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प्रशासकों की नियुक्ति पर सरकार से जवाब तलब, हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों में तैनाती की वैधता पर जारी किया नोटिस
Wed, 06 Jan 2021 12:08 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 06 Jan 2021 12:08 AM IST
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फाइल फोटो
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की तैनाती की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह को 20 जनवरी को सुनवाई के लिए नोटिस जारी करते हुए जवाबी हलफनामा मांगा है।
मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने मंगलवार को यह आदेश पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन की पीआईएल पर दिया। इसमें ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद इनमें प्रशासकों की तैनाती को संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन कहा गया है।
याची संगठन के अधिवक्ता सीबी पांडेय के अनुसार वर्ष 2000 में एक अध्यादेश के बाद राज्य सरकार ने यूपी पंचायत राज अधिनियम बनाया। इसकी धारा 12(3)(ए) में कहा गया कि कार्यकाल खत्म होने पर सरकार पंचायतों में प्रशासन समिति या प्रशासक नियुक्त कर सकती है।
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हालांकि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस अध्यादेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। ऐसे में राज्य सरकार को प्रशासकों की नियुक्ति का अधिकार नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 243 (ई) के तहत पंचायतों का कार्यकाल 5 साल से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
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मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने मंगलवार को यह आदेश पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन की पीआईएल पर दिया। इसमें ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद इनमें प्रशासकों की तैनाती को संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन कहा गया है।
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याची संगठन के अधिवक्ता सीबी पांडेय के अनुसार वर्ष 2000 में एक अध्यादेश के बाद राज्य सरकार ने यूपी पंचायत राज अधिनियम बनाया। इसकी धारा 12(3)(ए) में कहा गया कि कार्यकाल खत्म होने पर सरकार पंचायतों में प्रशासन समिति या प्रशासक नियुक्त कर सकती है।
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हालांकि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस अध्यादेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। ऐसे में राज्य सरकार को प्रशासकों की नियुक्ति का अधिकार नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 243 (ई) के तहत पंचायतों का कार्यकाल 5 साल से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।