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कभी यहां आराम फरमाते थे वाजिद अली शाह
टीम डिजिटल
Updated Mon, 16 Sep 2013 03:26 PM IST
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छतर मंजिल लखनऊ का ऐतिहासिक भवन है जिसका निर्माण कार्य नवाब गाजीउद्दीन हैदर ने शुरू करवाया था।
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उनकी मौत के बाद नवाब नासिरुद्दीन हैदर ने इसे पूरा कराया। दो मंजिली इमारत का मुख्य कक्ष दुमंजिला है जिसके उपर एक विशाल सुनहरी छतरी है जो दूर से ही नजर आती है।
इसी सुनहरी छतरी के कारण ही इस भवन का नाम छतर मंजिल पड़ा। आज के समय में इस इमारत में केंद्रीय औषधि संस्थान का कार्यालय है।
इतिहासकारों और जानकारों का मानना है कि इस इमारत का निर्माण 1810 के आस-पास छतर कुवंर की याद में करवाया गया था।
सआदत अली खान की मौत के बाद उनके बेटे गाजीउद्दीन हैदर ने इस इमारत के निर्माण कार्य को पूरा करवाया। फरहत बख्स पैलेस का निर्माण मूल रूप से फ्रांसीसी जनरल क्लाउड मार्टिन ने करवाया था।
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इसके निर्माण में जितनी भी लकड़ी लगी उसके लिए गोमती नदी के किनारे लगे पेड़ को काटा गया था। कहा जाता है कि छतर मंजिल का पूरा निर्माण 1781 में हो गया था और 1800 तक मार्टिन आखिरी सांस तक इसी में रहे।
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लोगों का कहना है कि उनको कांस्टेंटिया में सुपुर्द-ए-खाक किया गया जो जिसे आज लामार्टीनियर ब्वायज कॉलेज के नाम से जानते हैं।
नवाबों का आवासीय भवन था छतर मंजिल
छतर मंजिल अवध के नवाब वाजिद अली शाह की 1847-1856 तक आवासीय भवन हुआ करती थी। इसके बाद नवाबों का आवासीय क्षेत्र कैसरबाग हो गया जिसे ‘कसर-ए-सुल्तान’ राजा का महल भी कहा जाता था।
इसके अलावा नवाब सआदत अली खान ने बारादरी को कोर्ट (न्यायालय) और चीना बाजार के रूप में विकसित किया जो फरहत बख्स से काफी नजदीक थी। इनके पुत्र गाजीउद्दीन हैदर को अवध का पहले राजा के रूप में राज्याभिषेक किया गया।
फरहत बख्स के किनारे मूर्तियों और फूलों की क्यारियां उसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती थी जिसे गुलिस्तान-ए-इरम (गार्डेन ऑफ पैराडाइज) के नाम से जाना जाता था। इसी फूल के बगीचे के सामने कोठी का निर्माण कराया गया था जिसे दर्शन बिलास के नाम से जाना जाता था।
क्या कहने इंडो इटेलियन स्टाइल के
फरहत बख्स पैलेस या छतर मंजिल का निर्माण इंडो इटैलियन स्टाइल में बना है। गोमती नदी के किनारे बसे इस भवन पर प्राकृतिक छाया इसको और सुंदर बनाती है। हाल ही में छतर मंजिल पर प्रदूषण का प्रभाव पडऩे के बाद पुरातत्व विभाग ने इसके संरक्षण का जिम्मा उठाया है।
CDRI का बना ऑफिस
आजादी के बाद फरहत बख्स और छतर मंजिल को केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान को दे दिया गया जिसमें संस्थान का कार्यालय संचालित किया गया जो आज अपने नवीन भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है।
छोटा छतर मंजिल जिसमें राज्य सरकार का दफ्तर हुआ करता था वो 1960 के दशक में अचानक ढह गया था।