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हाईकोर्ट का फैसला: एससी बनकर नौकरी करने वाली मुस्लिम महिला की बर्खास्तगी सही
Sat, 18 Dec 2021 03:11 PM IST
ishwar ashish
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 18 Dec 2021 03:11 PM IST
सार
21 साल तक अनुसूचित जाति की महिला बनकर नौकरी करने के मामले में हाईकोर्ट ने महिला की बर्खास्तगी को सही ठहरायाते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
विस्तार
इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 21 साल से ज्यादा समय तक अनुसूचित जाति कोटे से नौकरी कर रही एक मुस्लिम महिला की बर्खास्तगी को सही ठहराया है। महिला प्रधानाचार्या पद पर प्रमोशन भी पा चुकी है। कोर्ट ने कहा कि महिला द्वारा की गई धोखाधड़ी से उसकी नियुक्ति ही निरस्त हो जाती है।
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न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने यह फैसला मुन्नी रानी की याचिका को खारिज कर सुनाया। महिला ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरदोई के दो जुलाई 2021 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिससे याची की सहायक अध्यापिका के पद पर नियुक्ति को निरस्त करते हुए उसकी सेवाओं को समाप्त कर दिया गया था।
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मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जब याची के सर्विस रिकॉर्ड को तलब किया तो पाया कि याची को 30 नवंबर 1999 को सहायक अध्यापिका के पद पर नियुक्ति मिली थी। याची ने खुद को अनुसूचित जाति से संबंधित बताते हुए जाति प्रमाण पत्र भी लगाया था। वर्ष 2004 में उसे प्रधानाचार्या के पद पर प्रोन्नति भी मिल गई। एक व्यक्ति ने हरदोई के डी एम को शिकायत भेज कर कहा कि याची मुस्लिम समुदाय से है। उसकी सर्विस बुक में भी उसका मजहब इस्लाम लिखा है।
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मामले की जांच में पाया गया कि जाति प्रमाण पत्र पांच नवंबर 1995 को तहसीलदार सदर लखनऊ ने जारी किया है। वहीं याची के आवेदन पत्र में उसकी जाति ‘अंसारी’ लिखी हुई थी। बावजूद इसके कूटरचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर याची ने नौकरी प्राप्त कर ली। अदालत ने याची को सेवा से बर्खास्त करने के आदेश को सही करार देकर याचिका खारिज कर दी।