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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   High Court's important remark: Being in jail for a long time is not the only basis for bail, bail application of accused of oral sex rejected

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी : अधिक समय से जेल में बंद होना मात्र जमानत का आधार नहीं, ओरल सेक्स के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज

Wed, 13 Apr 2022 11:54 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 13 Apr 2022 11:54 AM IST
सार

मामला 2017 का है। आरोपी 1 सितंबर 2017 से जेल में है। जो 4 साल और 7 महीने जेल में बिता चुका है। बहस के दौरान यह भी दलील दी गई कि वास्तव में वर्तमान मामला मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद का है। घटना के समय 8 वर्षीय पीड़िता के माता-पिता आरोपी के घर में किरायेदार थे। 
 

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High Court's important remark: Being in jail for a long time is not the only basis for bail, bail application of accused of oral sex rejected
लखनऊ हाईकोर्ट

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक विचाराधीन आरोपी की जमानत मामले में अहम टिप्पणी की कि अभियुक्त का लंबे समय से जेल में बंद होना मात्र जमानत का आधार नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि यह जमानत का एक आधार हो सकता है. लेकिन मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह आदेश नाबालिग के साथ ओरल सेक्स के आरोपी गोविंद की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया। 

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याची के अधिवक्ता का कहना था कि मामला 2017 का है। आरोपी 1 सितंबर 2017 से जेल में है। जो 4 साल और 7 महीने जेल में बिता चुका है। बहस के दौरान यह भी दलील दी गई कि वास्तव में वर्तमान मामला मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद का है। घटना के समय 8 वर्षीय पीड़िता के माता-पिता आरोपी के घर में किरायेदार थे। 
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उधर, राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया। कोर्ट ने अभियुक्त की ओर से दी गई दलीलों को खारिज करते हुए पॉक्सो की धारा 4 (2) को उद्धृत किया। इसमें 16 साल से कम के बच्चे के साथ सेक्स में न्यूनतम 20 साल की सजा का प्रावधान है। गौरतलब है कि सजा का उक्त प्रावधान वर्ष 2019 में लागू किया गया था।

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