{"_id":"69f90ece620ba8146f0d9e80","slug":"high-court-strict-on-traffic-jam-near-schools-lucknow-news-c-13-lko1025-1722920-2026-05-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: स्कूलों के पास ट्रैफिक जाम पर हाईकोर्ट सख्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: स्कूलों के पास ट्रैफिक जाम पर हाईकोर्ट सख्त
विज्ञापन
हाईकोर्ट।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ । हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के स्कूलों के पास ट्रैफिक जाम होने पर नाराजगी व्यक्त कर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पहले के आदेशों का पालन न होने पर संबंधित अफसरों समेत स्कूलों को कड़ी फटकार लगाई है । कोर्ट ने कहा कि इस समस्या के समाधान को न तो सरकारी अधिकारी गंभीरता से ले रहे हैं और न ही स्कूलों के प्रबंधन ने इसमें रुचि दिखाई है। यह भी टिप्पणी की कि पिछले आदेश के बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है।
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि इस मुद्दे पर हुई पिछली बैठक को अधिकारियों और स्कूलों दोनों ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने यह भी बताया कि कई सक्षम अधिकारी बैठक में अनुपस्थित थे, जबकि स्कूलों की ओर से ऐसे प्रतिनिधि आए थे जो निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे। इस पर न्यायालय ने असंतोष व्यक्त किया।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह स्कूलों को उनके आसपास के यातायात प्रबंधन के लिए जिम्मेदार बनाने हेतु कुछ दिशानिर्देश तैयार करने के राज्य के प्रस्ताव को सरकार के विभिन्न विभागों के साथ-साथ लखनऊ के विभिन्न स्कूलों में भी प्रसारित करे। जिससे कि सभी स्कूलों के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देशों को वे पढ़कर अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे इन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देते समय उनपर विचार करके अनुमोदित किया जा सकेगा।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में आया कि ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए प्रशिक्षित किए गए मार्शलों की अधिकांश स्कूलों में ठीक से तैनाती नहीं की गई है, जिससे स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है। ओर ने कहा कि पर्याप्त समय देने के बाद भी सुधार न होना अधिकारियों और संबंधित पक्षों की उदासीनता को दर्शाता है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजवराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया। इसमें प्रदेश के स्कूलों की सुरक्षा समेत राजधानी के स्कूलों के पास ट्रैफिक समस्या का मुद्दा उठाया गया है।
इससे पहले, अदालत ने लखनऊ के कई स्कूलों के खुलने और बंद होने के समय के दौरान यातायात जाम पर चिंता व्यक्त की थी और राज्य के अधिकारियों को सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 मई को तय की है।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि इस मुद्दे पर हुई पिछली बैठक को अधिकारियों और स्कूलों दोनों ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने यह भी बताया कि कई सक्षम अधिकारी बैठक में अनुपस्थित थे, जबकि स्कूलों की ओर से ऐसे प्रतिनिधि आए थे जो निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे। इस पर न्यायालय ने असंतोष व्यक्त किया।
विज्ञापन
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह स्कूलों को उनके आसपास के यातायात प्रबंधन के लिए जिम्मेदार बनाने हेतु कुछ दिशानिर्देश तैयार करने के राज्य के प्रस्ताव को सरकार के विभिन्न विभागों के साथ-साथ लखनऊ के विभिन्न स्कूलों में भी प्रसारित करे। जिससे कि सभी स्कूलों के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देशों को वे पढ़कर अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे इन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देते समय उनपर विचार करके अनुमोदित किया जा सकेगा।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में आया कि ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए प्रशिक्षित किए गए मार्शलों की अधिकांश स्कूलों में ठीक से तैनाती नहीं की गई है, जिससे स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है। ओर ने कहा कि पर्याप्त समय देने के बाद भी सुधार न होना अधिकारियों और संबंधित पक्षों की उदासीनता को दर्शाता है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजवराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया। इसमें प्रदेश के स्कूलों की सुरक्षा समेत राजधानी के स्कूलों के पास ट्रैफिक समस्या का मुद्दा उठाया गया है।
इससे पहले, अदालत ने लखनऊ के कई स्कूलों के खुलने और बंद होने के समय के दौरान यातायात जाम पर चिंता व्यक्त की थी और राज्य के अधिकारियों को सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 मई को तय की है।