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Law and Order : कमिश्नरेट के अफसर समय से न पहुंचते तो पूरे कानपुर में फैल सकता था दंगा
Fri, 10 Jun 2022 06:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 10 Jun 2022 06:20 AM IST
सार
जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर कई बार दिक्कतें होती हैं। मगर पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने पर पुलिस अधिकारी ही मातहतों को सीधे निर्देश देते हैं। दरअसल पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद कानून-व्यवस्था से जिला प्रशासन का दखल खत्म हो जाता है। वहां पूरी पावर पुलिस को दे दी जाती है।
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कानपुर हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में बीते शुक्रवार को हुई हिंसा पूरे शहर में फैल सकती थी लेकिन महज 10 मिनट में पुलिस आयुक्त मौके पर पहुंच गए और संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त व अन्य अधिकारियों को भी बुला लिया गया। जब दंगाई गलियों में घुसे तो उन्हें डेढ़ घंटे में काबू कर लिया गया। ऐसे में अगर वहां पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली न होती तो दंगाइयों को काबू करने में परेशानी हो सकती थी।
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जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर कई बार दिक्कतें होती हैं। मगर पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने पर पुलिस अधिकारी ही मातहतों को सीधे निर्देश देते हैं। दरअसल पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद कानून-व्यवस्था से जिला प्रशासन का दखल खत्म हो जाता है। वहां पूरी पावर पुलिस को दे दी जाती है।
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कानपुर में हिंसा के दौरान खुद एडीजी रैंक के पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीना, आईजी रैंक के अफसर संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था आनंद प्रकाश तिवारी और एसपी रैंक के दो पुलिस उपायुक्त मौके पर पहुंच गए। मौके पर जिलाधिकारी नेहा शर्मा और अपर जिलाधिकारी भी पहुंचे। दंगे की आग फैलती उससे पहले ही अधिकारियों को जिम्मेदारी बांटकर उसे शांत कर दिया गया। इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग भी किया। चंद मिनटों में ही मुख्य सड़कों से दंगाइयों को खदेड़ दिया। दंगाई गली में घुसकर पत्थर चलाने लगे तो उसे भी कम समय में ही काबू कर लिया गया।
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अगर पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू न होती तो यहां केवल एसएसपी रैंक का एक अफसर होता और अपर पुलिस अधीक्षक होते। वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचने में समय लगना तय था और तब तक हालात बेकाबू हो सकते थे। अब उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है, जिनकी लापरवाही से हिंसा हुई।
चौकी इंचार्ज से लेकर सीओ तक पर कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि कानपुर हिंसा मामले में चौकी इंचार्ज से लेकर सीओ तक पर कार्रवाई की तैयारी है। ये मौके की नजाकत नहीं भांप सके। विरोध प्रदर्शन नहीं किए जाने की सूचना के बाद भी लोग सड़कों पर उतर जाएंगे, इसकी जानकारी नहीं जुटा सके थे। इतना ही नहीं कितनी फोर्स की जरूरत होगी, कहां-कहां ड्यूटी लगाई जाए आदि की कोई तैयारी नहीं की गई। अब इसकी जवाबदेही तय की जाएगी। शासन को इस संबंध में रिपोर्ट मिल गई है। शुक्रवार देर शाम तक लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
लखनऊ में हिंसा रोकने के लिए उतारना पड़ा था डीजीपी को
दिसंबर 2019 में सीएए व एनआरसी को लेकर प्रदर्शन चल रहा था। उस वक्त पूरी जानकारी होने के बावजूद कई घंटे तक लखनऊ की सड़कों पर दंगाई उपद्रव करते रहे। यहां हिंसा को रोकने के लिए पहली बार तत्कालीन डीजीपी ओम प्रकाश सिंह, तत्कालीन एडीजी कानून व्यवस्था पीवी रामाशास्त्री और लगभग एक दर्जन एडीजी व आईजी रैंक के अफसरों को उतारना पड़ा था।
नमाज को लेकर आज प्रदेश भर में सतर्कता
डीजीपी मुख्यालय ने शुक्रवार की नमाज के मद्देनजर प्रदेश भर में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। एडीजी कानून-व्यवस्था ने बताया कि माहौल खराब करने वालों से सख्ती से निपटने के लिए कहा गया है, चाहे वह किसी भी संप्रदाय का हो। पुलिस धर्म गुरुओं से बात कर रही है और अराजक तत्वों पर नजर भी रख रही है।
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा कानपुर में देखने को मिला। वहां अगर कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर न पहुंचे होते तो स्थिति को नियंत्रित करने में समय लगता।
-प्रशांत कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था