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अब यूपी में 300 किलो सोने के भंडार का मिला नया पता

Wed, 03 Jun 2015 11:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 03 Jun 2015 11:08 AM IST
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huge amount of gold found in sonbhadra

सोनभद्र में 300 किलोग्राम का स्वर्ण भंडार मिला है। यह 1.2 किमी लंबा व 15.5 मीटर चौड़ा व 18 मीटर गहराई क्षेत्र में है।

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सहायक भूवैज्ञानिक डॉ. प्रकाश लाल ने बताया कि इस स्वर्ण भंडार का मिलना कई मायने में अहम है। डॉ. लाल ने यह जानकारी खनन कर्मियों के सम्मान समारोह में दी।

प्रमुख सचिव भू-तत्व एवं खनिकर्म डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि सरकार अवैध खनन पर अंकुश के लिए नियमों में बदलाव करने जा रही है।

अब तक अवैध खनन सामग्री के साथ पकड़े जाने पर वाहन पर जुर्माना लगा दिया जाता था। अब उस पट्टाधारक पर भी कार्रवाई होगी। इसके अलावा बिना परमिट के सामग्री पकड़े जाने पर सरकारी संपत्ति की चोरी की एफआईआर दर्ज होगी।
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परिवहन प्रपत्र एमएम-11 व प्रपत्र-सी का दुरुपयोग रोकने के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। इससे पता किया जा सकेगा कि कोई परिवहन प्रपत्र किस जिले में किस पट्टाधारक को किस वाहन के लिए जारी किया गया है।

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46 खनिज चौकियां खुलेंगी

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प्रमुख सचिव ने बताया कि विभाग के पास 32 करोड़ का बजट है जिसमें साढ़े 29 करोड़ वेतन पर ही खर्च हो जाता है। फील्ड स्टाफ की इतनी कमी है कि एक-एक खनन अधिकारी के पास चार-चार जिले का प्रभार है।

अब हर जिले में कम से कम एक खान निरीक्षक, 32 खनिज बहुल जिलों में एक-एक खान अधिकारी और चार महत्वपूर्ण जिलों में ज्येष्ठ खान अधिकारी तैनात होंगे। अवैध खनन एवं परिवहन पर रोकथाम के लिए 46 खनिज चौकियां स्थापित की जाएंगी।

प्रमुख सचिव गुरदीप सिंह ने बताया कि अभी मिट्टी खोदने के लिए नक्शा पास कराने के बाद भी लेखपाल से लेकर एसडीएम तक से जांच होती है।

ऐसे रुकेगा अवैध खनन

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नई व्यवस्था के तहत मिट्टी खोदने के लिए नक्शा पास कराने के बाद लेखपाल से एसडीएम तक की जांच की जरूरत नहीं होगी।

खनन निदेशक भाष्कर उपाध्याय ने बताया कि 2014-15 में 1100 करोड़ राजस्व वसूली का लक्ष्य था, 1029 करोड़ की वसूली की गई। यह 2013-14 से 117 करोड़ ज्यादा है।

बताया गया कि अवैध खनन रोकने के लिए सेटेलाइट से प्राप्त मानचित्र व रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। खनन पट्टा क्षेत्र के मैप का डिजिटाइजेशन भी किया जाएगा।

मिर्जापुर में रिमोट सेंसिंग तकनीक के उपयोग के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है। परमिट सिस्टम भी दो महीने में कंप्यूटराइज्ड कर दिया जाएगा।

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