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अप्रैल मई में बेडों का अकाल अब मरीजों से मुक्त अस्पताल
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सीतापुर। सीतापुर जिला कोरोना मुक्त संक्रमण की ओर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। भले ही अभी जिले में एक्टिव मामले आ रहे है, लेकिन जिले के कोविड अस्पताल मरीजों से मुक्त हो गए हैं। गंभीर मरीजों के लिए जिले के चार कोविड अस्पतालों के बेड पूरी तरह से खाली हो गए हैं। इन अस्पतालों में एक भी मरीज नहीं भर्ती है। जिले में कोई भी गंभीर मरीज नहीं बचा है। जिले में बचे संक्रमित मरीजों में हल्के लक्षण हैं। इसी वजह से होम आइसोलेट कर दिया गया है। जिले में केवल 75 सक्रिय मामले बचे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है, जल्द ही जिला संक्रमण को हराकर अपनी पटरी पर लौट आएगा।
कोरोना की दूसरी लहर ने हम सभी को परेशान करके रख दिया था। मौतों की बढ़ती तादाद सैकड़ों में पॉजिटिव होते लोग हर कोई को विचलित कर रहा था। अप्रैल व मई माह के दिन शायद ऐसा कोई हो, जो अपनी जिंदगी में याद न रखे। अपने को बचाने के लिए जद्दोजहद जारी रहती थी। अप्रैल व मई माह में कोविड अस्पतालों में एक-एक बेड की मारामारी मची थी। चाहे ऑक्सीजन की बात हो या बेड हासिल करने की, छोटे से लेकर बड़े अफसरों की सिफारिशें किया करते थे।
मंगलवार को जिले के सभी चार कोविड अस्पताल मरीजों से मुक्त हो गए है। सिर्फ एक गंभीर मरीज जिला अस्पताल के एलटू में भर्ती था। वह भी स्वस्थ होकर अपने घर को लौट गया है। जबकि जिले में जिला अस्पताल का एलटू, सीएचसी खैराबाद का एलटू, हिंद अस्पताल अटरिया व गर्भवती के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती की सुविधा थी। इन जगहों पर अप्रैल माह में तमाम मरीज भर्ती थे। सबसे अधिक मरीज जिला अस्पताल में एलटू में हुए।
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भर्ती मरीजों का आंकड़ा करीब 65 पहुंच गया था। नए कोविड अस्पताल बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। लेकिन लॉकडाउन व कोविड प्रोटोकॉल का पालन करके हम लोगों से कोरोना पर काबू पा लिया है। अब थोड़ा सी कसक रह गई है। वह भी जल्द दूर होने वाली है। जिले में दो हजार का आंकड़ा पार करने वाले एक्टिव केस महज 75 पर आकर सिमट गए है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है ऐसे ही हम लोगों ने प्रोटोकॉल का पालन किया तो जल्द ही जिला कोरोना संक्रमण से मुक्त हो जाएगा।
नए विकल्प के तय हो गए थे स्थान
अप्रैल में कोरोना अपने पीक समय पर था। अस्पतालों के बेड फुल हो रहे थे। यहां तक की लखीमपुर, लखनऊ के मरीज सीतापुर में भर्ती होने आ रहे थे। इस पर स्वास्थ्य महकमे ने नए कोविड अस्पताल बनाने की कवायद शुरू कर दी थी। पहले सीएचसी पिसावां, सीएचसी सिधौली व बीसीएम अस्पताल को चुन लिया था। लहरपुर में एक प्राइवेट अस्पताल को अधिग्रहण कर लिया था। इन जगहों पर स्टॉफ की तैनाती भी हो गई थी। लेकिन हालात जब सुधरने लगे तो नए चिन्हित अस्पतालों को शुरू करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। ऐसे में यह अस्पताल कोविड मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सके।
जल्द शुरू होगा ऑक्सीजन प्लांट
कोरोनाकाल में सबसे अधिक मारामारी ऑक्सीजन की रही। एक-एक ऑक्सीजन सिलेंडर 15 से 20 हजार रूपये में बिका। इस पर केंद्र सरकार ने जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का निर्णय लिया था। इस प्लांट का ढांचा तैयार हो गया है। बस मशीनें लगना बाकी है। उम्मीद है इस सप्ताह यहां पर मशीन लग जाएगी। अगले सप्ताह ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो जाएगा।
चार और कोरोना संक्रमित मिले
जिले में कोरोना का संक्रमण अब अंतिम पायदान पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मंगलवार को महज चार लोग संक्रमित मिले है। इन मरीजों में कोविड के हल्के लक्षण मिले है। इसलिए होम आइसोलेट कर दिया गया है। जिले में कोरोना से 174 लोगों की मौत हुई है।
खाली हो गए है अस्पताल
जिले के सभी अस्पताल मंगलवार को कोरोना मरीजों से खाली हो गए है। लेकिन कोई अस्पताल बंद नहीं किया गया है। अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो उसको भर्ती करने की सुविधा रहेगी। डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ
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कोरोना की दूसरी लहर ने हम सभी को परेशान करके रख दिया था। मौतों की बढ़ती तादाद सैकड़ों में पॉजिटिव होते लोग हर कोई को विचलित कर रहा था। अप्रैल व मई माह के दिन शायद ऐसा कोई हो, जो अपनी जिंदगी में याद न रखे। अपने को बचाने के लिए जद्दोजहद जारी रहती थी। अप्रैल व मई माह में कोविड अस्पतालों में एक-एक बेड की मारामारी मची थी। चाहे ऑक्सीजन की बात हो या बेड हासिल करने की, छोटे से लेकर बड़े अफसरों की सिफारिशें किया करते थे।
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मंगलवार को जिले के सभी चार कोविड अस्पताल मरीजों से मुक्त हो गए है। सिर्फ एक गंभीर मरीज जिला अस्पताल के एलटू में भर्ती था। वह भी स्वस्थ होकर अपने घर को लौट गया है। जबकि जिले में जिला अस्पताल का एलटू, सीएचसी खैराबाद का एलटू, हिंद अस्पताल अटरिया व गर्भवती के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती की सुविधा थी। इन जगहों पर अप्रैल माह में तमाम मरीज भर्ती थे। सबसे अधिक मरीज जिला अस्पताल में एलटू में हुए।
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भर्ती मरीजों का आंकड़ा करीब 65 पहुंच गया था। नए कोविड अस्पताल बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। लेकिन लॉकडाउन व कोविड प्रोटोकॉल का पालन करके हम लोगों से कोरोना पर काबू पा लिया है। अब थोड़ा सी कसक रह गई है। वह भी जल्द दूर होने वाली है। जिले में दो हजार का आंकड़ा पार करने वाले एक्टिव केस महज 75 पर आकर सिमट गए है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है ऐसे ही हम लोगों ने प्रोटोकॉल का पालन किया तो जल्द ही जिला कोरोना संक्रमण से मुक्त हो जाएगा।
नए विकल्प के तय हो गए थे स्थान
अप्रैल में कोरोना अपने पीक समय पर था। अस्पतालों के बेड फुल हो रहे थे। यहां तक की लखीमपुर, लखनऊ के मरीज सीतापुर में भर्ती होने आ रहे थे। इस पर स्वास्थ्य महकमे ने नए कोविड अस्पताल बनाने की कवायद शुरू कर दी थी। पहले सीएचसी पिसावां, सीएचसी सिधौली व बीसीएम अस्पताल को चुन लिया था। लहरपुर में एक प्राइवेट अस्पताल को अधिग्रहण कर लिया था। इन जगहों पर स्टॉफ की तैनाती भी हो गई थी। लेकिन हालात जब सुधरने लगे तो नए चिन्हित अस्पतालों को शुरू करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। ऐसे में यह अस्पताल कोविड मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सके।
जल्द शुरू होगा ऑक्सीजन प्लांट
कोरोनाकाल में सबसे अधिक मारामारी ऑक्सीजन की रही। एक-एक ऑक्सीजन सिलेंडर 15 से 20 हजार रूपये में बिका। इस पर केंद्र सरकार ने जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का निर्णय लिया था। इस प्लांट का ढांचा तैयार हो गया है। बस मशीनें लगना बाकी है। उम्मीद है इस सप्ताह यहां पर मशीन लग जाएगी। अगले सप्ताह ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो जाएगा।
चार और कोरोना संक्रमित मिले
जिले में कोरोना का संक्रमण अब अंतिम पायदान पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मंगलवार को महज चार लोग संक्रमित मिले है। इन मरीजों में कोविड के हल्के लक्षण मिले है। इसलिए होम आइसोलेट कर दिया गया है। जिले में कोरोना से 174 लोगों की मौत हुई है।
खाली हो गए है अस्पताल
जिले के सभी अस्पताल मंगलवार को कोरोना मरीजों से खाली हो गए है। लेकिन कोई अस्पताल बंद नहीं किया गया है। अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो उसको भर्ती करने की सुविधा रहेगी। डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ