हाईकोर्ट का आदेश, नगर निगम एक माह में हटाए शहर से डेयरियां
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शहर में चल रही डेयरियों को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। इसके साथ ही नगर आयुक्त को नगर निगम के क्षेत्र से सभी डेयरियां महीने भर में हटाने का आदेश दिया है। जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार की बेंच ने यह आदेश राहुल श्रीवास्तव की याचिका पर दिया।
इसमें शहर से डेयरियां हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया था और कोर्ट ने इसके लिए पहले आदेश दिए थे। नगर आयुक्त को कोर्ट में मौजूद रहने को कहा गया था। नगर आयुक्त डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि पहले के आदेश के तहत 1038 डेयरियों में से 990 को हटा दिया गया है।
कई डेयरी मालिकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। साथ ही अब तक पौने दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, हटाने के कुछ समय बाद 180 डेयरियां फिर से चालू हो गईं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुलिस की मदद से इन सभी डेयरियों को हटा दिया जाएगा।
नगर आयुक्त ने कहा कि इस समय शहर में डिफेंस एक्सपो चल रहा है, जो 9 फरवरी तक चलेगा। ऐसे में पुलिस से सहयोग लेने के लिए उन्हें 15-20 दिन का समय और दिया जाए। उनके अनुरोध को मंजूर करते हुए कोर्ट ने एक महीने में नगर निगम के इलाके से सभी डेयरियां हटाने के लिए कदम उठाने का आदेश दिया। अगली सुनवाई महीने भर बाद होगी।
लंबे समय से चल रही कवायद
शहर से डेयरियां हटाने के लिए लंबे समय से कवायद चल रही है। कोर्ट के साथ ही शासन से भी इस संबंध में कई बार आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
डेयरियां हटाने के लिए कुछ दिन पहले अभियान चलाकर जानवर जब्त भी किए गए थे, लेकिन फिर विरोध, प्रदर्शन के बाद अभियान ढीला पड़ गया। यही नहीं जब्त जानवरों की नीलामी भी कराई गई, लेकिन यह भी प्रतीकात्मक होकर ही रह गई।
हटाने के बाद फिर बस रहीं डेयरियां
हटाए जा रहे डेयरी संचालक कुछ समय बाद फिर शहर में लौट आ रहे हैं। इसके लिए डेयरी संचालकों को विस्थापित करने की मांग भी लंबे समय से उठ रही है। इसी क्रम में बहुत पहले कैटिल कॉलोनी बनाकर कुछ डेयरी संचालकों को शिफ्ट कराया गया था, लेकिन बाद में फिर शहर में डेयरी संचालक बढ़ गए।
वहीं, कुछ समय पहले कैटिल कॉलोनी बनाने के लिए आवास विकास, एलडीए से जमीन भी मांगी गई थी, लेकिन इसका इंतजाम नहीं हो सका।