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'अशिक्षा के कारण हैं इस्लाम में मतभेद'
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 14 Apr 2014 04:24 AM IST
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इस्लाम को मानने वाला मुसलमान है। इसमें कोई शिया, सुन्नी, बरेलवी व देवबंदी मतभेद नहीं मिलता फिर क्यों हम यूनिटी से दूर हैं।
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मुसलमान एकजुट होकर शिक्षित समाज के लिए लड़ें और मतभेदों को दूर कर अपने फिरके को इस्लाम की नजर से देखें। यह विचार रविवार को राजधानी में आयोजित वहदत- ए- उम्मत कांफ्रेंस में देश भर से आए उलमा ने व्यक्त किए।
टीले वाली मस्जिद में वहदत- ए- इस्लामी हिन्द की ओर से आयोजित इस कांफ्रेंस में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि मुसलमान मतभेद से दूर होकर शिक्षा व उन्नति से जुड़ जाएं।
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मुसलमान अगर शिक्षा को मिशन के रूप में लें तो तमाम बुराइयां अपने आप दूर हो जाएंगी। अशिक्षा ही इस्लाम में तमाम मतभेद पैदा कर रही है।
इसके लिए मुसलमानों के अंदर की जाहिल मानसिकता को मिटाने की जरूरत है। कांफ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए मौलाना अताउर्रहमान वजदी ने कहा कि मुसलमान अलग-अलग गुट व गिरोह के बावजूद एक कुरान और एक कलमा पढ़ने वाले हैं।
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उन्हें कुरान की रोशनी में मजबूत होने की जरूरत है। बाहरी ताकतें मुसलमानों में मतभेद को साजिशन उछाल कर लड़वाती आ रही हैं।
कभी सुन्नी व शिया के नाम पर तो कभी बरेलवी व देवबंदी के नाम पर अलगाव रहता है। एकजुट होकर ही इस तरह की साजिशों को विफल किया जा सकता है।
इलाहाबाद से आए मौलाना नासिर फाखिरी ने कहा कि जो मुसलमान है वह ईमान वाला है। ईमान यानी समझ कर कोई बात मानना। समझ चुके तो फिर मतभेद की गुंजाइश कहां रह जाती है?
मौलाना हमीदुल हसन ने कहा, इस्लाम ने एक खुदा, एक कुरान, एक रसूल व एक कलमा पर जोर दिया है लेकिन मतभेद के चलते हम इसे भूल जाते हैं।
औरंगाबाद के मौलाना जियाउद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि उम्मत को उम्मत-ए-मुसलमान कहते हैं। यानी यहां तमाम तरह के लोग आए हैं लेकिन वे यहां उम्मते रसूल में एक हो गए हैं।