हाईकोर्ट ने बताई एसडीएम को हद, आदेश का पालन करें न कि टिप्पणी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का कहना है कि आईएएस अधिकारी का काम हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करना है, न कि आदेशों पर टिप्पणी या व्याख्या करना।
हाईकोर्ट में दायर एक याचिका पर दिए अंतरिम निर्णय पर गोंडा के एसडीएम अविनाश कुमार द्वारा कार्रवाई न करते हुए उसे ‘ठंडे बस्ते’ में डालने के जवाब पर खंडपीठ ने प्रशासनिक अधिकारियों को उनकी हद समझाते हुए बुधवार को यह बात कही।
गोंडा में राशन की दुकान चलाने वाले संजीव कुमार ने यह याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया था कि प्रशासन ने उनका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया। इस पर उन्होंने आयुक्त के पास अपील की थी, इसे स्वीकार तो कर लिया गया लेकिन 4 अप्रैल को उन्होंने कोई भी अंतरिम आदेश या लाइसेंस का निलंबन अंतिम आदेश तक के लिए रोकने से इनकार कर दिया। इस पर संजीव ने याचिका दायर की।
इसका निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस शबीहुल हसनैन ने 18 मई को उप आयुक्त (खाद्य) देवीपाटन को याचिकाकर्ता की अपील पर दो महीने में अंतिम निर्णय लेने के निर्देश दिए।
एसडीएम ने दिया ये आदेश
नई याचिका में संजीव ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने एसडीएम और उप आयुक्त दोनों को 24 मई को हाईकोर्ट के निर्णय के बारे में बताया, इसके बावजूद अपील पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
वहीं एसडीएम ने दो पुराने अदालती मामलों के आधार पर याचिकाकर्ता को जवाब दिया कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेशों की वजह से पुराने आदेश (लाइसेंस निलंबन का आदेश) का प्रभाव खत्म नहीं हो जाता।
इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस राघवेंद्र कुमार की खंडपीठ ने बुधवार को दिए आदेश में कहा कि एसडीएम की यह धारणा हाईकोर्ट के 18 मई को दिए आदेश को 18 जुलाई तक के लिए ‘ठंडे बस्ते’ में डालने जैसा है। एसडीएम के अनुसार तो यह आदेश दो महीने के लिए ‘सुप्त अवस्था’ में रहेंगे।