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Lucknow News: विशेष परमिट लेकर पांच साल से सवारियां ढो रही थी डग्गामार बस, सीज
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इसी बस में हो रही थी डग्गामारी।
लखनऊ। मेलों-धार्मिक आयोजनों के नाम पर विशेष परमिट लेकर पांच साल से डग्गामार बस सवारियां ढो रही थी। शनिवार को यह बस मड़ियांव में परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्ते के हत्थे चढ़ गई। बस सीज कर दी गई है। जांच में पता चला कि बस मालिक ने 182 बार स्पेशल परमिट लिए। 135 चालान भी हैं, जिसमें सिर्फ 25 ही जमा किए गए हैं।
बस संख्या यूपी 30 टी 3387 लखनऊ से लखीमपुर खीरी और सीतापुर के लिए प्रतिदिन चलती थी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी आलोक यादव ने बताया कि बस का नियमित परमिट वर्ष 2021 में ही खत्म हो चुका था। यह बस पांच साल से बिना नियमित परमिट के चल रही थी। बस मालिक विशेष परमिट का उपयोग यात्रियों को ढोने के लिए कर रहा था, जो नियमों के खिलाफ है। परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पांच साल में 182 विशेष परमिट जारी हुए, पर उनकी जांच नहीं की गई। विशेष परमिट में स्वत: स्वीकृति की व्यवस्था भी है। 135 चालानों में से 110 जमा नहीं हुए, फिर भी परमिट जारी होते रहे।
विशेष परमिट के नियम
अधिकारी विशेष परमिट को अस्थायी परमिट भी कहते हैं। यह मेलों, धार्मिक आयोजनों, त्योहारों या सांस्कृतिक उत्सवों के लिए जारी होता है। निजी बुकिंग, शादी बरात, शैक्षणिक टूर और तीर्थयात्रा के लिए भी इसका उपयोग होता है। यह परमिट एक दिन से लेकर दो हफ्ते तक के लिए जारी किया जा सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल नियमित यात्रियों को ढोने के लिए नहीं किया जा सकता।
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फर्जी परमिट से हुआ था खेल, एसटीएफ जांच बैठी थी
गत वर्ष जुलाई में भारत-नेपाल सीमा पर जाली परमिट से अवैध संचालन का मामला सामने आया। तत्कालीन परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने विशेष कार्य बल से जांच कराने को कहा था। जांच में बागपत, अलीगढ़ और महराजगंज में जाली परमिट की पुष्टि हुई। गोरखपुर, इटावा और औरैया में भी ऐसे परमिट मिले जो भारत-नेपाल यात्री परिवहन समझौता का उल्लंघन कर रहे थे।
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बस संख्या यूपी 30 टी 3387 लखनऊ से लखीमपुर खीरी और सीतापुर के लिए प्रतिदिन चलती थी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी आलोक यादव ने बताया कि बस का नियमित परमिट वर्ष 2021 में ही खत्म हो चुका था। यह बस पांच साल से बिना नियमित परमिट के चल रही थी। बस मालिक विशेष परमिट का उपयोग यात्रियों को ढोने के लिए कर रहा था, जो नियमों के खिलाफ है। परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पांच साल में 182 विशेष परमिट जारी हुए, पर उनकी जांच नहीं की गई। विशेष परमिट में स्वत: स्वीकृति की व्यवस्था भी है। 135 चालानों में से 110 जमा नहीं हुए, फिर भी परमिट जारी होते रहे।
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विशेष परमिट के नियम
अधिकारी विशेष परमिट को अस्थायी परमिट भी कहते हैं। यह मेलों, धार्मिक आयोजनों, त्योहारों या सांस्कृतिक उत्सवों के लिए जारी होता है। निजी बुकिंग, शादी बरात, शैक्षणिक टूर और तीर्थयात्रा के लिए भी इसका उपयोग होता है। यह परमिट एक दिन से लेकर दो हफ्ते तक के लिए जारी किया जा सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल नियमित यात्रियों को ढोने के लिए नहीं किया जा सकता।
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फर्जी परमिट से हुआ था खेल, एसटीएफ जांच बैठी थी
गत वर्ष जुलाई में भारत-नेपाल सीमा पर जाली परमिट से अवैध संचालन का मामला सामने आया। तत्कालीन परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने विशेष कार्य बल से जांच कराने को कहा था। जांच में बागपत, अलीगढ़ और महराजगंज में जाली परमिट की पुष्टि हुई। गोरखपुर, इटावा और औरैया में भी ऐसे परमिट मिले जो भारत-नेपाल यात्री परिवहन समझौता का उल्लंघन कर रहे थे।

इसी बस में हो रही थी डग्गामारी।

इसी बस में हो रही थी डग्गामारी।