हृदय कुछ समय तक खून को पंप करने का अपना काम करता रहता है, जिसे वेंटीलेटर पर कुछ और समय तक सक्रिय रखा जा सकता है।
यह कोमा से अलग है, क्योंकि कोमा में दिमाग को ऐसा नुकसान नहीं होता कि वह बेकार हो जाएगा। ब्रेन डेड को कानूनी रूप से मृत्यु के रूप में स्वीकारा जाता है।
ब्रेन डेड मामले में अगर परिवारीजन अंगदान करना चाहें तो?
- ऐसे मामले में केजीएमयू में मानव अंग प्रत्यारोपण विभाग से संपर्क किया जा सकता है। या फिर मौके पर मौजूद डॉक्टर या नर्स से भी इसके लिए कहा जा सकता है जो आगे की प्रक्रिया देखते हैं।
अंग किसे दिए जाते हैं?
- ये अंग ऐसे लोगों को प्रत्यारोपित किए जाते हैं जिनका जीवन इन अंगों के खराब होने से संकट में है या वे किसी भी समय मर सकते हैं। इन लोगों की जानकारी कानूनन अंग दान करवा रहे परिवारीजनों को नहीं दी जा सकती।
क्या आप अपने अंग किसी खास व्यक्ति को दान करने की घोषणा कर सकते हैं?
- नहीं। साथ ही आप रक्त संबंधी को तो जीवित अंगदान के तहत होने वाले अंग ही दे सकते हैं। अन्य लोगों के लिए आप न जीवित अंगदान कर सकते हैं, और न ही मृत्यु के बाद होने वाले अंग दान के लिए उन्हें चुन सकते हैं।
ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अंग प्रत्यारोपण के गैर-कानूनी व्यापार को रोका जा सके जिसमें अक्सर बेकुसूर लोगों के अंग (अधिकतर मामलों में धोखे से) अमीर और रसूखदारों को बेच दिए जाते थे।
क्या अंगदान से अंतिम संस्कार करने में कोई बाधा आती है?
- नहीं। अंदरूनी अंगों का दान किया जाता है और इनसे शरीर की दिखावट पर कोई असर नहीं होता, उसका स्वरूप भी नहीं बिगड़ता है। वहीं अंगदान करने पर केजीएमयू द्वारा ही देह को अंतिम संस्कार के लिए सूबे के किसी भी हिस्से में पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है, परिवार को इसके लिए कुछ खर्च नहीं करना पड़ता।