{"_id":"5f99caec8ebc3e9bbb18d74d","slug":"illegal-construction-and-ploting-destroyed-prabandh-nagar-yojna-lko-city-news-lko54751693","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध निर्माण, प्लॉटिंग ने बिगाड़ा प्रबंधनगर योजना का गणित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध निर्माण, प्लॉटिंग ने बिगाड़ा प्रबंधनगर योजना का गणित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अवैध निर्माण, प्लॉटिंग ने बिगाड़ा प्रबंधनगर योजना का गणित
अधिकारियों की लापरवाही एलडीए की प्रबंधनगर योजना को घाटे का सौदा बना सकती है। अवैध निर्माणों और बिना अनुमति हुई प्लॉटिंग से यहां की करीब 40 प्रतिशत जमीन अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है।
यह पूरी योजना का गणित ही बिगाड़ रही है। अर्जन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 2800 एकड़ की योजना में 40 प्रतिशत तक जमीनों के कब्जे ककौली, अल्लूनगर डिगरिया में हो चुके हैं।
घैला की जमीनों पर अभी अतिक्रमण कम है। ऐसे में एलडीए को विकसित जमीन योजना के विकास पर हुए खर्च के सापेक्ष कम मिलेगी। इसके चलते योजना के सफल होने का आकलन भी जरूरी है।
विज्ञापन
इसे लेकर अधिकारियों को भी जानकारी दी गई है जिससे नई मुआवजा दरें तय करते समय उचित फैसला लिया जा सके।
योजना में मौके की जमीनों को भी अधिग्रहण से बाहर किया गया। इससे भी असर पड़ेगा। ऐसे ही एक जमीन को बाहर कर उस पर निजी मेडिकल कॉलेज बनाया गया है।
सचिव ने बुलाई बैठक
अर्जन के प्रभारी अधिकारी पंकज कुमार ने प्रबंधनगर योजना में अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर पूरी जानकारी नए सचिव पवन गंगवार को दी है। सचिव ने इसे लेकर उन्हें बैठक बुलाने को कहा है। इसमें वित्त, इंजीनियरिंग के अधिकारी भी रहेंगे।
दाखिल-खारिज व रजिस्ट्री पर रोक
प्रबंधनगर योजना के प्रभारी अधिशासी अभियंता अजय पंवार का कहना है कि लंबे समय से यहां अवैध निर्माण और प्लॉटिंग होती रही। अब इसे बंद कराया गया है। जमीनों की नई रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज पर भी रोक लगवा दी गई है। इससे नई प्लॉटिंग और निर्माण पर अंकुश लगा है। जो निर्माण या प्लॉटिंग हुई है, उन जमीनों का क्या करना है? इसे लेकर फैसला लिया जाना है।
विज्ञापन
अधिकारियों की लापरवाही एलडीए की प्रबंधनगर योजना को घाटे का सौदा बना सकती है। अवैध निर्माणों और बिना अनुमति हुई प्लॉटिंग से यहां की करीब 40 प्रतिशत जमीन अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है।
यह पूरी योजना का गणित ही बिगाड़ रही है। अर्जन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 2800 एकड़ की योजना में 40 प्रतिशत तक जमीनों के कब्जे ककौली, अल्लूनगर डिगरिया में हो चुके हैं।
विज्ञापन
घैला की जमीनों पर अभी अतिक्रमण कम है। ऐसे में एलडीए को विकसित जमीन योजना के विकास पर हुए खर्च के सापेक्ष कम मिलेगी। इसके चलते योजना के सफल होने का आकलन भी जरूरी है।
विज्ञापन
इसे लेकर अधिकारियों को भी जानकारी दी गई है जिससे नई मुआवजा दरें तय करते समय उचित फैसला लिया जा सके।
योजना में मौके की जमीनों को भी अधिग्रहण से बाहर किया गया। इससे भी असर पड़ेगा। ऐसे ही एक जमीन को बाहर कर उस पर निजी मेडिकल कॉलेज बनाया गया है।
सचिव ने बुलाई बैठक
अर्जन के प्रभारी अधिकारी पंकज कुमार ने प्रबंधनगर योजना में अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर पूरी जानकारी नए सचिव पवन गंगवार को दी है। सचिव ने इसे लेकर उन्हें बैठक बुलाने को कहा है। इसमें वित्त, इंजीनियरिंग के अधिकारी भी रहेंगे।
दाखिल-खारिज व रजिस्ट्री पर रोक
प्रबंधनगर योजना के प्रभारी अधिशासी अभियंता अजय पंवार का कहना है कि लंबे समय से यहां अवैध निर्माण और प्लॉटिंग होती रही। अब इसे बंद कराया गया है। जमीनों की नई रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज पर भी रोक लगवा दी गई है। इससे नई प्लॉटिंग और निर्माण पर अंकुश लगा है। जो निर्माण या प्लॉटिंग हुई है, उन जमीनों का क्या करना है? इसे लेकर फैसला लिया जाना है।