लखनऊ। लोकायतन संस्था की ओर से अलीगंज स्थित कौशल विकास मिशन सभागार में सोमवार को काव्य कौशलम का आयोजन किया गया जिसमें कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया। शायर शकील आजमी ने पढ़ा- ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर, बारिशें हों तो भीग जाया कर, कौन कहता है दिल मिलाने को, कम से कम हाथ तो मिलाया कर।
हास्य व्यंग्य कवि पंकज प्रसून ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने सुनाया- हम सोशल मीडिया के झूले में कुछ इस तरह से झूल रहे हैं, पासवर्ड तो याद है पर पड़ोसी को भूल रहे हैं। कवयित्री शिखा श्रीवास्तव ने शृंगार रस में रचना सुनाई - हर एक सपना सच होगा ये आस जरूरी है, सीता हो तो राम के संग वनवास जरूरी है, चाहे जितनी दूरी हो पर रिश्तों की ख़ातिर, तुम मेरे हो मन में ये विश्वास जरूरी है। आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम ने गजल पढ़ी- हंसी है रात फजाओं में रोशनी कम है, मुझे गले से लगाओ के जिंदगी कम है। वहीं लोकायतन की अध्यक्ष व आयोजन की संयोजक मालविका हरिओम ने सुनाया- हर कोई हालात से मजबूर है, जिसको समझो पास वो ही दूर है।